पुस्तक अगली ही पंक्ति में स्वयं उत्तर देती है: “इसका सीधा-सा उत्तर है कि समाज अपनी व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हो पाएगा।”
उसी अनुच्छेद में गिनाए गए नियमों को एक-एक कर हटाकर देखिए — उत्तर एकदम ठोस हो जाता है।
| नियम | यदि कोई पालन न करे |
|---|---|
| घर के नियम | खाने का कोई समय नहीं, कोई चीज़ अपनी जगह नहीं, कोई बताकर नहीं जाता — रोज़ छोटे-छोटे झगड़े और किसी की सुरक्षा नहीं |
| विद्यालय के नियम (विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए) | कक्षाएँ समय पर शुरू नहीं होंगी, किसी को पता नहीं होगा कि किस कक्ष में जाना है, और शोर में कोई शिक्षक पढ़ा नहीं पाएगा। पढ़ाई रुक जाएगी |
| परीक्षा के नियम | अंकों का कोई अर्थ नहीं रहेगा, क्योंकि ईमानदार और बेईमान परिश्रम में अंतर नहीं किया जा सकेगा |
| यातायात के नियम | ठीक वही दृश्य जो पृष्ठ 151 पर चित्र 10.1 के नीचे वाले चित्र में है — हर दिशा में मुड़े वाहन, कारों के बीच फँसे साइकिल-सवार और पैदल चलने वाले, और कोई आगे नहीं बढ़ पा रहा। और दुर्घटनाएँ |
| काम के नियम (कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के लिए) | न किसी को वेतन मिलने का भरोसा, न किसी नियोक्ता को काम पूरा होने का |