अन्वेषण अध्याय 10 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पृष्ठ 151 पर चित्र 10.1 में दिए गए दो चित्रों के बारे में बताइए। आप उनमें क्या अंतर पाते हैं?
उत्तर

दोनों चित्रों में एक ही जैसी व्यस्त सड़क, वैसे ही लोग और वैसे ही वाहन हैं। अंतर केवल इतना है कि पहले चित्र में सब यातायात के नियमों का पालन कर रहे हैं और दूसरे में कोई नहीं।

किस पर ध्यान देंऊपर का चित्र — नियमों का पालननीचे का चित्र — नियमों की अनदेखी
सड़कसाफ़ चौराहा, बनी हुई लेन और चार सफ़ेद ज़ेब्रा क्रॉसिंगवाहनों के नीचे सड़क की पट्टियाँ दिखतीं ही नहीं; लेन कहाँ है, पता नहीं चलता
वाहनएक कार, एक स्कूटर और एक बड़ी गाड़ी — सब अपनी-अपनी लेन में, एक ही दिशा में, बीच में जगह छोड़करकार, वैन, ऑटो, साइकिल और बस हर कोण पर फँसी हुई, अलग-अलग दिशाओं में मुँह किए, एक-दूसरे से सटी हुई
संकेत और चिह्नयातायात की बत्तियाँ काम कर रही हैं और उनका पालन हो रहा है; कोने पर ‘यहाँ न रुकें’ का चिह्न लगा हैकोई संकेत दिखाई ही नहीं देता, और दिखता भी तो कोई मानने वाला नहीं
पैदल चलने वालेलोग चौड़े फुटपाथ पर चल रहे हैं या ज़ेब्रा क्रॉसिंग से सड़क पार कर रहे हैंलोग सड़क के बीचोबीच चल रहे हैं, चलती गाड़ियों के बीच से निकल रहे हैं, कुछ बच्चों को साथ लिए हुए
साइकिल-सवारएक साइकिल-सवार अपनी लेन के किनारे सुरक्षित चल रही हैसाइकिलें कारों के बीच बिलकुल दबी हुई हैं, हिलने तक की जगह नहीं
समग्र प्रभावजगह, व्यवस्था, शांति — यातायात चल रहा हैभीड़, भ्रम, खतरा — कुछ भी आगे नहीं बढ़ रहा
इस जोड़ी का उद्देश्य: ये दो चित्र किसी अच्छी और किसी बुरी जगह के नहीं हैं। ये एक ही तरह की जगह हैं — एक बार नियमों के पालन के साथ, एक बार बिना। दूसरे चित्र में केवल अव्यवस्था जोड़ी गई है, और उसी से सब धीमे भी हो गए और असुरक्षित भी।
प्र2.
नियमों पर हमारी चर्चा से आप इसे कैसे जोड़कर देखते हैं?
उत्तर

चित्र 10.1 अध्याय के तर्क को दो चित्रों में कह देता है। ठीक ऊपर का अनुच्छेद पूछता है, “यदि कोई व्यक्ति नियम का पालन नहीं करता है, तो क्या होगा?” और उत्तर देता है, “समाज अपनी व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हो पाएगा।” नीचे वाला चित्र वही उत्तर है, चित्र-रूप में।

चर्चा में क्या कहा गयाचित्र क्या दिखाता है
“जब बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तब असहमति और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है”एक छोटे चौराहे पर इतने लोग और वाहन — नीचे वाले चित्र की अव्यवस्था
“व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम अनिवार्य हो जाते हैं”ऊपर वाला चित्र — लेन, बत्तियाँ, क्रॉसिंग — और सब जल्दी अपने गंतव्य तक
“सड़क पर वाहन-चालकों से भी यातायात के नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है”वही एक नियम-समूह जिस पर दोनों चित्र टिके हैं
शासन का अर्थ यह भी है कि “उनका पालन सुनिश्चित करनायातायात की बत्ती, ‘यहाँ न रुकें’ का चिह्न — और पृष्ठ 152 पर चित्र 10.2 में वह यातायात पुलिसकर्मी, जिसका पूरा काम यही है

तीन बातें लिख लेने योग्य हैं —

  • नियम उन्हीं के काम आते हैं जो उन्हें मानते हैं। ऊपर वाले चित्र में किसी को किसी और के लाभ के लिए नहीं रोका जा रहा — सब जल्दी घर पहुँच रहे हैं।
  • जिस नियम का पालन कोई नहीं कराता, वह नियम नहीं रह जाता। ज़ेब्रा क्रॉसिंग दोनों चित्रों में है; नीचे वाले में वह अव्यवस्था के नीचे ढँक गई है। इसीलिए शासन का तीसरा भाग है — पालन सुनिश्चित करना।
  • अव्यवस्था की सबसे बड़ी कीमत सबसे कमज़ोर चुकाते हैं। देखिए नीचे वाले चित्र में सबसे अधिक खतरे में कौन है — पैदल चलने वाले, साइकिल-सवार और बच्चे।
प्र3.
आपके विद्यालय में कौन-कौन से नियम है? उन्हें किसने बनाया?
उत्तर

विधि। वे नियम लिखिए जिनका आप वास्तव में पालन करते हैं, न कि सूचना-पट्ट पर लगी वह सूची जो कभी पढ़ी ही नहीं। फिर हर नियम के सामने लिखिए कि उसे किसने बनाया — क्योंकि प्रश्न का दूसरा भाग यही है। आप पाएँगे कि देश की तरह विद्यालय में भी नियम बनाने वाले एक से अधिक हैं।

मेरे विद्यालय का नियम — नमूना उत्तरकिसने बनायाक्यों है
प्रात: 8:00 बजे प्रार्थना सभा; 8:10 पर द्वार बंदप्रधानाचार्य और विद्यालय प्रबंधनपूरे दिन की समय-सारणी एक साझा आरंभ पर टिकी है
गणवेश, पहचान-पत्र और साफ़ जूतेविद्यालय प्रबंधनसब एक जैसे दिखें, ताकि कपड़ों से किसी को न आँका जाए; और बाहरी व्यक्ति पहचाना जा सके
कक्षा में मोबाइल फ़ोन नहींप्रबंधन, शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसारध्यान बना रहे और परीक्षा में निष्पक्षता रहे
गृहकार्य उसी दिन जमा; संशोधन अवश्यकक्षा-शिक्षक या विषय-शिक्षकपढ़ाई नियमित हो, तभी काम करती है
पुस्तकालय में मौन; पुस्तक सात दिन में वापसपुस्तकालयाध्यक्ष, प्रबंधन के साथसाझा संसाधन — वही तर्क जो हर साझा वस्तु पर लागू होता है
पानी और कैंटीन पर पंक्ति में लगनापहले परंपरा, फिर विद्यालय ने नियम बनायाबारी बाँटने का सबसे न्यायपूर्ण तरीका पंक्ति ही है
कक्षा का मॉनीटर कॉपियाँ इकट्ठी करता और अनुपस्थिति बताता हैकक्षा-शिक्षक, और मॉनीटर का चयन कक्षा करती हैयही प्रतिनिधित्व का पहला अनुभव है — वही उदाहरण जो पृष्ठ 159 पर आता है
कहीं कूड़ा नहीं; कचरा दो अलग डिब्बों मेंइको क्लब और प्रबंधन ने मिलकरविद्यार्थियों ने बनाया, इसलिए विद्यार्थी ही निभाते हैं
खेल का मैदान कालांश के अनुसार कक्षाओं में बँटाखेल शिक्षक और कक्षा-प्रतिनिधिमैदान एक, कक्षाएँ अनेक — बाँटने के लिए नियम चाहिए ही
परीक्षा के नियम — न बात, न अनुचित साधनविद्यालय से ऊपर — बोर्ड या परीक्षा-संस्थाअध्याय भी कहता है: “बड़ी कक्षाओं में परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों को भी कुछ अनिवार्य नियमों का पालन अवश्य करना पड़ता है”

प्रश्न का दूसरा भाग असल में क्या सिखा रहा है। अपनी सूची को ‘किसने बनाया’ के अनुसार छाँटिए — चित्र 10.4 के तीन स्तरों का छोटा रूप सामने आ जाएगा:

  • कक्षा-स्तर — कक्षा-शिक्षक और स्वयं कक्षा (मॉनीटर, बैठने का क्रम, सफ़ाई की बारी)।
  • विद्यालय-स्तर — प्रधानाचार्य और प्रबंधन (समय, गणवेश, अनुशासन)।
  • विद्यालय से ऊपर — बोर्ड या शिक्षा विभाग (परीक्षा के नियम, पाठ्यक्रम, सुरक्षा नियम)।
यह करके देखिए: कोई एक ऐसा नियम चुनिए जिसे आपके विचार से बदलना चाहिए और अध्याय की ही सलाह पर चलिए — “विद्यार्थी संघ, विद्यालय या विश्वविद्यालय प्रबंधन से नियमों में बदलाव के लिए कह सकते हैं”। कारण और विकल्प सहित प्रार्थना-पत्र लिखिए और अपने कक्षा-प्रतिनिधि को दीजिए। कक्षा में आधारभूत लोकतंत्र यही है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ