क्योंकि देश और कुछ नहीं, एक ही जगह साझा करते बहुत-बहुत लोग हैं — और जैसा अध्याय आरंभ में ही कहता है, “जब बहुत से लोग एक साथ रहते हैं, तब असहमति और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में, समाज में व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए नियम अनिवार्य हो जाते हैं।”
| हटा दीजिए | क्या रुक जाएगा |
|---|---|
| शासन (प्रक्रिया) | न कोई निर्णय होगा, न नियम बनेंगे, और न कोई देखेगा कि पालन हो रहा है या नहीं। चित्र 10.1 का नीचे वाला दृश्य, हर जगह |
| सरकार (तंत्र) | कानून बनाने के लिए विधायिका नहीं, सड़क-रेल-स्वास्थ्य-रक्षा-पुलिस चलाने के लिए कार्यपालिका नहीं, और विवाद निपटाने के लिए न्यायालय नहीं |
और ध्यान रहे, दोनों शब्द एक नहीं हैं: शासन काम है; सरकार वह है जो यह काम करती है। देश को दोनों चाहिए — संस्थाओं का ढाँचा भी और वह प्रक्रिया भी जिससे वे वास्तव में निर्णय लेकर उन्हें पूरा करती हैं।