नहीं। अध्याय तुरंत उत्तर देता है — “स्पष्ट है कि यह संभव नहीं है।”
संख्या पर विचार कीजिए। 2024 में भारत में लगभग 97 करोड़ मतदाता थे। यदि हर एक को इकट्ठा होकर, हर तर्क सुनकर, हर प्रश्न पर मत देना पड़े तो कोई निर्णय कभी नहीं हो पाएगा — इतने लोगों के लिए कोई सभागार नहीं है, और एक ही बहस वर्षों चलेगी।
इसलिए लोकतंत्र वही एक व्यावहारिक काम करता है: जनता अपनी ओर से काम करने के लिए कुछ लोगों को चुन लेती है।
प्रतिनिधि सभा में मिलते हैं → चर्चा, तर्क-वितर्क और निर्णय
यही प्रतिनिधि लोकतंत्र कहलाता है
| समूह का आकार | निर्णय कैसे हो सकता है |
|---|---|
| 40 विद्यार्थियों की कक्षा पिकनिक का स्थान चुनती है | सब मतदान करते हैं — प्रत्यक्ष लोकतंत्र (पृष्ठ 160 का हाथ उठाकर मतदान) |
| गाँव की ग्राम सभा | सभी वयस्क ग्रामवासी आकर बोल सकते हैं — अब भी काफ़ी हद तक प्रत्यक्ष |
| कई करोड़ लोगों का राज्य | विधान सभा में चुने हुए विधायक |
| 140 करोड़ लोगों का देश | लोकसभा और राज्य सभा में चुने हुए सांसद |