अन्वेषण अध्याय 10 प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
स्वयं परखिए — लोकतंत्र का क्या अर्थ है? प्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्रतिनिधि लोकतंत्र के बीच क्या अंतर है?
उत्तर

लोकतंत्र का अर्थ है ‘लोगों का शासन’। यह शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों से बना है — डेमोस, अर्थात ‘लोग’, और क्रेटोस, अर्थात ‘शासन प्रणाली या तंत्र या शक्ति’। विश्व के अधिकांश देशों ने “शासन प्रणाली की नींव के रूप में लोकतंत्र को अपनाया है”।

दोनों प्रकारों में अंतर:

तुलना का बिंदुप्रत्यक्ष लोकतंत्रप्रतिनिधि लोकतंत्र
निर्णय कौन लेता हैसमूह का प्रत्येक व्यक्ति स्वयंजनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि
राय कैसे गिनी जाती हैसब उसी प्रश्न पर मत देते हैं — जैसे ‘क’ या ‘ख’ स्थान के लिए हाथ उठानाजनता व्यक्ति चुनने के लिए मत देती है; फिर वह व्यक्ति प्रश्नों पर मत देता है
पुस्तक का उदाहरणपिकनिक का मतदान — “यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उदाहरण है, जहाँ स्थान निश्चित करने में प्रत्येक विद्यार्थी की राय ली गई”प्रधानाचार्य के पास भेजा गया कक्षा-प्रतिनिधि; और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर विधायक तथा सांसद
कहाँ उपयुक्तछोटे समूह जो सब एक साथ बैठ सकें — कक्षा, ग्राम सभा, छोटी संस्थाबड़ी जनसंख्या — राज्य या देश
जनता कब निर्णय करती हैहर उठने वाले प्रश्न परचुनाव के समय; उसके बीच निर्णय प्रतिनिधि लेते हैं
भारतछोटी संस्थाओं और बैठकों में“किसी भी आधुनिक लोकतंत्र की तरह भारत में ‘जन प्रतिनिधि’ आधारित लोकतंत्र है” — और 2024 में लगभग 97 करोड़ मतदाताओं के साथ विश्व का सबसे बड़ा
भारत हर बात के लिए प्रत्यक्ष लोकतंत्र क्यों नहीं अपना सकता: इसलिए नहीं कि लोगों की राय महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि केवल गणित के कारण। यदि 97 करोड़ मतदाताओं में से हर एक किसी एक कानून पर केवल एक मिनट भी बोले, तो बहस 1,800 वर्ष से अधिक चलेगी। प्रतिनिधित्व वही तरीका है जिससे हर व्यक्ति की आवाज़ निर्णय में बनी भी रहे और निर्णय इसी सप्ताह हो भी जाए।
भ्रम न हो: ‘प्रत्यक्ष’ का अर्थ ‘बेहतर’ नहीं और ‘प्रतिनिधि’ का अर्थ ‘कमज़ोर’ नहीं। दोनों लोकतंत्र ही हैं — अंतर समूह के आकार का है, स्वतंत्रता की मात्रा का नहीं।
प्र2.
सरकार के तीन अंग कौन-से हैं? उनकी क्या अलग-अलग भूमिकाएँ हैं?
उत्तर

सरकार के तीन अंग हैं — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।

अंगभूमिकाभारत मेंसाइबर अपराध के उदाहरण में
विधायिकानए कानून बनाती है, कभी-कभी संशोधन करती या निरस्त भी करती है। यह काम “जनता के प्रतिनिधियों की सभा” करती हैलोकसभा और राज्य सभा (राष्ट्रीय); विधान सभा (राज्य)। सदन अर्थात “ऐसी सभा जहाँ कानूनों पर चर्चा की जाती है अथवा उन्हें पारित किया जाता है”साइबर अपराध के विरुद्ध नए कानून बनाए
कार्यपालिकाकानूनों को लागू करती है — प्रमुख, मंत्रीगण और वे अभिकरण “जिनका दायित्व कानून को लागू करवाना होता है”राष्ट्रपति (औपचारिक प्रमुख और तीनों सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर) तथा प्रधानमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख; राज्यपाल (औपचारिक प्रधान) तथा मुख्यमंत्री कार्यपालिका के प्रमुखसाइबर पुलिस ने जाँच की और अपराधियों को गिरफ़्तार किया
न्यायपालिकानिर्णय करती है कि कानून टूटा या नहीं और आगे क्या कार्रवाई हो, आवश्यक हो तो दंड; कभी-कभी यह भी परखती है कि कार्यपालिका का निर्णय ठीक है या कानून सबके हित में हैभारत का सर्वोच्च न्यायालय; प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालयउन्हें दोषी ठहराया; “उन्हें आर्थिक दंड के साथ-साथ जेल की सजा भी दी जाती है”

पूरे अंक के लिए एक बात और जोड़िए: तीनों को पृथक रखा जाता है — यही शक्तियों का पृथक्करण है — यद्यपि वे एक-दूसरे को प्रभावित करते और साथ काम करते हैं। उद्देश्य है नियंत्रण एवं संतुलन: “सरकार का प्रत्येक अंग दूसरे अंग के कार्यों की निगरानी कर सकता है तथा… उसे नियंत्रित कर पुन: संतुलन स्थापित कर सकता है।”

याद रखने की तरकीब: बनाना · करना · परखना। विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उसे करती है, न्यायपालिका उसे परखती है।
प्र3.
भारत के परिप्रेक्ष्य में हमें त्रिस्तरीय सरकार की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर

क्योंकि समस्याएँ तीन आकारों में आती हैं, और हर आकार को उस स्तर पर सँभालना सबसे अच्छा है जो उसके सबसे निकट हो और उसे सँभाल भी सके। “अनेक देशों में कोई भी सरकार कई स्तरों पर कार्य करती है… प्रत्येक स्तर भिन्न विषयों पर कार्य करता है।”

तीन स्तर — चित्र 10.4, और हर स्तर का काम केंद्र सरकार राज्य सरकार राज्य स्तर पर स्थानीय सरकार नगर अथवा ग्राम स्तर पर राष्ट्रीय स्तर पर रक्षा, मुद्रा, विदेशी मामले पुलिस, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई पानी, नाली, बत्ती, गली की सड़कें
पृष्ठ 155 का पिरामिड — ऊपर संकरा, जहाँ विषय कम और राष्ट्रीय हैं; नीचे चौड़ा, जहाँ विषय अनेक और स्थानीय हैं।
कारणव्याख्या
1. विषयों का आकार अलग-अलग हैरक्षा, मुद्रा और विदेशी मामले पूरे देश के विषय हैं; पुलिस, स्वास्थ्य और सिंचाई राज्य के; और बंद नाली या टूटी स्ट्रीटलाइट एक गली की। एक ही कार्यालय ये तीनों काम अच्छी तरह नहीं कर सकता
2. स्थानीय समस्या के लिए स्थानीय जानकारी चाहिएकौन-सी गली में पानी भरता है और कौन-सा हैंडपंप खराब है, यह वहीं के लोग जानते हैं। दो हज़ार किलोमीटर दूर बैठकर लिया गया निर्णय यह चूक जाएगा
3. गतिकार्यालय पास हो तो छोटी समस्याएँ जल्दी सुलझती हैं — पृष्ठ 155 की बल्ब, बिजली मिस्त्री और बिजली विभाग वाली तुलना
4. बड़ी समस्या के लिए सीढ़ीएक क्षेत्र की बाढ़ स्थानीय प्राधिकारी सँभालते हैं; अनेक नगरों-गाँवों तक फैले तो राज्य बचाव दल भेजता है; और भयानक रूप ले ले तो केंद्र राहत सामग्री तथा सेना भेजता है
5. भारत विशाल और विविध हैअलग-अलग राज्यों की भाषा, फ़सल, वर्षा और आवश्यकताएँ अलग हैं। राज्य सरकारें राष्ट्रीय कानूनों के भीतर रहते हुए अपनी परिस्थितियों के अनुसार काम कर सकती हैं
6. इससे लोकतंत्र लोगों तक पहुँचता हैयह अध्याय की अपनी बात है: आधारभूत लोकतंत्र में “सामान्य नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित और सुनिश्चित किया जाता है”, ताकि नागरिक “स्वयं को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर अपनी बात रख सकते हैं”
आगे क्या: स्थानीय स्तर के लिए अलग अध्याय हैं — पुस्तक कहती है कि स्थानीय सरकारों का चित्र 10.5 में उल्लेख नहीं है “क्योंकि हम आगे के दो अध्यायों में इसे विस्तार से समझेंगे”।
प्र4.
परियोजना — 2019 की कोविड महामारी के दौरान लगा लॉकडाउन आपको याद होगा। उस समय उठाए गए सभी कदमों की सूची बनाइए। उस स्थिति को संभालने में सरकार के कौन-कौन से स्तर सम्मिलित थे? उसमें सरकार के प्रत्येक अंग की क्या भूमिका थी?
उत्तर

यह परियोजना कैसे कीजिए। चार विद्यार्थियों के समूह में काम कीजिए। सामग्री तीन स्रोतों से जुटाइए — (1) परिवारजनों और पड़ोसियों से पूछिए कि उन्हें क्या याद है, (2) विद्यालय या सार्वजनिक पुस्तकालय में 2020–21 के समाचार-पत्र देखिए, और (3) अपने विद्यालय ने जो किया, वह नोट कीजिए। लेखन को प्रश्न के अनुसार तीन भागों में रखिए — उठाए गए कदम, कौन-से स्तर, कौन-सा अंग। समय-रेखा वाला भित्ति-चित्र बहुत अच्छा रहता है।

भाग 1 — उठाए गए कदमों की सूची (नमूना; अपनी खोज से और जोड़िए):

क्षेत्रमहामारी के दौरान उठाए गए कदम
आवागमन पर रोकमार्च 2020 के अंत से देशव्यापी लॉकडाउन; आवश्यक सेवाओं को छोड़कर दुकानें, कार्यालय, कारखाने, रेल, बस और विमान बंद; कंटेनमेंट ज़ोन सील; अनेक जिलों में कर्फ़्यू जैसी पाबंदियाँ
स्वास्थ्य संबंधी उपायमास्क और शारीरिक दूरी अनिवार्य; जाँच केंद्र और कोविड देखभाल केंद्र; अस्पतालों में ऑक्सीजन संयंत्र और अतिरिक्त बिस्तर; पृथक-वास और संगरोध के नियम; जनवरी 2021 से देशव्यापी टीकाकरण अभियान और कोविन पोर्टल
भोजन और सहायता राशिराशन कार्डधारकों को नि:शुल्क अनाज; सामुदायिक रसोई; अनेक परिवारों के बैंक खातों में राशि; अपने घर लौटते श्रमिकों के लिए आश्रय और यातायात की व्यवस्था; बाद में विशेष रेलगाड़ियाँ
शिक्षाविद्यालय-महाविद्यालय बंद; ऑनलाइन कक्षाएँ, दूरदर्शन और रेडियो पर पाठ; परीक्षाएँ स्थगित या उनका स्वरूप बदला; मध्याह्न भोजन के बदले घर पर राशन या राशि
सूचनाप्रतिदिन के आँकड़े; हेल्पलाइन नंबर; स्वच्छता संबंधी विज्ञापन और उद्घोषणाएँ; भ्रामक सूचना पर कार्रवाई

भाग 2 — कौन-से स्तर सम्मिलित थे: तीनों, और पूरे अध्याय में यही सबसे अच्छा प्रमाण है कि तीन स्तर क्यों चाहिए।

स्तरउसने क्या किया
केंद्रदेशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा और राष्ट्रीय दिशानिर्देश; अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ और उड़ानें; टीकों तथा ऑक्सीजन की खरीद और वितरण; राष्ट्रीय अनाज योजना; और पूरे प्रयास का वित्तपोषण
राज्यदिशानिर्देशों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करना — चित्र 10.5 में “राज्य स्तर पर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को अपनाना और उनका कार्यान्वयन करना” राज्य का ही कार्य है; अस्पताल और जाँच (जन-स्वास्थ्य राज्य का विषय); पुलिस की तैनाती; विद्यालय बंद करने और खोलने का निर्णय
स्थानीयनगरपालिकाओं और पंचायतों ने कंटेनमेंट ज़ोन चिह्नित किए, गलियों में छिड़काव किया, घर-घर सर्वेक्षण और जाँच की, ज़रूरतमंदों तक भोजन-पानी पहुँचाया और स्थानीय उद्घोषणाएँ कीं। आँगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता एक-एक घर तक पहुँचीं

भाग 3 — सरकार के प्रत्येक अंग की भूमिका:

अंगमहामारी के समय उसकी भूमिका
विधायिकासंसद और विधान सभाओं की बैठकें हुईं, स्थिति पर चर्चा हुई, सरकार से प्रश्न पूछे गए, और वे विधेयक तथा बजट पारित हुए जिनसे राहत, अस्पताल और टीकों का खर्च चला; कुछ स्वास्थ्य और आपदा संबंधी कानूनों में संशोधन भी हुए
कार्यपालिकादिखाई देने वाला अधिकांश काम इसी ने किया — प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, स्वास्थ्य विभाग, जिलाधिकारी, पुलिस, चिकित्सक, नर्स, सफ़ाईकर्मी और नगरपालिका कर्मचारी। आदेश जारी हुए, अस्पताल चले, सामग्री पहुँची, नियमों का पालन कराया गया
न्यायपालिकान्यायालय चलते रहे, अनेक ऑनलाइन। ऑक्सीजन की आपूर्ति, अस्पताल के बिस्तरों, प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और जाँच-उपचार के मूल्य पर याचिकाएँ सुनी गईं और सरकारों से उत्तर तथा कार्रवाई माँगी गई — यह न्यायपालिका द्वारा यह “जाँच करने” का उदाहरण है “कि क्या कार्यपालिका द्वारा लिया गया कोई निर्णय ठीक है या नहीं”
परियोजना का निष्कर्ष क्या हो: एक ही आपदा में हर स्तर और हर अंग एक साथ लगे — राष्ट्रीय नियम, उसे अपनाता राज्य, हर गली तक पहुँचाती नगरपालिका, धन स्वीकृत करती सभा, और कुछ गड़बड़ होने पर प्रश्न पूछता न्यायालय। महामारी अध्याय के दोनों प्रमुख चित्रों — चित्र 10.3 के तीन अंग और चित्र 10.4 के तीन स्तर — का सबसे हाल का और सबसे स्पष्ट प्रमाण है।
अच्छी परियोजना के लिए दो सावधानियाँ। पहली, तिथियाँ: कोविड-19 की पहचान 2019 में हुई, महामारी भारत तक 2020 के आरंभ में पहुँची और देशव्यापी लॉकडाउन मार्च 2020 में लगा। दूसरी, लेखन को संस्थाओं और प्रक्रियाओं पर केंद्रित रखिए — किस स्तर और किस अंग ने क्या किया — किसी दल या नेता की प्रशंसा या आलोचना पर नहीं। समूह में मतभेद हो तो दोनों मत लिखिए और यह भी लिखिए कि हर मत किस प्रमाण पर टिका है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ