प्र1.
आप दैनिक जीवन की ऐसी एक परिस्थिति का वर्णन करें जहाँ कोई व्यक्ति वैज्ञानिक विधि का अनुसरण करता है।
उत्तर
अपनी देखी हुई कोई वास्तविक घटना चुनिए और उसे पाँच चरणों में लिखिए। उत्तर में यह दिखना चाहिए कि उस व्यक्ति ने पहले अनुमान लगाया और फिर जाँचा।
नमूना उत्तर: पिछले महीने हमारा पंखा तेज़ आवाज़ करने लगा। पिताजी ने पहले अनुमान लगाया कि कोई पंखुड़ी ढीली हो गई है। उन्होंने पंखा बंद करके, स्टूल पर चढ़कर हर पंखुड़ी हिलाकर देखी — तीनों कसी हुई थीं, अतः यह अनुमान गलत निकला। फिर उन्होंने अनुमान लगाया कि पंखे पर धूल और चिकनाई जम गई है जिससे संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने गीले कपड़े से पंखुड़ियाँ साफ़ कीं और जोड़ों पर तेल की कुछ बूँदें डालीं। पंखा चलाने पर आवाज़ पूरी तरह बंद हो गई। उनका दूसरा अनुमान सही सिद्ध हुआ।
आप इनमें से किसी परिस्थिति पर भी लिख सकते हैं —
- दूध उफनकर गिर गया — आँच बहुत तेज़ थी या बरतन बहुत छोटा?
- सर्दियों में दही नहीं जमा — जामन डालते समय दूध बहुत ठंडा तो नहीं था?
- मोबाइल की बैटरी जल्दी उतरने लगी — दोष बैटरी में था या पीछे चलते किसी ऐप में?
- कोने में रखा पौधा पीला पड़ गया — धूप कम मिली या पानी अधिक दे दिया?
- पानी की मोटर चालू नहीं हुई — दोष स्विच, तार या मोटर में था?
हर उदाहरण में क्या देखना है: व्यक्ति ने अपने पहले विचार को अंतिम नहीं माना। उसने एक संभावित कारण बताया, उसे जाँचने का उपाय किया और अपना मत बदलने के लिए तैयार रहा। गलत सिद्ध होने की यही तैयारी वैज्ञानिक विधि की असली पहचान है।