प्र1.
बुद्धिमान होने के लिए आपको प्रश्न पूछने वाला बनना आवश्यक है।
उत्तर
यह अध्याय का समापन-विचार है। अंग्रेज़ी संस्करण में यह शब्दों का सुंदर खेल है — “wise” (बुद्धिमान) और “whys” (क्यों पूछने वाला) लगभग एक जैसे सुनाई देते हैं।
इसका अर्थ: बुद्धिमानी बने-बनाए उत्तर इकट्ठे करने से नहीं आती। वह “क्यों?” पूछने की आदत से आती है — और फिर ईमानदारी से उसका उत्तर खोजने से।
- जो केवल रटता है वह तथ्य दोहरा तो सकता है, पर नई परिस्थिति सामने आते ही अटक जाता है।
- जो “क्यों” पूछता है वह तथ्य के पीछे का कारण समझता है, इसलिए वह उसे ऐसी स्थिति में भी लगा सकता है जो किसी ने पढ़ाई ही न हो।
अध्याय का अंत इसी बात पर क्यों: पूरा अध्याय यही समझाता आया है कि विज्ञान कार्य करने की पद्धति है, सूचनाओं का ढेर नहीं। जिज्ञासा प्रक्रिया आरंभ करती है, प्रश्न उसे दिशा देता है और परीक्षण उसे तय करता है। “क्यों” हटा दीजिए तो पूरी विधि ढह जाती है।
यह करके देखिए: एक “क्यों-कॉपी” बनाइए। प्रतिदिन एक ऐसी बात लिखिए जिसने आपको उलझाया — और उत्तर मिलने पर भरने के लिए नीचे जगह छोड़ दीजिए। कक्षा 6 के अंत तक आप स्वयं देखकर चकित होंगे कि कितनी जगहें आपने स्वयं भर ली हैं।