पाठ्यपुस्तक के अपने शब्दों में —
विज्ञान देखने, सोचने, समझने और कार्य करने का एक सशक्त माध्यम है जो विश्व के रहस्यों की परतें खोलता है।
अर्थात् विज्ञान तथ्यों से भरी कोई मोटी पुस्तक नहीं, बल्कि कार्य करने की एक पद्धति है। इस परिभाषा के तीन भाग देखिए —
- सोचना — प्रश्न पूछना, अनुमान लगाना, तर्क करना कि उत्तर क्या हो सकता है।
- देखना (अवलोकन) — आस-पास की वस्तुओं को ध्यान से देखना और नोट करना कि वास्तव में क्या होता है।
- करना — प्रयोग करके देखना, अपने अनुमान का परीक्षण करना।
पुस्तक विज्ञान की तुलना दो चीज़ों से करती है —
- एक रोमांचक साहसिक कार्य — जहाँ हम प्रश्न पूछते हैं, खोजते हैं और समझने का प्रयास करते हैं कि यह सब होता कैसे है।
- एक व्यापक और अंतहीन जिग्सॉ पहेली — हर नई खोज इसमें एक और टुकड़ा जोड़ देती है। कभी-कभी पता चलता है कि कोई टुकड़ा गलत स्थान पर लगा है और उसे हटाना पड़ता है। इसीलिए नई खोजें विश्व के बारे में हमारी समझ बदलती रहती हैं।
यह पहेली कभी समाप्त क्यों नहीं होती: ज्ञान का हर नया भाग नए प्रश्नों की ओर ले जाता है। जल उबलता है, यह जान लेने पर हम रुकते नहीं — फिर पूछते हैं कि किस तापमान पर उबलता है और पहाड़ पर जल्दी क्यों उबल जाता है। इसलिए खोज की कोई सीमा नहीं है।
क्या आप जानते हैं? वैज्ञानिक का सबसे बड़ा उपकरण सूक्ष्मदर्शी या दूरदर्शी नहीं, ‘जिज्ञासा’ है। इसीलिए इस पाठ्यपुस्तक का नाम जिज्ञासा रखा गया है।