कुतूहल अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
विद्यालय के प्रारंभिक स्तर में पढ़ते हुए क्या आप अपने आस-पास के परिवेश के विषय में पता लगाकर और खोजकर आनंदित हुए?
उत्तर

हाँ। प्रारंभिक स्तर (कक्षा 3, 4 और 5) में हमने जो कुछ सीखा, उसमें अधिकांश खोजना और करना था, रटना नहीं।

  • हमने अवलोकन किया — पत्तियों के आकार, कतार में चलती चींटियाँ, रात-प्रतिरात बदलता चंद्रमा।
  • हमने एकत्र और वर्गीकृत किया — बीज, कंकड़, पंख, पशु-पक्षियों के चित्र।
  • हमने हाथ से करके देखा — गीली रुई पर चने उगाए, कागज़ की पवनचक्की बनाई, बाल्टी के पानी में वस्तुएँ तैराईं और डुबोईं।
  • हमने लोगों से बात की — दादा-दादी से उनके बचपन के खेल और भोजन के बारे में पूछा, बाज़ार और डाकघर देखने गए।
पुस्तक यह प्रश्न क्यों पूछती है: अध्याय आपको यह अनुभव कराना चाहता है कि आप पहले से ही विज्ञान करते आ रहे हैं। मध्य स्तर में वही जिज्ञासा आगे बढ़ती है, बस अब उसे एक नाम — विज्ञान — और एक क्रमबद्ध विधि मिल जाती है।
यह करके देखिए: कक्षा 5 में स्वयं खोजी गई तीन ऐसी बातें लिखिए जिन्होंने आपको चकित किया था। यह सूची सँभालकर रखिए — कक्षा 6 के अंत तक आप उनमें से अधिकांश की व्याख्या कर सकेंगे।
प्र2.
विज्ञान क्या है?
उत्तर

पाठ्यपुस्तक के अपने शब्दों में —

विज्ञान देखने, सोचने, समझने और कार्य करने का एक सशक्त माध्यम है जो विश्व के रहस्यों की परतें खोलता है।

अर्थात् विज्ञान तथ्यों से भरी कोई मोटी पुस्तक नहीं, बल्कि कार्य करने की एक पद्धति है। इस परिभाषा के तीन भाग देखिए —

  • सोचना — प्रश्न पूछना, अनुमान लगाना, तर्क करना कि उत्तर क्या हो सकता है।
  • देखना (अवलोकन) — आस-पास की वस्तुओं को ध्यान से देखना और नोट करना कि वास्तव में क्या होता है।
  • करना — प्रयोग करके देखना, अपने अनुमान का परीक्षण करना।

पुस्तक विज्ञान की तुलना दो चीज़ों से करती है —

  • एक रोमांचक साहसिक कार्य — जहाँ हम प्रश्न पूछते हैं, खोजते हैं और समझने का प्रयास करते हैं कि यह सब होता कैसे है।
  • एक व्यापक और अंतहीन जिग्सॉ पहेली — हर नई खोज इसमें एक और टुकड़ा जोड़ देती है। कभी-कभी पता चलता है कि कोई टुकड़ा गलत स्थान पर लगा है और उसे हटाना पड़ता है। इसीलिए नई खोजें विश्व के बारे में हमारी समझ बदलती रहती हैं।
यह पहेली कभी समाप्त क्यों नहीं होती: ज्ञान का हर नया भाग नए प्रश्नों की ओर ले जाता है। जल उबलता है, यह जान लेने पर हम रुकते नहीं — फिर पूछते हैं कि किस तापमान पर उबलता है और पहाड़ पर जल्दी क्यों उबल जाता है। इसलिए खोज की कोई सीमा नहीं है।
क्या आप जानते हैं? वैज्ञानिक का सबसे बड़ा उपकरण सूक्ष्मदर्शी या दूरदर्शी नहीं, ‘जिज्ञासा’ है। इसीलिए इस पाठ्यपुस्तक का नाम जिज्ञासा रखा गया है।
प्र3.
क्या आपने कभी रात के आकाश में चमकते तारों को ध्यान से देखा और ये सोचा कि ये तारे चमकते क्यों हैं?
उत्तर

हाँ — और यह प्रश्न इस बात का सुंदर उदाहरण है कि विज्ञान साधारण अवलोकन से आरंभ होता है।

क्या दिखाई देता है: स्वच्छ, अँधेरी रात में, रोशनी से दूर, हज़ारों छोटे-छोटे प्रकाश-बिंदु दिखते हैं। ये टिमटिमाते हैं और कुछ दूसरों से अधिक चमकीले लगते हैं। चंद्रमा टिमटिमाता नहीं।

ऐसा क्यों होता है:

  • तारा अपना प्रकाश स्वयं उत्पन्न करता है। तारे के भीतर पदार्थ इतना सघन और गरम होता है कि वहाँ अपार ऊष्मा और प्रकाश निकलता है। हमारा सूर्य भी एक तारा है — सबसे निकट वाला। इसीलिए वह आग के विशाल गोले जैसा और शेष तारे बिंदु जैसे दिखते हैं।
  • तारे छोटे केवल इसलिए दिखते हैं कि वे अकल्पनीय रूप से दूर हैं।
  • वे टिमटिमाते इसलिए दिखते हैं कि उनका प्रकाश पृथ्वी के चारों ओर की हिलती-डुलती वायु की परतों से होकर आता है, जो प्रकाश को थोड़ा इधर-उधर मोड़ देती हैं। चंद्रमा और ग्रह बहुत पास हैं और बिंदु के बजाय छोटी चकती जैसे दिखते हैं, इसलिए उनका टिमटिमाना नहीं दिखता।
दैनिक जीवन में उपयोग: कम्पास और GPS से बहुत पहले भारतीय नाविक और यात्री दिशा जानने के लिए ध्रुव तारे का उपयोग करते थे। किसान आज भी सूर्य और तारों की स्थिति देखकर बुवाई का समय तथा मकर संक्रांति जैसे त्योहारों की तिथि तय करते हैं।
स्वयं जाँचिए: बिना चंद्रमा वाली रात में पहले अपनी गली से और फिर बत्तियाँ बुझाकर छत या खुले खेत से आकाश देखिए। अँधेरी जगह में कहीं अधिक तारे दिखेंगे। हमारी अपनी बत्तियों का प्रकाश ही उन्हें छिपा देता है — इसे प्रकाश प्रदूषण कहते हैं।
प्र4.
किसी फूल को खिलते देख आप विस्मित हुए हैं कि उसे कैसे पता चलता है कि कब खिलना है?
उत्तर

हाँ — फूल सचमुच निश्चित समय पर खिलते और बंद होते हैं, और यह संयोग नहीं है।

क्या दिखाई देता है: कमल और सूरजमुखी सुबह की धूप में खिलते हैं और साँझ तक बंद हो जाते हैं। रात की रानी और ब्रह्म कमल इसके उलट अँधेरा होने पर खिलते हैं। इमली और वर्षा-वृक्ष की पत्तियाँ रात में मुड़ जाती हैं।

ऐसा क्यों होता है: पौधे के पास न आँखें हैं न मस्तिष्क, फिर भी वह अपने परिवेश को अनुभव कर सकता है

  • पंखुड़ियाँ प्रकाश और अंधकार के प्रति तथा दिन-रात के तापमान के घटने-बढ़ने के प्रति अनुक्रिया करती हैं। पंखुड़ी के एक ओर की कोशिकाएँ दूसरी ओर की तुलना में थोड़ा तेज़ी से जल भरकर फूलती हैं, जिससे पंखुड़ी बाहर की ओर मुड़ जाती है और फूल खिल जाता है।
  • पौधों में लगभग 24 घंटे की एक भीतरी “जैविक घड़ी” भी होती है, इसीलिए वे धूप आने से थोड़ा पहले ही खिलने लगते हैं।
  • यह समय पौधे के काम का है। दिन में खिलने वाले फूल तब खुलते हैं जब मधुमक्खियाँ और तितलियाँ सक्रिय होती हैं; रात में खिलने वाले फूल तब खुलते हैं जब पतंगे और चमगादड़ घूमते हैं — और वे प्रायः सफ़ेद तथा तेज़ सुगंध वाले होते हैं ताकि अँधेरे में पहचाने जा सकें।
बड़ी बात: फूल “सोच” नहीं रहा है। वह परिवेश में हुए परिवर्तन के प्रति अनुक्रिया कर रहा है — और परिवेश के प्रति अनुक्रिया करना सजीवों का एक प्रमुख लक्षण है। यह आप पौधों तथा सजीवों वाले अध्यायों में पढ़ेंगे।
यह करके देखिए: विद्यालय के बगीचे में गुड़हल की एक कली को दो दिन तक देखिए। प्रतिदिन उसके खिलने का और पंखुड़ियाँ मुरझाने का समय लिखिए। क्या दोनों दिन समय एक-सा रहा?
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