प्र1.
क्या आपने कभी अपने आस-पास विद्यमान विभिन्न प्रकार के पौधों और जंतुओं का अवलोकन किया है? अपने अवलोकनों को अपने मित्रों और शिक्षक के साथ साझा कीजिए और उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर
हाँ। घर से विद्यालय तक की छोटी-सी यात्रा में भी अनेक प्रकार के जीव मिलते हैं — बस ध्यान से देखने की आवश्यकता है।
आप क्या देखेंगे:
- पौधे — सड़क किनारे कोमल हरी घास, गमले में तुलसी, लाल फूलों वाली गुड़हल की झाड़ी, नुक्कड़ पर ऊँचा नीम या पीपल, दीवार पर चढ़ता मनी प्लांट और भूमि पर फैलती कद्दू की बेल।
- जंतु — तारों पर बैठे कौए और मैना, झाड़ी में गौरैया, तने पर दौड़ती गिलहरी, पंक्ति में चलती चींटियाँ, फूल-फूल पर मँडराती तितलियाँ, दीवार पर छिपकली, तालाब के पास भैंसें और वर्षा के बाद टर्राते मेंढक।
- ध्वनियाँ भी अलग हैं — अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण अवलोकन यही है कि प्रत्येक पक्षी की अपनी एक अलग चहचहाहट होती है। कोयल की कूक, कौए की काँव-काँव और गौरैया की चहचहाहट बिना पक्षी को देखे ही पहचानी जा सकती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: इन सभी भिन्नताओं को मिलाकर विविधता कहते हैं। किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं की विविधता उस क्षेत्र की जैव विविधता है। कोई दो प्रकार के जीव आकृति, आकार, रंग, भोजन, घर या ध्वनि में बिलकुल एक जैसे नहीं होते — और इसी विविधता को व्यवस्थित करना अध्याय 2 का उद्देश्य है।
सैर के लिए सुझाव: डॉ. रघु का नियम याद रखें — बिना छेड़छाड़ किए अवलोकन करें। फूल-पत्ती न तोड़ें और किसी जंतु को न डराएँ। नोटबुक, पेन और पानी की बोतल साथ रखें और जो देखें वहीं लिख लें; स्मृति धुँधली पड़ जाती है, लिखा हुआ नहीं।