कुतूहल अध्याय 4 क्रियाकलाप 4.4

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
जब सुई रुक जाती है तो आपका चुंबकीय दिक्सूचक उपयोग के लिए तैयार है। ध्यान दें कि सुई के दोनों सिरे कौन-कौन सी दिशा इंगित करते हैं। कॉर्क धीरे से घुमाएँ और इसके रूकने तक प्रतीक्षा करें। इसे कई बार दोहराएँ। क्या सुई के सिरे हमेशा एक ही दिशा में इंगित करते हैं?
उत्तर

हाँ। कॉर्क को आप कितनी भी बार घुमाइए, सुई थोड़ा डोलकर हर बार उसी सिरे को उत्तर और दूसरे सिरे को दक्षिण की ओर करके ठहर जाती है।

पहली बार घुमाया → सुई उत्तर-दक्षिण में ठहरी
दूसरी बार → वही सिरे, वही दिशाएँ
तीसरी बार → फिर वही
चुंबकीकृत सुई ठीक स्वतंत्र रूप से लटके छड़ चुंबक की तरह व्यवहार कर रही है।
कॉर्क और पानी की आवश्यकता क्यों: सुई को लगभग बिना किसी घर्षण के घूमने की स्वतंत्रता चाहिए। पानी पर तैरने से वह क्षैतिज तल में सहज घूम पाती है और शेष काम पृथ्वी का चुंबकत्व कर देता है। ध्यान दीजिए कि कॉर्क में आर-पार घुसी होने से सुई क्षैतिज भी बनी रहती है।
स्वयं जाँचें: अपने तैरते दिक्सूचक के पास स्टील की कैंची लाइए। सुई उत्तर से हटकर घूम जाएगी। कैंची हटाते ही वह लौट आएगी। इसीलिए दिक्सूचक को लोहे की वस्तुओं से दूर रखकर पढ़ना चाहिए।
प्र2.
जब हम दो चुंबक एक-दूसरे के पास लाते हैं तो क्या होता है?
उत्तर

यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-से ध्रुव आमने-सामने हैं — और परिणाम केवल दो ही संभव हैं।

उत्तरी ध्रुव के सामने दक्षिणी ध्रुव → आकर्षण (वे पास खिंचते हैं)
उत्तर के सामने उत्तर, या दक्षिण के सामने दक्षिण → प्रतिकर्षण (वे दूर हटते हैं)
असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं; समान ध्रुव प्रतिकर्षित करते हैं।

अगले पृष्ठ का क्रियाकलाप 4.5 इसे बहुत सुंदर ढंग से दिखाता है — गोल पेंसिलों पर रखा छड़ चुंबक एक स्थिति में पास आते चुंबक की ओर लुढ़कता है और दूसरे चुंबक को उलट देने पर उससे दूर लुढ़कने लगता है।

पेंसिलों का उपयोग क्यों: वे बेलनों (रोलर) का काम करती हैं, जिससे ऊपर रखा चुंबक लगभग बिना घर्षण के चल सकता है। तब कुछ सेंटीमीटर दूर रखे चुंबक का हल्का-सा धक्का या खिंचाव भी उसे लुढ़का देने के लिए पर्याप्त होता है — इससे सिद्ध होता है कि चुंबक बिना स्पर्श किए एक-दूसरे पर प्रभाव डालते हैं।
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