प्र1.
जब सुई रुक जाती है तो आपका चुंबकीय दिक्सूचक उपयोग के लिए तैयार है। ध्यान दें कि सुई के दोनों सिरे कौन-कौन सी दिशा इंगित करते हैं। कॉर्क धीरे से घुमाएँ और इसके रूकने तक प्रतीक्षा करें। इसे कई बार दोहराएँ। क्या सुई के सिरे हमेशा एक ही दिशा में इंगित करते हैं?
उत्तर
हाँ। कॉर्क को आप कितनी भी बार घुमाइए, सुई थोड़ा डोलकर हर बार उसी सिरे को उत्तर और दूसरे सिरे को दक्षिण की ओर करके ठहर जाती है।
पहली बार घुमाया → सुई उत्तर-दक्षिण में ठहरी
दूसरी बार → वही सिरे, वही दिशाएँ
तीसरी बार → फिर वही
चुंबकीकृत सुई ठीक स्वतंत्र रूप से लटके छड़ चुंबक की तरह व्यवहार कर रही है।
दूसरी बार → वही सिरे, वही दिशाएँ
तीसरी बार → फिर वही
चुंबकीकृत सुई ठीक स्वतंत्र रूप से लटके छड़ चुंबक की तरह व्यवहार कर रही है।
कॉर्क और पानी की आवश्यकता क्यों: सुई को लगभग बिना किसी घर्षण के घूमने की स्वतंत्रता चाहिए। पानी पर तैरने से वह क्षैतिज तल में सहज घूम पाती है और शेष काम पृथ्वी का चुंबकत्व कर देता है। ध्यान दीजिए कि कॉर्क में आर-पार घुसी होने से सुई क्षैतिज भी बनी रहती है।
स्वयं जाँचें: अपने तैरते दिक्सूचक के पास स्टील की कैंची लाइए। सुई उत्तर से हटकर घूम जाएगी। कैंची हटाते ही वह लौट आएगी। इसीलिए दिक्सूचक को लोहे की वस्तुओं से दूर रखकर पढ़ना चाहिए।