कुतूहल अध्याय 4 क्रियाकलाप 4.5

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अब चुंबक II का एक सिरा पेंसिलों पर रखे चुंबक I के सिरे के पास लाएँ। सुनिश्चित करें कि दोनों चुंबक एक-दूसरे को स्पर्श न करें। अब देखें कि क्या होता है।
उत्तर

अवलोकन: चुंबक I चुंबक II की ओर लुढ़क जाता है, जबकि दोनों एक-दूसरे को छूते तक नहीं। चित्र 4.8(क) में चुंबक I का दक्षिणी ध्रुव चुंबक II के उत्तरी ध्रुव के सामने है — असमान ध्रुव — इसलिए वे आकर्षित करते हैं।

असमान ध्रुव आमने-सामने → आकर्षण N S N S समान ध्रुव आमने-सामने → प्रतिकर्षण N S S N
ऊपर: एक चुंबक का S ध्रुव दूसरे के N ध्रुव के सामने है, इसलिए चुंबक पास खिंचते हैं। नीचे: दो S ध्रुव आमने-सामने हैं, इसलिए चुंबक एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं।
यह बिना स्पर्श के क्रिया कैसे सिद्ध करता है: चुंबक I बेलनों पर है और चुंबक II उसे कभी छूता नहीं, फिर भी वह गति करता है। धक्का और खिंचाव हवा के अंतराल को पार कर जाते हैं। यही बात चुंबकीय बल को हाथ से डिब्बा सरकाने वाले साधारण बल से अलग बनाती है।
प्र2.
इसके बाद, चुंबक II का दूसरा सिरा चुंबक I के उसी सिरे के पास लाएँ जैसे चित्र 4.8 (ख) में दिखाया गया है। क्या पेंसिलों पर रखा चुंबक I गतिमान हो जाता है? क्या यह हमेशा पास आने वाले चुंबक की दिशा में गति करता है? इन अवलोकनों से क्या निष्कर्ष निकलता है?
उत्तर

हाँ, चुंबक I गतिमान हो जाता है — परंतु इस बार वह चुंबक II से दूर लुढ़कता है।

नहीं, वह हमेशा पास आने वाले चुंबक की दिशा में गति नहीं करता। गति की दिशा इस बात से तय होती है कि कौन-से ध्रुव आमने-सामने हैं।

आमने-सामने के ध्रुवचुंबक I क्या करता हैप्रभाव का नाम
चुंबक I का S ← चुंबक II का N [चित्र 4.8(क)]चुंबक II की ओर लुढ़कता हैआकर्षण
चुंबक I का S ← चुंबक II का S [चित्र 4.8(ख)]चुंबक II से दूर लुढ़कता हैप्रतिकर्षण

इन अवलोकनों से निकलने वाला निष्कर्ष:

असमान ध्रुव (उत्तर-दक्षिण) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
समान ध्रुव (उत्तर-उत्तर या दक्षिण-दक्षिण) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
सुझाव: इसे ऐसे याद रखिए — “विपरीत खींचें, समान धकेलें”। दोनों चित्रों में केवल चुंबक II का पलटना बदला था, बाकी सब वैसा ही था — इसलिए कारण ध्रुव ही हो सकते हैं।
प्र3.
किसी एक चुंबक के स्थान पर लोहे की छड़ से इसी क्रियाकलाप को दोहराएँ। इस बार आप क्या देखते हैं?
उत्तर

अवलोकन: लोहे की छड़ चुंबक के दोनों सिरों से आकर्षित होती है। उत्तरी ध्रुव पास लाइए — वह खिंचती है। दक्षिणी ध्रुव पास लाइए — तब भी खिंचती है। वह कभी दूर नहीं हटती

लोहे की छड़ के पास लाया गयापरिणाम
चुंबक का उत्तरी ध्रुवआकर्षण
चुंबक का दक्षिणी ध्रुवआकर्षण
कोई भी ध्रुवप्रतिकर्षण कभी नहीं दिखता

निष्कर्ष: किसी चुंबक की पहचान उसके प्रतिकर्षण के गुण से होती है, आकर्षण से नहीं। केवल आकर्षण प्रमाण नहीं है, क्योंकि लोहे का साधारण टुकड़ा भी चुंबक को आकर्षित करता है।

लोहे की छड़ कभी प्रतिकर्षित क्यों नहीं करती: उसके अपने कोई स्थायी ध्रुव नहीं होते। चुंबक पास आते ही लोहे में ध्रुव प्रेरित हो जाते हैं और वे सदैव इसी क्रम में बनते हैं कि खिंचाव उत्पन्न हो — लोहे का निकटवर्ती तल असमान ध्रुव बन जाता है। इसलिए आप कोई भी ध्रुव सामने लाइए, आकर्षण ही मिलेगा।
सुझाव: यही एक विचार इस अध्याय के तीन अभ्यास प्रश्नों (प्र.5, प्र.6 और प्र.7 का एक भाग) का उत्तर दे देता है। प्रतिकर्षण ही चुंबक की पक्की पहचान है।
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