हाँ। दिक्सूचक की सुई एक छोटा, स्वतंत्र रूप से घूमने वाला चुंबक है, इसलिए वह छड़ चुंबक के ही नियमों का पालन करती है — उसका उत्तरी ध्रुव दूसरे उत्तरी ध्रुव से प्रतिकर्षित और दक्षिणी ध्रुव से आकर्षित होता है।
अंतर केवल इतना है कि सुई बहुत हल्की है और नुकीली पिन पर टिकी है, इसलिए वह पूरी की पूरी खिसकने या पास आने के बजाय बस घूम जाती है (विक्षेपित होती है)।