प्र1.
मान लीजिए हम दिक्सूचक सुई और चुंबक के बीच लकड़ी का एक टुकड़ा रखते हैं। क्या इससे दिक्सूचक सुई के विक्षेपण पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर
नहीं, कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दिक्सूचक की सुई लगभग उतना ही विक्षेपित होती है जितना पहले होती थी। लकड़ी चुंबकीय प्रभाव को नहीं रोकती।
चुंबक → हवा → सुई : सुई विक्षेपित होती है
चुंबक → लकड़ी → सुई : सुई तब भी लगभग उतनी ही विक्षेपित होती है
चुंबक → लकड़ी → सुई : सुई तब भी लगभग उतनी ही विक्षेपित होती है
ऐसा क्यों होता है: लकड़ी एक अचुंबकीय पदार्थ है। चुंबक का चुंबकीय प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के आर-पार ऐसे निकल जाता है मानो वे वहाँ हों ही नहीं। वास्तव में केवल चुंबक और सुई के बीच की दूरी मायने रखती है — इसलिए लकड़ी सरकाते समय चुंबक की दूरी बिलकुल न बदलने दीजिए, वरना आप स्वयं को ही धोखा दे बैठेंगे।