कुतूहल अध्याय 4 चुंबकों के साथ मनोरंजन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या हम चुंबकों का प्रयोग करके एक माला (चित्र 4.11) बना सकते हैं?
उत्तर

हाँ। चुंबकीय माला स्टील के पेपर क्लिपों की वह लड़ी है जो एक ही चुंबक से एक के नीचे एक लटकती है और जिसे जोड़े रखने वाला केवल चुंबकत्व है।

कैसे बनाएँ:

  1. एक मजबूत छड़ चुंबक को एक सिरे से पकड़िए।
  2. स्टील का एक पेपर क्लिप उसके खुले ध्रुव से छुआइए। वह चिपक जाएगा।
  3. दूसरा क्लिप पहले क्लिप के निचले सिरे से छुआइए — वह भी चिपक जाएगा। फिर तीसरा, चौथा, और आगे भी।
  4. लड़ी तब तक बढ़ती है जब तक नीचे के क्लिप चुंबक से इतने दूर न हो जाएँ कि टिक न सकें। अब चुंबक को धीरे से उठाइए — पूरी माला उससे लटकी रहेगी।
दूसरा क्लिप पहले से क्यों चिपकता है: पहला क्लिप जब तक चुंबक से लगा है, तब तक वह स्वयं अपने दो ध्रुवों वाला अस्थायी चुंबक बन जाता है और अगले क्लिप को थाम सकता है। चुंबकत्व के इस आगे बढ़ने को प्रेरित चुंबकत्व कहते हैं। चुंबक हटाते ही पूरी माला एक साथ गिर जाती है, क्योंकि क्लिप अपना उधार लिया हुआ चुंबकत्व खो देते हैं।
करके देखें: गिनिए कि आपकी माला में कितने क्लिप टिकते हैं। अब किसी अधिक शक्तिशाली चुंबक से दोहराइए — लड़ी लंबी हो जाएगी। दो चुंबकों की शक्ति की तुलना करने का यह एक अच्छा तरीका है।
प्र2.
क्या हम गत्ते की ट्रे के नीचे चुंबक को चलाकर स्टील की गेंदें भूलभुलैया से बाहर निकाल सकते हैं? (चित्र 4.12)
उत्तर

हाँ। चुंबक को गत्ते की ट्रे के नीचे, ठीक किसी स्टील की गेंद के नीचे रखिए और धीरे-धीरे सरकाइए। गेंद चुंबक के पीछे-पीछे भूलभुलैया में चलती है और बिना छुए ही बाहर निकाली जा सकती है।

ट्रे के नीचे चुंबक → चुंबकीय प्रभाव गत्ते के पार जाता है → ऊपर रखी स्टील की गेंद आकर्षित होती है → गेंद चुंबक के पीछे चलती है
यह क्यों काम करता है: गत्ता एक अचुंबकीय पदार्थ है, इसलिए वह चुंबकीय प्रभाव को नहीं रोकता (क्रियाकलाप 4.7)। स्टील में लोहा होता है, इसलिए गेंद चुंबकीय वस्तु है। गेंद इसलिए चलती है क्योंकि वह हमेशा चुंबक के निकटतम और प्रबलतम भाग की ओर खिंचती रहती है।
सुझाव: चुंबक को धीरे-धीरे सरकाइए। झटका देने पर गेंद पीछे छूट जाती है — चुंबक और गेंद के बीच की दूरी बढ़ते ही खिंचाव बहुत तेजी से घट जाता है।
प्र3.
क्या पानी में गिरे हुए स्टील के पेपर क्लिप को चुंबक का उपयोग करके हम अपनी अँगुलियों या चुंबक को गीला किए बिना बाहर निकाल सकते हैं? (चित्र 4.13)
उत्तर

हाँ। गिलास की दीवार को ही दीवार की तरह उपयोग कीजिए।

  1. चुंबक को गिलास के बाहर दीवार से सटाकर, क्लिप की सीध में पकड़िए।
  2. क्लिप काँच और पानी के पार आकर्षित होकर भीतरी दीवार से चिपक जाएगा।
  3. अब चुंबक को गिलास के बाहर धीरे-धीरे ऊपर सरकाइए। क्लिप भीतरी दीवार पर उसके साथ ऊपर चढ़ता जाएगा।
  4. किनारे पर पहुँचते ही गिलास को हल्का झुकाकर क्लिप हथेली पर ले लीजिए। न अँगुलियाँ गीली हुईं, न चुंबक।
यह क्यों काम करता है: काँच और पानी दोनों अचुंबकीय हैं, इसलिए चुंबकीय प्रभाव उनके पार सहज निकल जाता है। यह केवल खेल नहीं है — इसी तरह चिकित्सक आँख में घुसे लोहे के सूक्ष्म कण को निकालते हैं और कारखानों में तेल या रसायन में गिरे लोहे के टुकड़े बाहर खींचे जाते हैं।
प्र4.
चित्र 4.14 में दर्शाई गई दोनों कारों को पास में लाने पर क्या वे एक-दूसरे की ओर तेजी से बढ़ेंगी या एक-दूसरे से दूर जाएँगी?
उत्तर

चित्र 4.14 में दोनों कारों पर रखे चुंबकों के समान ध्रुव आमने-सामने हैं, इसलिए वे एक-दूसरे से दूर जाएँगी — उनमें प्रतिकर्षण होगा।

कारों पर चुंबक किस प्रकार रखे हैंकारें क्या करेंगी
समान ध्रुव आमने-सामने (N–N या S–S) — जैसे चित्र 4.14 मेंकारें एक-दूसरे से दूर भागेंगी (प्रतिकर्षण)
असमान ध्रुव आमने-सामने (N–S)कारें एक-दूसरे की ओर तेजी से बढ़कर जुड़ जाएँगी (आकर्षण)
कारों का उपयोग क्यों: पहिए लगभग सारा घर्षण हटा देते हैं, ठीक जैसे क्रियाकलाप 4.5 की गोल पेंसिलें। इसलिए कुछ सेंटीमीटर की दूरी पर रखे दो चुंबकों के बीच का छोटा-सा धक्का भी कार को लुढ़का देने के लिए पर्याप्त होता है।
क्या आप जानते हैं? मैग्लेव ट्रेन इसी धक्के पर चलती है। पटरी और ट्रेन पर लगे शक्तिशाली चुंबक एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जिससे ट्रेन पटरी से थोड़ा ऊपर तैरती है। पहिए पटरी को छूते ही नहीं, इसलिए घर्षण लगभग शून्य होता है और ऐसी ट्रेनें 400 किलोमीटर प्रति घंटा से भी तेज दौड़ती हैं।
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