निम्नलिखित में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए — (क) दो चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को ______ करते हैं, जबकि समान ध्रुव एक-दूसरे को ______ करते हैं। (ख) वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें ______ कहते हैं। (ग) चुंबकीय दिक्सूचक की सुई ______ दिशा में ही ठहरती है। (घ) चुंबक में सर्वदा ______ ध्रुव होते हैं।
उत्तर
रिक्त स्थान
उत्तर
(क) दो चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को ______ करते हैं, जबकि समान ध्रुव एक-दूसरे को ______ करते हैं।
आकर्षित … प्रतिकर्षित
(ख) वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें ______ कहते हैं।
चुंबकीय पदार्थ
(ग) चुंबकीय दिक्सूचक की सुई ______ दिशा में ही ठहरती है।
उत्तर-दक्षिण
(घ) चुंबक में सर्वदा ______ ध्रुव होते हैं।
दो
हर उत्तर का कारण:
(क) एक चुंबक का उत्तरी ध्रुव और दूसरे चुंबक का दक्षिणी ध्रुव विपरीत ध्रुव हैं और वे पास खिंचते हैं। दो उत्तरी ध्रुव या दो दक्षिणी ध्रुव समान ध्रुव हैं और वे दूर हटते हैं।
(ख) लोहा, निकेल, कोबाल्ट और स्टील खिंच आते हैं; लकड़ी, प्लास्टिक और काँच नहीं खिंचते और वे अचुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं।
(ग) सुई एक छोटा चुंबक है जो स्वतंत्र रूप से घूमता है, और स्वतंत्र रूप से घूमने वाला चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण रेखा में ठहरता है, क्योंकि पृथ्वी स्वयं विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है।
(घ) ध्रुव केवल जोड़ों में होते हैं। चुंबक को जितनी बार चाहें तोड़िए — हर टुकड़े में एक उत्तरी और एक दक्षिणी ध्रुव रहेगा।
प्र2.
निम्नलिखित कथन सत्य (✔) हैं या असत्य (✘) — (क) किसी चुंबक को टुकड़ों में तोड़कर एक ध्रुव प्राप्त किया जा सकता है। (ख) चुंबक के समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। (ग) जब किसी छड़ चुंबक को लोहरेतन के पास लाया जाता है, तो अधिकांश लोहरेतन उसके बीच में चिपक जाता है। (घ) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ छड़ चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर इंगित करता है।
उत्तर
कथन
सत्य / असत्य
कारण
(क) किसी चुंबक को टुकड़ों में तोड़कर एक ध्रुव प्राप्त किया जा सकता है।
असत्य (✘)
हर टुकड़े में, चाहे वह कितना भी छोटा हो, टूटे हुए तल पर नया उत्तरी और नया दक्षिणी ध्रुव बन जाता है। एकल ध्रुव का अस्तित्व नहीं होता।
(ख) चुंबक के समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
सत्य (✔)
समान ध्रुव (N–N या S–S) हमेशा एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं।
(ग) जब किसी छड़ चुंबक को लोहरेतन के पास लाया जाता है, तो अधिकांश लोहरेतन उसके बीच में चिपक जाता है।
असत्य (✘)
वह अधिकतर दोनों सिरों — ध्रुवों — पर चिपकता है। मध्य भाग लगभग खाली रहता है (क्रियाकलाप 4.2, चित्र 4.4)।
(घ) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ छड़ चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर इंगित करता है।
सत्य (✔)
पृथ्वी स्वयं विशाल चुंबक की तरह व्यवहार करती है और लटके चुंबक को उत्तर-दक्षिण रेखा में ले आती है।
सुझाव: कथन (ग) परीक्षा में सबसे अधिक भ्रमित करने वाला है। चित्र 4.4 की कल्पना कीजिए — लोहरेतन सिरों पर दो घनी दाढ़ियों जैसा दिखता है, बीच में पट्टी जैसा नहीं।
प्र3.
स्तंभ I में विभिन्न स्थितियाँ दर्शाई गई हैं, जिनमें एक चुंबक का कोई एक ध्रुव दूसरे चुंबक के किसी ध्रुव के निकट स्थित होता है। स्तंभ II में विभिन्न स्थितियों के लिए उनके बीच होने वाली अंतःक्रिया दर्शाई गई है। रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए। स्तंभ I: N–N, N–___, S–N, ___–S। स्तंभ II: ___, आकर्षण, ___, प्रतिकर्षण।
उत्तर
केवल एक नियम काम में लाइए — समान ध्रुव प्रतिकर्षित करते हैं, असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं।
स्तंभ I
स्तंभ II
N – N
प्रतिकर्षण
N – S
आकर्षण
S – N
आकर्षण
S – S
प्रतिकर्षण
पंक्ति-दर-पंक्ति हल:
पंक्ति 1: N और N समान ध्रुव हैं → प्रतिकर्षण
पंक्ति 2: परिणाम आकर्षण है, अतः ध्रुव असमान होने चाहिए। N दिया है, इसलिए रिक्त स्थान में S
पंक्ति 3: S और N असमान ध्रुव हैं → आकर्षण
पंक्ति 4: परिणाम प्रतिकर्षण है, अतः ध्रुव समान होने चाहिए। S दिया है, इसलिए रिक्त स्थान में S
सुझाव: ध्यान दीजिए कि N–S और S–N का अर्थ एक ही है। पहले किस चुंबक का नाम लिया गया, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता — केवल यह देखना है कि दोनों ध्रुव समान हैं या असमान।
प्र4.
अथर्व ने एक प्रयोग किया जिसमें उसने एक छड़ चुंबक लिया और उसे स्टील की पिनों के ढेर पर घुमाया (चित्र 4.15)। आपके अनुसार तालिका 4.3 में दिए गए अवलोकनों के समुच्चय में से कौन-सा विकल्प संभवतः उसका वास्तविक अवलोकन है? (i) क-10, ख-2, ग-10 (ii) क-10, ख-10, ग-2 (iii) क-2, ख-10, ग-10 (iv) क-10, ख-10, ग-10
उत्तर
उत्तर: विकल्प (i) — स्थिति ‘क’ : 10, स्थिति ‘ख’ : 2, स्थिति ‘ग’ : 10।
चित्र 4.15 में ‘क’ और ‘ग’ छड़ चुंबक के दोनों सिरे (ध्रुव) हैं और ‘ख’ उसका मध्य भाग है।
स्थिति ‘क’ = उत्तरी ध्रुव → आकर्षण सबसे प्रबल → अधिक पिन (10)
स्थिति ‘ख’ = मध्य भाग → आकर्षण सबसे कमजोर → बहुत कम पिन (2)
स्थिति ‘ग’ = दक्षिणी ध्रुव → आकर्षण सबसे प्रबल → अधिक पिन (10)
चुंबक को ढेर पर घुमाने पर दोनों सिरे बहुत-सी U-क्लिप उठा लेते हैं, जबकि मध्य भाग बहुत कम।
शेष विकल्प क्यों गलत हैं: (ii) और (iii) में एक सिरा कमजोर दिखाया गया है, जबकि चुंबक के दोनों सिरे समान रूप से प्रबल होते हैं। (iv) में मध्य भाग को सिरों जितना प्रबल बताया गया है, जो क्रियाकलाप 4.2 के अवलोकन के विपरीत है।
प्र5.
रेशमा ने बाजार से तीन एकसमान धातु की छड़ें खरीदीं। इनमें से दो छड़ें चुंबक थीं और एक लोहे का टुकड़ा था। बिना किसी अन्य सामग्री का उपयोग किए, वह कैसे पहचानेगी कि तीनों में से कौन-सी दो छड़ें चुंबक हो सकती हैं?
उत्तर
उसे प्रतिकर्षण का परीक्षण करना चाहिए — यही चुंबक की एकमात्र पक्की पहचान है।
विधि। छड़ों को 1, 2 और 3 नाम दीजिए। दो-दो को लेकर एक का सिरा दूसरे के सिरे के पास लाइए, और हर बार दोनों सिरे आजमाइए।
छड़ 1 की छड़ 2 से जाँच।
छड़ 1 की छड़ 3 से जाँच।
छड़ 2 की छड़ 3 से जाँच।
परिणाम कैसे पढ़ें।
किसी युग्म में जो दिखे
उसका अर्थ
दोनों छड़ें किसी स्थिति में एक-दूसरे को दूर धकेलें
उस युग्म की दोनों छड़ें चुंबक हैं
दोनों छड़ें हर स्थिति में केवल आकर्षित करें
उनमें से एक लोहे की साधारण छड़ है
प्रतिकर्षण ठीक एक ही युग्म में दिखे → वे दोनों छड़ें चुंबक हैं
जो छड़ उस युग्म से बाहर रह गई, वही लोहे की साधारण छड़ है
आकर्षण से काम क्यों नहीं चलता: चुंबक लोहे की छड़ को भी आकर्षित करता है और दूसरे चुंबक के असमान ध्रुव को भी। इसलिए आकर्षण से कुछ सिद्ध नहीं होता। परंतु लोहे का टुकड़ा किसी को कभी प्रतिकर्षित नहीं कर सकता — प्रतिकर्षण तभी दिखता है जब दोनों वस्तुएँ चुंबक हों।
एक और तरीका (यह भी बिना अतिरिक्त सामग्री के): एक छड़ के सिरे को दूसरी छड़ के मध्य से छुआइए। यदि खिंचाव प्रबल हो तो दूसरी छड़ लोहे की है; यदि खिंचाव बहुत कम हो तो दूसरी छड़ चुंबक है, क्योंकि चुंबक का मध्य भाग उसका सबसे कमजोर भाग होता है।
प्र6.
आपको एक चुंबक दिया गया है जिस पर ध्रुवों की पहचान अंकित नहीं है। आप एक अन्य चुंबक जिस पर ध्रुव अंकित हैं की सहायता से दिए गए चुंबक के ध्रुवों का पता कैसे लगा सकते हैं?
उत्तर
अंकित चुंबक के ज्ञात उत्तरी ध्रुव का उपयोग कीजिए और प्रतिकर्षण देखिए।
बिना चिह्न वाले चुंबक को मेज पर, या गोल पेंसिलों पर रखिए ताकि वह आसानी से गति कर सके।
अंकित चुंबक का उत्तरी ध्रुव धीरे-धीरे उसके एक सिरे के पास लाइए।
यदि वह सिरा दूर धकेला जाए (प्रतिकर्षित हो), तो वही बिना चिह्न वाले चुंबक का उत्तरी ध्रुव है।
यदि वह सिरा खिंच आए (आकर्षित हो), तो वह दक्षिणी ध्रुव है।
दूसरा सिरा स्वतः विपरीत ध्रुव होगा। दोनों सिरों पर मार्कर से चिह्न लगा दीजिए।
ज्ञात N + अज्ञात सिरा → प्रतिकर्षण → वह सिरा N है
ज्ञात N + अज्ञात सिरा → आकर्षण → वह सिरा S है
प्रतिकर्षण ही क्यों देखते हैं, आकर्षण क्यों नहीं: आकर्षण तब भी हो सकता है जब चुंबक का कोई भाग जंग खाया हो या आसपास लोहा पड़ा हो, इसलिए वह भ्रमित कर सकता है। प्रतिकर्षण केवल एक ही कारण से होता है — दो समान ध्रुव। अपने परिणाम की पुष्टि अंकित चुंबक के दक्षिणी ध्रुव से दोहराकर कीजिए; उत्तर ठीक उल्टे मिलने चाहिए।
प्र7.
एक छड़ चुंबक पर उसके ध्रुवों को दर्शाने के लिए कोई चिह्न अंकित नहीं है। आप किसी अन्य चुंबक का उपयोग किए बिना यह कैसे पता लगाएँगे कि उसका उत्तरी ध्रुव किस छोर पर स्थित है?
उत्तर
यह काम पृथ्वी से करवाइए — पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक है, इसलिए दूसरे चुंबक की आवश्यकता ही नहीं।
छड़ चुंबक के ठीक मध्य में धागा बाँधिए ताकि वह क्षैतिज और संतुलित लटके।
उसे किसी खुली जगह में स्टैंड या हुक से लटकाइए, लोहे की अलमारी, ग्रिल, मोबाइल फोन और स्टील के फर्नीचर से अच्छी तरह दूर।
हल्का-सा घुमाकर उसे स्वयं ठहरने दीजिए।
चुंबक उत्तर-दक्षिण रेखा में ठहरेगा। जो सिरा उत्तर की ओर इंगित करे वही उसका उत्तरी ध्रुव है; दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव। दोनों पर चिह्न लगा दीजिए।
उत्तर किधर है, यह कैसे जानें? उस सुबह सूर्य कहाँ उगा था, यह देखिए — वही लगभग पूर्व है। उगते सूर्य की ओर मुँह कीजिए; तब उत्तर आपके बाएँ हाथ की ओर होगा।
स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक → उत्तर-दक्षिण में ठहरता है
उत्तर की ओर इंगित करने वाला सिरा = उत्तरी (उत्तरोन्मुखी) ध्रुव
दक्षिण की ओर इंगित करने वाला सिरा = दक्षिणी (दक्षिणोन्मुखी) ध्रुव
एक और तरीका: चुंबक को थर्मोकोल या कॉर्क के छोटे टुकड़े पर रखकर स्थिर पानी के कटोरे में तैराइए। वह धीरे-धीरे घूमकर उत्तर-दक्षिण में ठहर जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे क्रियाकलाप 4.4 में बनाई गई दिक्सूचक सुई।
प्र8.
यदि पृथ्वी स्वयं एक चुंबक है तो क्या आप चुंबकीय दिक्सूचक से दिशा देखकर पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों का अनुमान लगा सकते हैं?
उत्तर
हाँ, लगा सकते हैं। और उत्तर चौंकाने वाला है।
चरण-दर-चरण तर्क:
1. दिक्सूचक सुई का उत्तरी ध्रुव पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर की ओर इंगित करता है।
2. किसी ध्रुव को केवल असमान ध्रुव ही खींचता है।
3. अतः भौगोलिक उत्तर के पास जो कुछ है, वह एक उत्तरी ध्रुव को आकर्षित कर रहा है।
4. इसलिए पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर के पास पृथ्वी के चुंबक का दक्षिणी ध्रुव है।
5. और भौगोलिक दक्षिण के पास पृथ्वी के चुंबक का उत्तरी ध्रुव है।
पृथ्वी अपने भीतर रखे एक विशाल छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है — परंतु उलटी दिशा में, जिसका चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव भौगोलिक उत्तर के पास पड़ता है।
यह उलटा क्यों लगता है: नाम पहले पड़े और विज्ञान बाद में समझा गया। चुंबक के जिस सिरे को ‘उत्तरी ध्रुव’ कहा गया, वह केवल इसलिए कि वह उत्तर की ओर मुड़ता है। यह नाम तय हो जाने के बाद ‘असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं’ नियम के कारण पृथ्वी के चुंबक का दक्षिणी ध्रुव ही भौगोलिक उत्तर के पास होना पड़ा।
प्र9.
एक मिस्त्री पेंचकस की सहायता से एक यंत्र की मरम्मत कर रहा था लेकिन स्टील के पेंच बार-बार नीचे गिर रहे थे। इस अध्याय में आपने जो सीखा है, उसके आधार पर मिस्त्री की समस्या को हल करने का उपाय सुझाइए।
उत्तर
पेंचकस के सिरे को चुंबक बना लीजिए। तब स्टील का हर पेंच यंत्र में गिरने के बजाय सिरे से चिपका रहेगा।
मिस्त्री यह कैसे करे (ठीक क्रियाकलाप 4.4 की विधि से):
पेंचकस को मेज पर रखिए और एक मजबूत स्थायी चुंबक लीजिए।
चुंबक का एक ध्रुव पेंचकस की स्टील की छड़ पर मूठ वाले सिरे पर रखकर उसे नोक तक खींचिए — हमेशा एक ही दिशा में और उसी ध्रुव से।
चुंबक को ऊपर उठाकर फिर पहले सिरे पर लाइए और दोबारा खींचिए। यह 30 से 40 बार दोहराइए।
नोक से एक स्टील का पेंच छुआकर जाँचिए। यदि पेंच लटका रहे तो पेंचकस चुंबकित हो चुका है।
और भी तेज उपाय: पेंचकस की छड़ पर नोक के पास एक छोटा चुंबक चिपका या टेप कर दीजिए, अथवा बाजार में मिलने वाला चुंबकीय पेंचकस काम में लीजिए।
यह क्यों काम करता है: पेंचकस की छड़ स्टील की होती है, जिसमें लोहा होता है और इसलिए वह चुंबकीय पदार्थ है। खींचने से उसके भीतर के नन्हे चुंबक एक दिशा में पंक्तिबद्ध हो जाते हैं, वह स्वयं चुंबक बन जाती है और स्टील के पेंचों को आकर्षित करने लगती है।
सुझाव: चुंबकित पेंचकस को घड़ी, मोबाइल फोन या दिक्सूचक के पास काम में नहीं लेना चाहिए। यदि बाद में नोक का चुंबकत्व हटाना हो तो उसे कई बार जोर से ठोकना या गरम करना पर्याप्त है — और यही कारण है कि अध्याय आपको चुंबक गिराने, हथौड़े से पीटने या गरम करने से मना करता है।
प्र10.
दो वलय चुंबक, ‘क’ और ‘ख’, चित्र 4.16 में दर्शाए अनुसार व्यवस्थित हैं। यह देखा गया है कि चुंबक ‘क’ नीचे की ओर नहीं जाता है। इसका संभावित कारण क्या हो सकता है? किसी भी चुंबक को बिना धकेले चुंबक ‘क’ को चुंबक ‘ख’ के संपर्क में लाने का उपाय सुझाइए।
उत्तर
कारण: ‘क’ और ‘ख’ के आमने-सामने वाले तल समान ध्रुव हैं (या तो दोनों उत्तरी या दोनों दक्षिणी)। समान ध्रुव प्रतिकर्षित करते हैं, इसलिए चुंबक ‘क’ ऊपर की ओर धकेला जाता है। वह उसी ऊँचाई पर तैरता रह जाता है जहाँ यह ऊपर का धक्का उसके अपने भार को ठीक संतुलित कर देता है, और इससे नीचे नहीं आ पाता।
बाएँ: समान ध्रुव आमने-सामने हैं, इसलिए ‘क’ ‘ख’ के ऊपर अधर में ठहरा है। दाएँ: ‘क’ को उतारकर, उलटकर वापस डाल दिया गया — अब असमान ध्रुव सामने हैं और दोनों चुंबक जुड़ जाते हैं।
संपर्क में लाने का उपाय:चुंबक ‘क’ को छड़ से बाहर निकालिए, उसे उलटा कीजिए और फिर से छड़ में डाल दीजिए। अब ‘क’ का असमान ध्रुव ‘ख’ के ऊपरी ध्रुव के सामने होगा, इसलिए प्रतिकर्षण के स्थान पर आकर्षण होगा — और ‘क’ स्वयं नीचे सरककर ‘ख’ पर आ टिकेगा। किसी को धकेलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
वलय चुंबक के ध्रुव चपटे तलों पर क्यों होते हैं: वलय (या चकती) चुंबक में दोनों ध्रुव उसके दो चपटे वृत्ताकार तल होते हैं, किनारा नहीं। इसलिए वलय को उलटते ही यह बदल जाता है कि नीचे की ओर कौन-सा ध्रुव है — और इसी एक पलटाव से प्रतिकर्षण आकर्षण में बदल जाता है।
क्या आप जानते हैं? छड़ पर हवा में ठहरा चुंबक कक्षा के आकार का मैग्लेव ही है। समान ध्रुवों के प्रतिकर्षण का यही विचार पूरी ट्रेन को पटरी से ऊपर उठा देता है।
प्र11.
तीन छड़ चुंबकों को चित्र 4.17 में दर्शाए अनुसार एक मेज पर व्यवस्थित किया गया है। एक सिरे (5) की ध्रुवता आपको दी गई है। अब आप बताइए कि चुंबकों के सिरों 1, 2, 3, 4 और 6 पर ध्रुवता N या S में से क्या-क्या है?
उत्तर
उत्तर: 1 = N, 2 = S, 3 = N, 4 = S, 5 = N (दिया गया), 6 = S।
मुख्य विचार: तीनों चुंबक सिरे से सिरा जुड़े हुए स्थिर पड़े हैं। दो सिरे चुपचाप एक-दूसरे से लगे तभी रह सकते हैं जब वे आकर्षित करते हों, अर्थात जब वे असमान ध्रुव हों। यदि वे समान ध्रुव होते तो एक-दूसरे को धकेल देते और यह आकृति बिखर जाती।
सिरा 5 = N (दिया गया)
सिरे 4 और 5 जुड़े हैं → असमान होने चाहिए → सिरा 4 = S
सिरे 3 और 4 एक ही चुंबक के दो सिरे हैं → सिरा 3 = N
सिरे 2 और 3 जुड़े हैं → असमान होने चाहिए → सिरा 2 = S
सिरे 1 और 2 एक ही चुंबक के दो सिरे हैं → सिरा 1 = N
सिरे 5 और 6 एक ही चुंबक के दो सिरे हैं → सिरा 6 = S
तीनों छड़ चुंबक, जिन पर सभी छह ध्रुवताएँ भरी गई हैं। लाल सिरे उत्तरी ध्रुव और नीले सिरे दक्षिणी ध्रुव हैं।
इससे भिन्न उत्तर क्यों संभव नहीं: एक बार सिरा 5 को N मान लेने के बाद शेष सभी सिरे अपने-आप तय हो जाते हैं — हर चुंबक में एक N और एक S होना ही है, और हर जोड़ पर N के सामने S होना ही है। दिए गए सिरे से शुरू करके आकृति के साथ-साथ चलना ही ऐसे हर प्रश्न को हल करने का भरोसेमंद तरीका है।
क्या यह उपयोगी रहा?प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!त्रुटि बताएँ