कुतूहल अध्याय 4 और भी सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
3–4 भिन्न-भिन्न चुंबकों का उपयोग करके कुछ स्टील पिन या U-क्लिप को उठाने का प्रयास करें और पता लगाएँ कि कौन-सा चुंबक अधिकतम संख्या में पिन या क्लिप उठाता है। अपने मित्रों के साथ चर्चा करें कि भिन्न-भिन्न चुंबकों ने अलग-अलग संख्या में पिन क्यों उठाए होंगे?
उत्तर

निष्पक्ष तरीका: उन्हीं एक जैसी पिनों के ढेर का उपयोग कीजिए, हर चुंबक का एक ध्रुव एक ही ढंग से ढेर में डुबोइए, सीधा ऊपर उठाइए और लटकी पिन गिनिए। हर चुंबक के लिए तीन बार दोहराकर सबसे बड़ी संख्या लीजिए।

चुंबकप्रयास 1प्रयास 2प्रयास 3सर्वाधिक
छोटा छड़ चुंबक6767
बड़ा छड़ चुंबक12111313
U-आकार चुंबक18171919
वलय चुंबक910910

नमूना उत्तर (आपकी संख्याएँ अलग होंगी): U-आकार चुंबक ने सबसे अधिक और छोटे छड़ चुंबक ने सबसे कम पिन उठाईं।

भिन्न-भिन्न चुंबक अलग-अलग संख्या में पिन क्यों उठाते हैं:

  • चुंबक की शक्ति। कुछ चुंबक अधिक प्रबल पदार्थ के बने होते हैं और उन्हें अधिक अच्छी तरह चुंबकित किया गया होता है।
  • आमाप। एक ही पदार्थ का बड़ा चुंबक प्रायः अधिक प्रबल होता है।
  • आकार। U-आकार चुंबक में दोनों ध्रुव एक ही ओर मुड़े होते हैं और एक साथ मिलकर एक ही ढेर को खींचते हैं, इसलिए वह समान आमाप के छड़ चुंबक से आगे निकल जाता है।
  • आयु और रख-रखाव। जो चुंबक गिराया, पीटा, गरम किया या लापरवाही से रखा गया हो, वह कमजोर पड़ जाता है।
  • ढेर को कहाँ से छुआया। ध्रुव बहुत-सी पिन उठाता है, मध्य भाग लगभग कुछ नहीं — इसलिए हमेशा ध्रुव का ही उपयोग कीजिए।
सुझाव: पिन गिनना चुंबक की शक्ति मापने का वास्तविक तरीका है। अपनी तालिका कॉपी में लिख लीजिए और उन्हीं चुंबकों की छह महीने बाद फिर जाँच कीजिए — बिना रक्षक टुकड़ों के रखा चुंबक कमजोर पड़ चुका होगा।
प्र2.
अपने शिक्षक की सहायता से एक संयुक्त कक्षा क्रियाकलाप के रूप में एक खिलौना ‘फुदकता हुआ मेंढक’ बनाएँ। इसके लिए एक स्केल लें और गोंद का उपयोग करके, स्केल की लंबाई के अनुदिश वलय चुंबकों को क्रमिक रूप से उनके उत्तर तथा दक्षिण ध्रुव ऊपर रखते हुए चित्र 4.18 (क) की तरह चिपकाएँ। मेंढक में रंग भरें। उसे रूपरेखा के साथ काटें और उसके नीचे की ओर एक वलय चुंबक चिपकाएँ। चित्र 4.18 (क) में दर्शाई गई एक छोटे आकार की पारदर्शी, लचीली प्लास्टिक की पट्टी लें और इसे मेंढक से जुड़े वलय चुंबक पर चिपकाएँ। जब आप प्लास्टिक की पट्टी को मेंढक के साथ स्केल पर सरकाएँगे तो आप देखेंगे कि मेंढक उछल रहा है [चित्र 4.18 (ख)]।
उत्तर

आवश्यक सामग्री: लकड़ी या प्लास्टिक का स्केल, 6–8 वलय चुंबक, गोंद, मोटे कागज का मेंढक और एक छोटी पारदर्शी लचीली प्लास्टिक की पट्टी।

चरण:

  1. वलय चुंबकों को स्केल पर एक पंक्ति में चिपकाइए, पर उनके तल क्रमिक रूप से बदलते हुए — पहले का उत्तरी ध्रुव ऊपर, अगले का दक्षिणी ध्रुव ऊपर, फिर उत्तरी, और इसी क्रम में।
  2. कागज के मेंढक में रंग भरकर उसे काटिए और उसके नीचे एक वलय चुंबक चिपकाइए।
  3. उसी चुंबक पर लचीली प्लास्टिक की पट्टी चिपकाइए ताकि मेंढक थोड़ा उछल-कूद कर सके।
  4. पट्टी को मेंढक सहित स्केल पर धीरे-धीरे सरकाइए और मेंढक को फुदकते देखिए।
मेंढक फुदकता क्यों है: जब मेंढक का चुंबक ऐसे चुंबक के ऊपर से गुजरता है जिसका सामने वाला ध्रुव उसके अपने ध्रुव के समान है, तो वह प्रतिकर्षित होकर ऊपर उछलता है। ठीक अगले चुंबक पर सामने वाला ध्रुव असमान होता है, इसलिए वह आकर्षित होकर नीचे आ जाता है। स्केल पर चुंबक N, S, N, S… क्रम में लगे होने के कारण मेंढक को बारी-बारी धक्का और खिंचाव मिलता रहता है और वह फुदकता हुआ प्रतीत होता है। लचीली प्लास्टिक की पट्टी उसे चिपके रहने के बजाय उछलने देती है।
सुझाव: चिपकाते समय हर वलय चुंबक के ऊपरी तल पर एक बिंदी बना लीजिए, ताकि आप जाँच सकें कि क्रम सचमुच बदल-बदलकर चल रहा है। यदि दो पड़ोसी चुंबक एक ही ओर से लग गए तो मेंढक वहाँ एक फुदक छोड़ देगा।
प्र3.
मैग्लेव ट्रेन के बारे में पता लगाएँ और उसका मॉडल बनाने का प्रयास करें।
उत्तर

मैग्लेव ट्रेन क्या है: ‘मैग्लेव’ का अर्थ है चुंबकीय उत्प्लावन (magnetic levitation)। यह ट्रेन पहियों पर नहीं दौड़ती — वह पटरी से कुछ सेंटीमीटर ऊपर तैरती है और चुंबकों द्वारा ही आगे धकेली जाती है।

कामचुंबक उसे कैसे करते हैं
ट्रेन को ऊपर उठानाट्रेन और पटरी के शक्तिशाली चुंबकों के समान ध्रुव आमने-सामने होते हैं, इसलिए वे प्रतिकर्षित करते हैं और ट्रेन उठ जाती है
उसे सीध में रखनाबगल के चुंबक ट्रेन के इधर-उधर खिसकते ही उसे वापस बीच में धकेल देते हैं
उसे आगे बढ़ानापटरी का चुंबकत्व लहर की तरह बारी-बारी चालू-बंद होता है, जिससे ट्रेन आगे से खिंचती और पीछे से धकेली जाती है

यह तेज और शांत क्यों है: कुछ भी पटरी को छूता नहीं, इसलिए घर्षण लगभग नहीं होता। मैग्लेव ट्रेनें 400 किमी/घंटा से भी अधिक गति पकड़ती हैं, बहुत सहज चलती हैं और उनकी मरम्मत कम पड़ती है। ऐसी ट्रेनें जापान, चीन और दक्षिण कोरिया में चलती हैं; शंघाई की मैग्लेव सबसे प्रसिद्ध है।

एक सरल मॉडल जो आप बना सकते हैं:

  1. लकड़ी की एक नाली में वलय या पट्टी चुंबकों की दो पंक्तियाँ लगाइए, सबका एक ही ध्रुव ऊपर की ओर।
  2. हल्के गत्ते की ‘ट्रेन’ के नीचे भी वैसे ही चुंबक चिपकाइए, सबका एक ही ध्रुव नीचे की ओर — वही ध्रुव जो पटरी पर ऊपर है।
  3. ट्रेन को नाली पर रखिए। समान ध्रुव आमने-सामने होने से ट्रेन तैरने लगेगी।
  4. हल्का-सा धक्का दीजिए; वह नाली में सरकती चली जाएगी। दोनों ओर की छोटी दीवारें उसे गिरने से बचाएँगी।
स्वयं जाँचें: गत्ते की ट्रेन को उलटकर वापस रखिए। अब वह तैरने के बजाय पटरी से चिपक जाएगी — यही प्रमाण है कि तैरना समान ध्रुवों के प्रतिकर्षण से हो रहा था।
प्र4.
यह जानने का प्रयास करें कि अलग-अलग आकार के चुंबक बनाने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर

क्योंकि आकार यह तय करता है कि ध्रुव कहाँ होंगे — और अलग-अलग कामों के लिए ध्रुव अलग-अलग जगह चाहिए।

आकारध्रुव कहाँ हैंवह आकार क्यों उपयोगी है
छड़ चुंबकदोनों सिरों पर, एक-दूसरे से दूरध्रुवों को समझने के लिए और स्वतंत्र रूप से लटकाकर दिशा जानने के लिए सर्वोत्तम
U-आकार (घोड़े की नाल)पास-पास, एक ही ओर मुड़े दो सिरेदोनों ध्रुव एक ही वस्तु को खींचते हैं, इसलिए यह कहीं अधिक भार उठाता है — क्रेन और होल्डर में उपयोगी
वलय चुंबकदोनों चपटे तलों परछड़ या शाफ्ट में पिरोया जा सकता है — लाउडस्पीकर, मोटर और फुदकते मेंढक के खिलौने में
चकती (डिस्क) चुंबकदोनों चपटे तलों परपतला और चपटा — पेंसिल बॉक्स, पर्स, फ्रिज स्टिकर और अलमारी की कुंडी में फिट हो जाता है
बेलनाकार चुंबकदोनों वृत्ताकार सिरों परपतले छिद्रों और नलियों में बैठ जाता है — कुंडियों और संवेदकों में
सुई के आकार का चुंबकदोनों नुकीले सिरों परहल्का और पिन पर स्वतंत्र रूप से घूमने वाला — दिक्सूचक की सुई
गोलीय चुंबकगेंद पर आमने-सामने के दो बिंदुओं परस्वतंत्र रूप से लुढ़कता है — खिलौनों और पहेलियों में
इन सबके पीछे का नियम: आकार चाहे जो हो, चुंबक में ठीक दो ध्रुव, जोड़े में ही रहते हैं। आकार केवल यह बदलता है कि ध्रुव कहाँ बैठेंगे और कितनी दूर होंगे — और यही बात एक चुंबक को फ्रिज के दरवाज़े के लिए तथा दूसरे को दिक्सूचक के लिए उपयुक्त बनाती है।
प्र5.
चिकित्सा के क्षेत्र में चुंबकों के उपयोग से संबंधित जानकारी एकत्रित करें।
उत्तर

अस्पतालों में चुंबकों का उपयोग हमारी कल्पना से कहीं अधिक होता है। समाचार-पत्रों, पुस्तकों और किसी अस्पताल की यात्रा से एक कक्षा-सर्वेक्षण में यह सामने आएगा।

चिकित्सा में उपयोगवह क्या करता है
एम.आर.आई. जाँच (चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन)एक अत्यंत शक्तिशाली चुंबक की सहायता से चिकित्सक मस्तिष्क, मेरुदंड, घुटने और शरीर के अन्य कोमल भागों को बिना शल्यक्रिया और बिना एक्स-रे के स्पष्ट देख पाते हैं
लोहे के कण निकालनाआँख या घाव में घुसा लोहे का सूक्ष्म कण चीर-फाड़ के बजाय छोटे चुंबक से बाहर खींच लिया जाता है
श्रवण यंत्र और कॉक्लियर इंप्लांट के चुंबकबाहरी भाग को सिर पर उसकी जगह टिकाए रखते हैं और ध्वनि संकेत पहुँचाने में सहायता करते हैं
चुंबकीय चिकित्सा वाली बेल्ट और चटाइयाँघुटने, पीठ और जोड़ों के दर्द के लिए बेची जाती हैं। इनका लाभ विज्ञान द्वारा भली-भाँति प्रमाणित नहीं है — ऐसे दावों को सावधानी से लीजिए
प्रयोगशाला में कोशिकाओं और प्रोटीनों का पृथक्करणसूक्ष्म चुंबकीय मनकों की सहायता से रक्त के नमूने से विशेष कोशिकाएँ अलग खींच ली जाती हैं
औषधि को सही स्थान तक पहुँचानानए शोधों में चुंबक से औषधि को केवल रोगग्रस्त भाग तक पहुँचाया जाता है, ताकि स्वस्थ भागों तक कम दवा जाए
महत्वपूर्ण सुरक्षा सूचना: एम.आर.आई. का चुंबक अत्यंत शक्तिशाली होता है, इसलिए रोगी को कमरे में जाने से पहले लोहे और स्टील की सभी वस्तुएँ — हेयरपिन, चाबियाँ, सिक्के, घड़ी — उतारनी पड़ती हैं। हृदय का पेसमेकर या धातु का इंप्लांट लगे व्यक्ति की एम.आर.आई. हमेशा नहीं की जा सकती। यह वही सीख है जो अध्याय चुंबकों को मोबाइल फोन से दूर रखने के बारे में देता है, बस कहीं बड़े पैमाने पर।
अपनी जानकारी कैसे प्रस्तुत करें: तीन स्तंभों वाला एक चार्ट बनाइए — चुंबक कहाँ उपयोग हुआ, वह क्या करता है, और चुंबक का कौन-सा गुण उसका आधार है (लोहे का आकर्षण, या शरीर के पार जाने वाला चुंबकीय प्रभाव)। साथ में समाचार-पत्र से काटा हुआ एम.आर.आई. मशीन का चित्र चिपकाइए।
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