कुतूहल अध्याय 7 क्रियाकलाप 7.6

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भिन्न-भिन्न विद्यार्थियों द्वारा अंकित किए गए उबलते जल के तापों की तुलना कीजिए (तालिका 7.2)।
उत्तर

शिलांग में लिए गए पाँच पाठ्यांक ये थे:

नामउबलते जल का ताप (°C में)
फिबान97.8
शेमफांग98.0
वनस्टार97.9
क्लोय98.0
बन्डारिशा98.1

अब इनकी तुलना कीजिए:

न्यूनतम पाठ्यांक = 97.8 °C (फिबान)
अधिकतम पाठ्यांक = 98.1 °C (बन्डारिशा)
अंतर = 98.1 °C – 97.8 °C = 0.3 °C
योग = 97.8 + 98.0 + 97.9 + 98.0 + 98.1 = 489.8
औसत = 489.8 ÷ 5 = 97.96 °C, अर्थात् लगभग 98.0 °C

अत: पाँचों पाठ्यांक बहुत निकट हैं — उनमें अधिक से अधिक 0.3 °C का अंतर है — और सभी 98.0 °C के आस-पास हैं। दो विद्यार्थियों (शेमफांग और क्लोय) को तो एकदम समान मान मिला।

प्र2.
विद्यार्थियों द्वारा लिए गए पाठ्यांकों में अंतर क्यों है? अंतर के संभावित कारणों पर परस्पर विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर

जैसा पुस्तक कहती है, संभवत: सभी विद्यार्थियों ने पाठ्यांक लेने का सही तरीका नहीं अपनाया। संभावित कारण:

  • आँख द्रव स्तंभ के शीर्ष की सीध में नहीं थी — ऊपर या नीचे से देखने पर पाठ्यांक खिसक जाता है (यह सबसे आम भूल है)।
  • तापमापी को जल से बाहर निकालकर पढ़ा गया, जिससे स्तंभ पहले ही गिरने लगा था।
  • बल्ब बीकर की तली या दीवार को स्पर्श कर रहा था, जिससे उसने जल के बजाय गरम काँच का ताप माप लिया।
  • पाठ्यांक बहुत जल्दी ले लिया गया, द्रव स्तंभ का चढ़ना रुकने से पहले ही।
  • हर विद्यार्थी तापमापी के अल्पतम मान तक ही पढ़ सकता है, अत: वास्तविक 97.95 °C को कोई 97.9 °C लिखेगा और कोई 98.0 °C।
पूरा समूह 100 °C से नीचे क्यों: यह भाग भूल नहीं है। शिलांग ऊँचे पहाड़ों में बसा है, जहाँ वायुदाब कम है, इसलिए वहाँ जल सचमुच लगभग 98 °C पर ही उबलता है। समूह के भीतर के छोटे अंतर इस बात से आते हैं कि मापन कैसे किया गया; 100 °C से दूरी इस बात से आती है कि मापन कहाँ किया गया।
संकेत: जब कई लोग एक ही वस्तु मापें तो औसत लीजिए। यहाँ औसत 97.96 °C किसी भी एक पाठ्यांक से बेहतर उत्तर है।
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