क्या आप जानते हैं? केल्विन स्केल पर यही ताप 37 + 273.15 = 310.15 K होगा — K के साथ डिग्री का चिह्न नहीं लगता।
प्र3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए— (क) किसी निकाय की गरमाहट अथवा ठंडापन उसके _______ से निर्धारित की जाती है। (ख) हिमशीत जल का ताप _______ तापमापी द्वारा नहीं मापा जा सकता है। (ग) ताप का मात्रक डिग्री _______ है।
उत्तर
रिक्त स्थान
उत्तर
(क) किसी निकाय की गरमाहट अथवा ठंडापन उसके … से निर्धारित की जाती है
ताप
(ख) हिमशीत जल का ताप … तापमापी द्वारा नहीं मापा जा सकता है
डॉक्टरी
(ग) ताप का मात्रक डिग्री … है
सेल्सियस
(क) गरमाहट अथवा ठंडक का विश्वसनीय माप ताप ही है — स्पर्श नहीं।
(ख) हिमशीत (बर्फ जैसा ठंडा) जल लगभग 0 °C पर होता है, जो डॉक्टरी थर्मामीटर के स्केल के आरंभ 35 °C से बहुत नीचे है; अत: डॉक्टरी थर्मामीटर उसे नहीं माप सकता। प्रयोगशाला तापमापी (–10 °C से 110 °C) माप सकता है।
(ग) सेल्सियस स्केल पर मात्रक डिग्री सेल्सियस (°C) है। (फारेनहाइट स्केल पर डिग्री फारेनहाइट, °F; किंतु ताप का SI मात्रक केल्विन, K है, जिसके साथ डिग्री का चिह्न नहीं लगता।)
संकेत: पुस्तक में मात्रक लिखने का विशेष नियम दिया है — संख्या और मात्रक के बीच सदैव एक रिक्त स्थान छोड़िए: 37.0 °C, न कि 37.0°C।
प्र4.
प्राय: प्रयोगशाला तापमापी की मापन सीमा होती है— (क) 10 °C से 100 °C (ख) –10 °C से 110 °C (ग) 32 °C से 45 °C (घ) 35 °C से 42 °C
उत्तर
उत्तर: (ख) –10 °C से 110 °C
यही परिसर क्यों: प्रयोगशाला तापमापी को प्रयोगशाला के सारे काम सँभालने हैं — 0 °C की बर्फ, उससे भी ठंडा जल, कक्ष की वायु, गुनगुना जल और लगभग 100 °C पर उबलता जल। इसीलिए स्केल को 0 °C से कुछ नीचे और 100 °C से कुछ ऊपर तक ले जाया जाता है, जिससे कुल विस्तार 110 – (–10) = 120 °C हो जाता है।
शेष विकल्प क्यों गलत हैं:
(क) 10 °C से 100 °C — बर्फ का ताप माप ही नहीं पाता, और उबलने तक भी बमुश्किल पहुँचता है।
(ग) 32 °C से 45 °C तथा (घ) 35 °C से 42 °C — ये शरीर के ताप के परिसर हैं। विशेषकर (घ) तो डॉक्टरी थर्मामीटर का परिसर है।
प्र5.
जल का ताप मापने के लिए चार विद्यार्थियों ने प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग चित्र 7.6 में दर्शाए अनुसार किया। किस विद्यार्थी ने ताप मापन के लिए सही प्रक्रिया अपनाई? (क) विद्यार्थी 1 (ख) विद्यार्थी 2 (ग) विद्यार्थी 3 (घ) विद्यार्थी 4
उत्तर
उत्तर: (ख) विद्यार्थी 2
चित्र 7.6 के प्रत्येक चित्र को ध्यान से देखिए:
विद्यार्थी
चित्र में क्या दिख रहा है
सही?
विद्यार्थी 1
तापमापी तिरछा पकड़ा है, बीकर से टिका है और बल्ब तली पर है
✗ तिरछा, और बल्ब बीकर को स्पर्श कर रहा है
विद्यार्थी 2
तापमापी उर्ध्वाधर, बल्ब जल के भीतर, तली और दीवारों से अलग
✓ सही
विद्यार्थी 3
तापमापी उर्ध्वाधर तो है, पर बल्ब बीकर की तली पर टिका है
✗ बल्ब तली को स्पर्श कर रहा है
विद्यार्थी 4
तापमापी बीकर के किनारे टिका है, बल्ब मुश्किल से जल की सतह पर है, पूरी तरह डूबा नहीं
✗ बल्ब पूरी तरह जल में डूबा नहीं है
पुस्तक की तीनों शर्तें केवल विद्यार्थी 2 पूरी करता है:
बल्ब को बीकर की तली अथवा दीवारों को स्पर्श नहीं करना चाहिए;
तापमापी उर्ध्वाधर रखना चाहिए, तिरछा नहीं;
ताप तभी पढ़ा जाना चाहिए जब तापमापी का बल्ब जल में डूबा हो — और पढ़ते समय आँख द्रव स्तंभ के स्तर की सीध में हो।
प्रयोगशाला तापमापी का पाठ्यांक लेना। आँख द्रव स्तंभ के शीर्ष स्तर की ठीक सीध में होनी चाहिए; ऊपर या नीचे से देखने पर पाठ्यांक गलत आता है। बल्ब पूरी तरह जल में डूबा रहे, पर बीकर की तली या दीवारों को स्पर्श न करे।
बल्ब का तली को छूना गलत क्यों: बीकर की तली जल से अधिक गरम या ठंडी हो सकती है। बल्ब वहाँ टिका देने पर तापमापी जल का नहीं, काँच का ताप माप लेता है।
प्र6.
नीचे दिए गए तापमानों को तापमापियों (चित्र 7.7) के आरेखों पर स्तंभों में लाल रंग भरकर दर्शाइए। 14 °C, 17 °C, 7.5 °C
उत्तर
पहले प्रत्येक स्केल देखिए, क्योंकि चित्र 7.7 के तीनों तापमापी एक जैसे विभाजित नहीं हैं। तीनों –10 °C से 30 °C तक अंकित हैं, फिर भी:
तापमापी
0 °C और 10 °C के बीच भाग
एक छोटा भाग
कितना ताप भरना है
पहला
5
2 °C
14 °C
दूसरा
10
1 °C
17 °C
तीसरा
20
0.5 °C
7.5 °C
अब बल्ब से लेकर सही चिह्न तक स्तंभ में लाल रंग भरिए:
14 °C पहले तापमापी पर — 10 °C के चिह्न से 2 भाग ऊपर (10 + 2 + 2 = 14)।
17 °C दूसरे पर — 10 °C के चिह्न से 7 भाग ऊपर।
7.5 °C तीसरे पर — 0 °C के चिह्न से 15 भाग ऊपर (15 × 0.5 = 7.5)।
प्रश्न 6 का उत्तर। लाल स्तंभ क्रमशः 14 °C, 17 °C तथा 7.5 °C तक भरा गया है। तीसरा स्केल 7.5 °C इसीलिए दिखा पाता है क्योंकि उसका अल्पतम भाग 0.5 °C का है।
तीनों स्केल अलग-अलग क्यों: यह प्रश्न चुपके से यह सिखा रहा है कि कोई ताप उसी तापमापी पर दर्शाया जा सकता है जिसका अल्पतम भाग उसे अनुमति दे। 7.5 °C को पहले तापमापी पर अंकित किया ही नहीं जा सकता — उसके चिह्न 2 °C की छलाँग लगाते हैं।
प्र7.
नीचे दर्शाए गए तापमापी के भाग (चित्र 7.8) का अवलोकन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए— (क) यह किस प्रकार का तापमापी है? (ख) तापमापी का पाठ्यांक क्या है? (ग) इस तापमापी द्वारा मापा जा सकने वाला न्यूनतम मान क्या है?
उत्तर
(क) यह प्रयोगशाला तापमापी है।
यह स्केल से ही पहचाना जा सकता है: यह 0 °C से नीचे (पहला अंक –10) से आरंभ होकर 40 °C से भी आगे तक अंकित है। डॉक्टरी थर्मामीटर लगभग 35 °C से आरंभ होकर 42 °C पर समाप्त हो जाता और ऋणात्मक ताप तो कभी नहीं दर्शाता।
(ख) पाठ्यांक 26 °C है।
लाल द्रव स्तंभ 20 °C का चिह्न पार कर चुका है। 20 °C के बाद छोटे भाग गिनिए: 21, 22, 23, 24, 25, 26 — स्तंभ छठे भाग पर समाप्त होता है। पाठ्यांक = 26 °C
चित्र 7.8 का पुनराँकन। 0 °C और 10 °C के मध्य 10 छोटे भाग हैं, अत: एक भाग = 1 °C। लाल स्तंभ 20 °C के बाद छठे चिह्न पर रुकता है — पाठ्यांक 26 °C है।
(ग) इसके द्वारा मापा जा सकने वाला न्यूनतम मान 1 °C है।
दो अंकित चिह्नों (0 °C और 10 °C) के बीच अंतर = 10 °C उनके बीच छोटे भागों की संख्या = 10 एक छोटा भाग = 10 °C ÷ 10 = 1 °C
संकेत: भाग (ख) से पहले भाग (ग) कीजिए। एक बार पता चल जाए कि एक भाग 1 °C का है, तो भाग गिनते ही पाठ्यांक मिल जाता है।
प्र8.
प्रयोगशाला तापमापी हमारे शरीर के ताप को मापने के लिए उपयोग में क्यों नहीं लाया जाता है? इसका एक कारण दीजिए।
उत्तर
कारण: प्रयोगशाला तापमापी के बल्ब के ऊपर कोई मोड़ (किंक) नहीं होता, इसलिए मुँह से बाहर निकालते ही द्रव स्तंभ गिरने लगता है — पाठ्यांक पढ़ने से पहले ही लुप्त हो जाता है।
पुराना पारे वाला डॉक्टरी थर्मामीटर। इसका स्केल केवल 35 °C से 42 °C तक है — अर्थात् मानव शरीर के ताप का परिसर। बल्ब के ठीक ऊपर बना मोड़ (किंक) पारे को वापस लौटने नहीं देता, इसलिए मुँह से निकालने के बाद भी पाठ्यांक बना रहता है। (वास्तविक तापमापी में प्रत्येक छोटा भाग 0.1 °C का होता है; यहाँ स्पष्टता के लिए 0.2 °C के चिह्न ही बनाए गए हैं।)
इनमें से कोई एक कारण पर्याप्त है; सब मिलकर बात पूरी कर देते हैं:
मोड़ नहीं — पाठ्यांक टिकता नहीं, और प्रयोगशाला तापमापी को मुँह के भीतर रखकर पढ़ा भी नहीं जा सकता।
बहुत मोटा मापन — इसका अल्पतम मान प्राय: 1 °C है, जबकि शरीर का ताप 0.1 °C तक जानना पड़ता है। 37.0 °C से 37.6 °C तक की वृद्धि वास्तविक ज्वर है, पर प्रयोगशाला तापमापी उसे दिखा ही नहीं सकता।
काम के लिए गलत परिसर — इसका स्केल 120 °C (–10 °C से 110 °C) में फैला है, अत: शरीर के लिए महत्त्वपूर्ण थोड़े-से डिग्री स्केल के बहुत छोटे भाग में सिमट जाते हैं।
आकार एवं सुरक्षा — यह लंबा, सीधा और नाजुक होता है और मुँह या काँख में रखने के लिए नहीं बनाया जाता।
मोड़ यह समस्या कैसे हल करता है: मोड़ बल्ब के ठीक ऊपर नली की एक पतली सँकरी जगह है। तापमापी गरम होते समय फैलता हुआ पारा उसमें से आगे धकेल दिया जाता है। बाहर निकालने पर पारा ठंडा होकर सिकुड़ता है तो धागा मोड़ पर टूट जाता है और ऊपर का पारा वापस नहीं लौट पाता — पाठ्यांक तब तक बना रहता है जब तक आप तापमापी को झटककर नीचे न कर दें।
प्र9.
वैष्णवी अस्वस्थ होने के कारण विद्यालय नहीं जा पाती है। उसकी माता जी ने उसके तीन दिन के तापमान का अंकन रखा है जिसे तालिका 7.4 में दर्शाया गया है। (क) वैष्णवी का अंकित किया गया अधिकतम ताप क्या था? (ख) किस दिन और किस समय पर वैष्णवी का अधिकतम ताप अंकित किया गया था? (ग) किस दिन वैष्णवी का ताप सामान्य हो गया?
उत्तर
तालिका 7.4 फिर से, जिसमें प्रत्येक दिन का सर्वाधिक मान उभारा गया है:
दिन
पूर्वाह्न 7 बजे
पूर्वाह्न 10 बजे
अपराह्न 1 बजे
अपराह्न 4 बजे
सायं 7 बजे
रात्रि 10 बजे
पहला
38.0 °C
37.8 °C
38.0 °C
38.0 °C
40.0 °C
39.0 °C
दूसरा
38.6 °C
38.8 °C
39.0 °C
39.0 °C
39.0 °C
38.0 °C
तीसरा
37.6 °C
37.4 °C
37.2 °C
37.0 °C
36.8 °C
36.6 °C
(क) अंकित किया गया अधिकतम ताप 40.0 °C था। अठारहों पाठ्यांकों में सबसे बड़ा 40.0 °C है; उसके बाद दूसरे दिन के तीन पाठ्यांक 39.0 °C हैं।
(ख) यह पहले दिन, सायं 7 बजे अंकित किया गया था।
(ग) तीसरे दिन।
सामान्य शारीरिक ताप = 37.0 °C तीसरे दिन के पाठ्यांक: 37.6 → 37.4 → 37.2 → 37.0 → 36.8 → 36.6 °C ताप लगातार घटता हुआ अपराह्न 4 बजे 37.0 °C तक आ जाता है और उसके बाद उससे नीचे ही रहता है। अत: वैष्णवी का ताप तीसरे दिन सामान्य हो गया।
क्रम को पढ़िए: पहला और दूसरा दिन ज्वर के दिन हैं — एक को छोड़कर हर पाठ्यांक 38 °C से ऊपर है। तीसरे दिन एक भी पाठ्यांक 38 °C को नहीं छूता और पूरा दिन ढलान पर है — ज्वर इसी तरह उतरता है।
संकेत: ध्यान दीजिए कि एक ही दिन में ताप कितना बदलता है — पहले दिन पूर्वाह्न 10 बजे 37.8 °C और सायं 7 बजे 40.0 °C। इसीलिए चिकित्सक दिन में एक बार नहीं, कई बार ताप अंकित करने को कहते हैं।
प्र10.
यदि आपको 22.5 °C ताप मापना है तो नीचे दर्शाए गए तापमापियों (चित्र 7.9) में से कौन-सा तापमापी उपयोग में लाएँगे? व्याख्या कीजिए।
उत्तर
उत्तर: तापमापी (ख)।
चित्र 7.9 के तीनों तापमापियों पर एक ही स्केल –10 °C से 30 °C तक अंकित है, अत: तीनों 22.5 °C तक पहुँचते तो हैं। अंतर इस बात का है कि कौन कितनी बारीकी से विभाजित है। प्रत्येक पर 0 °C और 10 °C के बीच के छोटे भाग गिनने पर:
तापमापी
0 °C और 10 °C के बीच भाग
एक छोटा भाग
क्या 22.5 °C दिखा सकता है?
(क)
10
1 °C
नहीं — केवल 22 °C या 23 °C
(ख)
20
0.5 °C
हाँ
(ग)
5
2 °C
नहीं — केवल 22 °C या 24 °C
(ख) के लिए: एक छोटा भाग = 10 °C ÷ 20 = 0.5 °C 22.5 °C = 20 °C + 0.5 °C के 5 भाग अत: 22.5 °C तापमापी (ख) के ठीक एक चिह्न पर पड़ता है।
व्याख्या इस प्रकार लिखिए: किसी तापमापी को उसके अल्पतम भाग तक ही पढ़ा जा सकता है। तापमापी (ख) के भाग सबसे बारीक, 0.5 °C के हैं और 22.5 °C ठीक उसके एक चिह्न पर आता है। (क) पर 22.5 °C दो चिह्नों के बीचोंबीच पड़ता है और (ग) पर 22 °C तथा 24 °C के बीच — दोनों उसे सही-सही नहीं दर्शा सकते।
प्र11.
चित्र 7.10 में दिखाए गए तापमापी में दर्शाया गया ताप है— (क) 28.0 °C (ख) 27.5 °C (ग) 26.5 °C (घ) 25.3 °C
उत्तर
उत्तर: (ख) 27.5 °C
पहले अल्पतम मान निकालिए, फिर भाग गिनिए।
चित्र 7.10 पर अंकित चिह्न: 0, 5, 10, 15, 20, 25, 30, 35, 40 दो अंकित चिह्नों के बीच अंतर = 5 °C उनके बीच छोटे भाग = 10 एक छोटा भाग = 5 °C ÷ 10 = 0.5 °C
लाल स्तंभ 25 के चिह्न से आगे समाप्त होता है। 25 के बाद गिने गए भाग: 25.5, 26.0, 26.5, 27.0, 27.5 — पाँच भाग। पाठ्यांक = 25 °C + 5 × 0.5 °C = 27.5 °C
चित्र 7.10 का पुनराँकन। 25 °C और 30 °C के मध्य 10 छोटे भाग हैं, अत: एक भाग = 0.5 °C। स्तंभ 25 °C से पाँच भाग आगे, अर्थात् 27.5 °C पर समाप्त होता है।
शेष क्यों गलत हैं: 28.0 °C एक भाग आगे है; 26.5 °C दो भाग पीछे; और 25.3 °C तो इस तापमापी पर पढ़ा ही नहीं जा सकता, क्योंकि 0.3, उसके अल्पतम भाग 0.5 °C का गुणज नहीं है।
प्र12.
किसी प्रयोगशाला तापमापी पर 0 °C और 100 °C के मध्य 50 भाग हैं। इस तापमापी का प्रत्येक भाग कितना ताप मापता है?
उत्तर
वही नियम लगाइए जो क्रियाकलाप 7.4 में सीखा था।
एक भाग = तापांतर ÷ भागों की संख्या तापांतर = 100 °C – 0 °C = 100 °C भागों की संख्या = 50 एक भाग = 100 °C ÷ 50 = 2 °C
अत: इस तापमापी का प्रत्येक भाग 2 °C ताप मापता है।
इसका अर्थ: यह तापमापी मोटे मापन वाला है। यह 24 °C या 26 °C तो दिखा सकता है, पर 25 °C कभी नहीं — वहाँ चिह्न ही नहीं है। इसका अल्पतम मान 2 °C है।
स्वयं जाँचिए: चित्र 7.3 (ख) वाले सामान्य प्रयोगशाला तापमापी में प्रत्येक 10 °C में 10 भाग होते हैं, अर्थात् एक भाग 1 °C। 0.5 °C प्रति भाग पाने के लिए प्रत्येक 10 °C में 20 भाग चाहिए।
प्र13.
किसी तापमापी का स्केल बनाइए जिसमें न्यूनतम भाग 0.5 °C ताप मापता है। आप केवल 10 °C और 20 °C के बीच के भाग को दर्शा सकते हैं।
उत्तर
पहले तय कीजिए कि कितने भाग चाहिए।
बनाए जाने वाले भाग की लंबाई = 20 °C – 10 °C = 10 °C प्रत्येक न्यूनतम भाग = 0.5 °C भागों की संख्या = 10 °C ÷ 0.5 °C = 20 भाग
बनाने की विधि:
एक सीधी रेखा खींचिए और उस पर 10 cm की दूरी पर दो बिंदु अंकित कीजिए। बाएँ को 10 °C और दाएँ को 20 °C लिखिए।
इन 10 cm को 20 बराबर भागों में बाँटिए — अर्थात् प्रत्येक 5 mm पर एक चिह्न। इससे बीच में 19 चिह्न बनेंगे और कुल 20 भाग।
पूर्ण डिग्री वाले चिह्न (11, 12, 13 … 19) कुछ लंबे बनाइए और उनके नीचे संख्याएँ लिखिए। बीच के छोटे चिह्न 10.5, 11.5, 12.5 आदि आधे डिग्री दर्शाएँगे।
अब प्रत्येक न्यूनतम भाग 0.5 °C पढ़ता है।
प्रश्न 13 का उत्तर — 10 °C से 20 °C के बीच के स्केल को 20 बराबर भागों में बाँटा गया है, अत: प्रत्येक अल्पतम भाग 0.5 °C पढ़ता है। यहाँ बनाया गया स्तंभ 16.5 °C दर्शाता है।
संकेत: ऐसी लंबाई चुनिए जो सरलता से बँट जाए। 10 °C के लिए 10 cm सर्वोत्तम है, क्योंकि तब प्रत्येक 0.5 °C आपके स्केल पर ठीक 5 mm हो जाता है।
प्र14.
कोई आपको बताता है कि उसे 101 डिग्री ज्वर है। क्या उसका तात्पर्य सेल्सियस स्केल से है अथवा फारेनहाइट स्केल से है?
उत्तर
उसका तात्पर्य 101 डिग्री फारेनहाइट, अर्थात् 101 °F से है — फारेनहाइट स्केल से।
यह सेल्सियस क्यों नहीं हो सकता: मानव शरीर का ताप सामान्यत: 35 °C से नीचे और 42 °C से ऊपर नहीं जाता। 101 °C का शारीरिक ताप असंभव है — जल स्वयं लगभग 100 °C पर उबल जाता है। अत: 101 फारेनहाइट का ही पाठ्यांक होगा।
101 °F कितना तेज़ ज्वर है? सामान्य से तुलना कीजिए:
सामान्य = 98.6 °F = 37.0 °C उसका ताप = 101 °F सामान्य से वृद्धि = 101 – 98.6 = 2.4 °F सेल्सियस में: (101 – 32) × 5/9 = 69 × 5 ÷ 9 = 345 ÷ 9 = 38.3 °C (एक दशमलव स्थान तक)
अत: उसे लगभग 38.3 °C का ज्वर है — मध्यम ज्वर, सामान्य से लगभग 1.3 °C अधिक।
संकेत: भारत में आज भी बहुत लोग ज्वर °F में ही बताते हैं, क्योंकि पुराने पारे वाले थर्मामीटर फारेनहाइट में अंकित होते थे। जब कोई कहता है “100 डिग्री बुखार”, तो उसका अर्थ सदैव °F होता है। मात्रक लिख देने से सारा संदेह मिट जाता है।
क्या यह उपयोगी रहा?प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!त्रुटि बताएँ