कुतूहल अध्याय 7 और भी सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इंटरनेट से सूचना एकत्र कीजिए कि बिल्ली, कुत्ता, घोड़ा, ऊँट, गाय और भैंस जैसे पशुओं के शरीर का ताप कैसे मापा जाता है। यदि आपके निकट में कोई पशु चिकित्सालय हो तो वहाँ जाकर आप पशुओं के शरीर के ताप का मापन होते हुए देख सकते हैं।
उत्तर

कैसे मापा जाता है: पशु चिकित्सक अंकीय डॉक्टरी थर्मामीटर (अथवा पुराना पारे वाला) लेकर उसका चिकना किया हुआ अग्रभाग पशु के मलाशय (रेक्टम) में धीरे से रखते हैं और लगभग एक मिनट तक वहीं रहने देते हैं। मुँह का उपयोग स्पष्ट कारणों से नहीं होता, और घने बालों वाले पशुओं में काँख का पाठ्यांक भरोसेमंद नहीं होता। कुछ चिकित्सक शीघ्र जाँच के लिए कान या पार्श्व पर संपर्क रहित अवरक्त तापमापी भी लगाते हैं।

अपने निष्कर्षों से मिलान करने के लिए लगभग सामान्य ताप (सभी °C में):

पशुसामान्य शारीरिक तापमनुष्य (37.0 °C) से तुलना
बिल्लीलगभग 38 °C से 39 °Cअधिक
कुत्तालगभग 38 °C से 39 °Cअधिक
घोड़ालगभग 37.5 °C से 38.5 °Cथोड़ा अधिक
ऊँटलगभग 34 °C से 40 °Cदिन-भर में बहुत बदलता है
गायलगभग 38 °C से 39 °Cअधिक
भैंसलगभग 37.5 °C से 39 °Cअधिक
सबसे रोचक है ऊँट: अधिकतर पशु अपना ताप लगभग स्थिर रखते हैं। मरुस्थल का ऊँट दिन की गरमी में अपने शरीर का ताप बढ़ने देता है और रात में उसे फिर गिरने देता है। पसीने से ऊष्मा उड़ाने के बजाय उसे संचित करके वह बहुत सारा जल बचा लेता है।
संकेत: पशु चिकित्सालय जाएँ तो दो बातें अवश्य पूछिए — उस पशु का सामान्य ताप कितना होता है, और कितना अधिक होने पर उसे ज्वर माना जाता है। उत्तर नोटबुक में मात्रक °C के साथ लिखिए।
प्र2.
ज्ञात कीजिए कि भारत में प्राय: कौन-से स्थान सर्वाधिक ठंडे और सर्वाधिक गरम माने जाते हैं और इन स्थानों पर अंकित किए गए न्यूनतम और अधिकतम तापमान की भी जानकारी एकत्र करें।
उत्तर

प्राय: सर्वाधिक ठंडे माने जाने वाले स्थान:

  • द्रास, लद्दाख के कारगिल जिले में — प्राय: भारत का सबसे ठंडा आबाद स्थान कहा जाता है। यहाँ लगभग –45 °C तक का ताप अंकित किया जा चुका है।
  • सियाचिन ग्लेशियर इससे भी ठंडा है, पर वहाँ कोई स्थायी रूप से नहीं रहता।
  • लेह (लद्दाख), सेला दर्रा (अरुणाचल प्रदेश) तथा केलंग (हिमाचल प्रदेश) अन्य अत्यंत ठंडे स्थान हैं।

प्राय: सर्वाधिक गरम माने जाने वाले स्थान:

  • फलौदी, राजस्थान — जहाँ मई 2016 में भारत का सर्वाधिक विश्वसनीय रूप से अंकित ताप लगभग 51 °C मापा गया था।
  • राजस्थान के चूरू एवं बीकानेर तथा नागपुर और टिटलागढ़ (ओडिशा) ग्रीष्म में नियमित रूप से 47 °C पार कर जाते हैं।
दोनों छोरों का अंतर
= 51 °C – (–45 °C)
= 51 °C + 45 °C
= 96 °C — लगभग एक पूरे प्रयोगशाला तापमापी जितना!
स्वयं जाँचिए: रिकॉर्ड बदलते रहते हैं। इन स्थानों के नवीनतम सर्वकालिक अधिकतम एवं न्यूनतम के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की वेबसाइट देखिए, और ताप के साथ उसकी तिथि भी लिखिए।
प्र3.
हमारे सौर मंडल में विभिन्न ग्रहों की सूर्य से दूरी भिन्न-भिन्न है। इंटरनेट पर ग्रहों की सूर्य से दूरी (बढ़ते क्रम में) खोजें। एक तालिका में इनकी सूर्य से दूरी प्रदर्शित करते हुए उनका तापमान भी लिखें। तालिका में देखें कि क्या ग्रहों का औसत तापमान उनकी सूर्य से दूरी बढ़ने पर घटता है? यदि यह बात किसी ग्रह के लिए सत्य नहीं है तो ज्ञात कीजिए कि वह कौन-सा ग्रह है और ऐसा क्यों है?
उत्तर

तालिका, ग्रहों को दूरी के बढ़ते क्रम में रखकर:

ग्रहसूर्य से औसत दूरीऔसत सतही तापमान
बुध5.8 करोड़ kmलगभग 167 °C
शुक्र10.8 करोड़ kmलगभग 464 °C
पृथ्वी15.0 करोड़ kmलगभग 15 °C
मंगल22.8 करोड़ kmलगभग –65 °C
बृहस्पति77.8 करोड़ kmलगभग –110 °C
शनि143 करोड़ kmलगभग –140 °C
अरुण (यूरेनस)287 करोड़ kmलगभग –195 °C
वरुण (नेपच्यून)450 करोड़ kmलगभग –200 °C

हाँ — सामान्य नियम यही है कि ग्रह सूर्य से जितना दूर, उतना ठंडा। पृथ्वी से आगे बढ़ते हुए ताप लगातार घटता जाता है और वरुण पर लगभग –200 °C तक पहुँच जाता है।

किंतु एक स्पष्ट अपवाद है: शुक्र। शुक्र बुध से अधिक दूर है, फिर भी वही सबसे गरम ग्रह है — लगभग 464 °C, जबकि बुध का 167 °C

शुक्र नियम क्यों तोड़ता है: शुक्र कार्बन डाइऑक्साइड के घने वायुमंडल से ढका है। सूर्य का प्रकाश भीतर आकर सतह को गरम कर देता है, पर वह ऊष्मा वापस अंतरिक्ष में नहीं जा पाती — वायुमंडल उसे रोक लेता है। इसे ग्रीनहाउस प्रभाव कहते हैं, और शुक्र पर यह इतना प्रबल है कि वहाँ सीसा भी पिघल जाए। दूसरी ओर बुध पर वायुमंडल लगभग है ही नहीं, इसलिए उसकी सारी ऊष्मा रात में निकल जाती है।
क्या आप जानते हैं? वायु की चादर न होने के कारण बुध का ताप दिन में लगभग 430 °C और रात में लगभग –180 °C तक झूलता है — सौर मंडल में किसी भी ग्रह का सबसे बड़ा तापांतर।
प्र4.
अपनी कक्षा के कमरे में दीवार पर लटकाए गए तापमापी के समीप चित्र 7.11 के अनुसार उपकरण को व्यवस्थित कीजिए। दिन के तीन भिन्न-भिन्न समयों पर (प्रथम कालांश में, दोपहर भोजन के अंतराल में और अंतिम कालांश में) तापमापी 1 और 2 के पाठ्यांक अंकित कीजिए। पाठ्यांकों की तुलना कीजिए और अपना निष्कर्ष लिखिए। यह प्रक्रिया दो सप्ताह तक दोहराइए।
उत्तर

क्या व्यवस्थित करना है: तापमापी 1 दीवार पर लटका कक्ष-तापमापी है; तापमापी 2 स्टैंड में कसा हुआ प्रयोगशाला तापमापी है जिसका बल्ब जल से भरे बीकर में डूबा है और जो दीवार के पास ही रखा है। दोनों को आँख द्रव स्तंभ के शीर्ष की सीध में रखकर पढ़िए।

एक दिन का नमूना अंकन (दो सप्ताह तक प्रतिदिन एक नई पंक्ति बनाइए):

दिन का समयतापमापी 1 — कक्ष की वायुतापमापी 2 — जलअंतर
प्रथम कालांश (प्रात: 8 बजे)22 °C23 °C1 °C
भोजन अंतराल (दोपहर 12 बजे)29 °C27 °C2 °C
अंतिम कालांश (अपराह्न 3 बजे)31 °C29 °C2 °C

अपेक्षित निष्कर्ष:

  • दोनों ताप प्रात: से अपराह्न तक बढ़ते हैं और अंतिम कालांश में सर्वाधिक होते हैं, क्योंकि सूर्य दिन-भर भवन को गरम करता रहा है।
  • जल का ताप वायु के ताप का अनुसरण तो करता है पर पीछे रह जाता है — ठंडी सुबह में वह वायु से थोड़ा अधिक और गरम दोपहर में थोड़ा कम रहता है।
  • दो सप्ताह में जो दिन गरम लगे, उन दिनों दोनों तापमापियों के पाठ्यांक ऊँचे मिलेंगे — अर्थात् जल भी कक्ष-ताप का सही, यद्यपि धीमा, लेखा रखता है।
जल पीछे क्यों रह जाता है: जल अपने ताप में एक डिग्री के परिवर्तन के लिए बहुत अधिक ऊष्मा लेता या देता है। इसलिए जब वायु तेज़ी से गरम होती है तो जल अभी पीछे ही रहता है — और रात में जब वायु ठंडी होती है तो जल कल की गरमी अब भी सँभाले रहता है। इसी कारण समुद्र के निकट के स्थानों का मौसम भीतरी भागों की तुलना में सम रहता है।
संकेत: बीकर को खिड़की से दूर रखिए। उस पर सीधी धूप पड़ने से जल अपने आप गरम हो जाएगा और तुलना बिगड़ जाएगी।
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