कुतूहल अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या डॉक्टरी थर्मामीटर का उपयोग उबलते जल अथवा बर्फ का ताप मापने के लिए किया जा सकता है?
उत्तर

नहीं। उबलते जल और बर्फ का ताप डॉक्टरी थर्मामीटर की मापन-सीमा (परिसर) के बाहर है।

क्या मापना हैउसका तापडॉक्टरी थर्मामीटर के परिसर में?
पिघलती बर्फलगभग 0 °Cनहीं — बहुत नीचे
मानव शरीरलगभग 37 °Cहाँ
उबलता जललगभग 100 °Cनहीं — बहुत ऊपर
ऐसा क्यों होता है: डॉक्टरी थर्मामीटर केवल मानव शरीर के ताप के लिए बनाया जाता है, जो सामान्यत: 35 °C से नीचे और 42 °C से ऊपर नहीं जाता। इसलिए उसका स्केल भी उतने ही छोटे विस्तार में अंकित होता है। उन चिह्नों के आगे पढ़ने को कुछ है ही नहीं — और काँच का तापमापी उबलते जल में चटक भी सकता है।

बर्फ और उबलते जल के लिए प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग करना पड़ता है, जिसका परिसर –10 °C से 110 °C होता है।

प्र2.
हम डॉक्टरी थर्मामीटर की मापन-सीमा के बाहर ताप कैसे माप सकते हैं?
उत्तर

प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग करके।

  • विद्यालय की प्रयोगशाला में प्राय: उपलब्ध तापमापी का परिसर –10 °C से 110 °C होता है।
  • यही एक विस्तार 0 °C की बर्फ, कक्ष की वायु, गुनगुने जल और लगभग 100 °C पर उबलते जल — सबको समेट लेता है।
  • यह काँच की बंद, लंबी, संकरी नली होती है जिसके एक सिरे पर द्रव (लाल रंग का ऐल्कोहल अथवा पारा) से भरा बल्ब होता है और नली के साथ-साथ सेल्सियस स्केल अंकित होता है।
संकेत: इस परिसर से भी कहीं बाहर के ताप — भट्ठी अथवा किसी तारे का भीतरी भाग — मापने के लिए वैज्ञानिक बिलकुल दूसरे उपकरण काम में लेते हैं। सूर्य के क्रोड़ का तापमान लगभग 1.5 करोड़ (15 मिलियन) डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है।
प्र3.
तापमापी के आविष्कार से पूर्व ज्वर का पता कैसे लगाया जाता था?
उत्तर

व्यक्ति की नाड़ी-दर देखकर।

  • ज्वर किसी व्यक्ति की नाड़ी-दर को प्रभावित करता है — प्राय: उसे तेज़ कर देता है।
  • भारत में इसका ज्ञान प्राचीन समय में भी था, और वैद्य रोगी की कलाई पकड़कर रोग का अनुमान लगाते थे।

पर इस विधि में एक कमी है: ज्वर के अतिरिक्त कुछ अन्य स्थितियों में भी नाड़ी-दर प्रभावित होती है — दौड़ना, भय, उत्तेजना, व्यायाम। अत: केवल नाड़ी-दर के आधार पर ही ज्वर का निश्चय नहीं किया जा सकता।

तापमापी क्यों जीता: नाड़ी एक अप्रत्यक्ष संकेत है और गरमाहट की कोई संख्या नहीं देती। तापमापी ठीक उसी राशि को मापता है जो हमें चाहिए — ताप — और उसे °C में ऐसी संख्या के रूप में देता है जिसकी जाँच कोई भी कर सकता है।
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