अन्वेषण अध्याय 1 इसे अनदेखा न करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भारत में अधिकांश नदियों के नाम देवियों के नाम पर रखे गए हैं, जैसे– गंगा, यमुना, कावेरी, आदि। जबकि ब्रह्मपुत्र के नाम का अर्थ है ‘ब्रह्मा का पुत्र’। गर्मियों में सूखने की अपेक्षा इस नदी में जल की मात्रा बढ़ जाती है! क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि गर्मियों में ब्रह्मपुत्र को जल केवल वर्षा से नहीं, पिघलती बर्फ और हिमनदों से भी मिलता है।

  • इस नदी का उद्गम हिमालय की उन ऊँचाइयों पर है जहाँ वर्ष भर बर्फ और हिम जमी रहती है।
  • गर्मी में यही बर्फ पिघलती है, इसलिए ठीक उसी समय नदी में अधिक जल आता है जब केवल वर्षा पर निर्भर छोटी नदियाँ सूखने लगती हैं।
  • भारत में ग्रीष्म ऋतु मानसून की ऋतु भी है, और ब्रह्मपुत्र के जलग्रहण क्षेत्र — अरुणाचल प्रदेश, असम तथा आस-पास की पहाड़ियों — में विश्व की सर्वाधिक वर्षा होती है। दोनों कारण मिलकर जल-मात्रा और बढ़ा देते हैं।
ऐसा क्यों: केवल वर्षा से पोषित नदियाँ एक ही ऋतु पर निर्भर होती हैं और वर्षा समाप्त होते ही सूख जाती हैं। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ सदावाहिनी होती हैं — उनके पास हिम के रूप में जल का दूसरा भंडार होता है, जो सबसे गर्म महीनों में सबसे अधिक जल देता है।
क्या आप जानते हैं? गंगा और सिंधु भी इसी कारण सदावाहिनी हैं। इसीलिए अध्याय में हिमालय को ‘एशिया का जल शिखर’ कहा गया है।
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