प्र1.
क्या आप ऐसे अन्य उत्पादों के बारे में सोच सकते हैं, जिनके लिए तैयार बाजार नहीं है?
उत्तर
आकृति कैनवास पर तैल-चित्र बनाती है। उसके चित्रों की सराहना होती है, पर “अमरूद वाली स्थिति के विपरीत कलाकृति के लिए स्थानीय क्रेता और विक्रेता बहुत कम होते हैं।” कई और वस्तुएँ भी इसी स्थिति में हैं।
| उत्पाद या सेवा | तैयार बाजार क्यों नहीं है |
|---|---|
| चित्रकला, मूर्तिकला, कला-छायाचित्र | हर कृति अनूठी होती है, इसलिए तुलना के लिए कोई प्रचलित कीमत ही नहीं |
| हस्तशिल्प — मधुबनी चित्रकला, बाँस का काम, चन्नपटना के खिलौने, जनजातीय आभूषण | क्रेता दूर नगरों और विदेशों में हैं; कारीगर के गाँव में उनकी संख्या नगण्य |
| हथकरघा साड़ियाँ और पारंपरिक वस्त्र | सस्ते मिल-निर्मित कपड़े से होड़; उन्हें चाहने वाले क्रेता बिखरे हुए |
| शास्त्रीय संगीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियाँ | दर्शक थोड़े और अवसर कभी-कभार |
| पुराना मकान, परिवार की पुरानी कृषि-भूमि | क्रेता बहुत कम, और हर संपत्ति अपने आप में अलग |
| दुर्लभ पुस्तकें, पांडुलिपियाँ, पुरावस्तुएँ, पुराने सिक्के | केवल गिने-चुने संग्राहक चाहते हैं |
| अत्यंत विशिष्ट कौशल — पांडुलिपि-वाचक, रथ बनाने वाला बढ़ई | किसी एक स्थान पर उस कौशल के बहुत कम नियोक्ता |
| विशेष रूप से बनाई गई मशीन | एक ही ग्राहक के लिए बनी; दूसरा कोई उसे प्रयोग नहीं कर सकता |
ऐसा क्यों होता है: बाजार तब सहज बनता है जब अनेक क्रेता एक जैसी वस्तु चाहते हों और अनेक विक्रेता उसे दे सकें — अमरूद, चावल, साबुन। जब हर वस्तु अनूठी हो और क्रेता कम तथा बिखरे हुए हों, तो न कोई साझा कीमत बनती है और न क्रेता-विक्रेता एक-दूसरे को खोज पाते हैं।