अन्वेषण अध्याय 2 इसे अनदेखा न करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सूर्य से वर्षा क्यों होती है? क्या आप इसका कारण सोच सकते हैं?
उत्तर

हाँ — जल को आकाश तक पहुँचाने वाला इंजन सूर्य ही है। सूर्य की ऊष्मा न हो तो न जलवाष्प बने, न बादल, और न ही वर्षा हो।

सूर्य समुद्र, नदियों, झीलों, नम मिट्टी और पत्तियों को गर्म करता है
→ जल वाष्पित होकर अदृश्य जलवाष्प के रूप में ऊपर उठता है
→ ऊपर वायु ठंडी होती है, इसलिए वाष्प संघनित होकर सूक्ष्म बूँदों में बदलती है
→ लाखों बूँदें मिलकर बादल बनाती हैं
→ बूँदें भारी होकर वर्षा के रूप में गिरती हैं
वाष्पन संघनन → बादल वर्षा समुद्र, नदी, नम भूमि
जल चक्र — सूर्य की ऊष्मा से जल वाष्पित होता है, ऊपर जाकर वाष्प संघनित होकर बादल बनाती है और बादल वही जल वर्षा के रूप में लौटा देता है।
आदर्श वाक्य कितना सटीक है: भारत मौसम विज्ञान विभाग का आदर्श वाक्य ‘आदित्यात् जायते वृष्टिः’ — अर्थात ‘सूर्य से वर्षा होती है’ — प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति से लिया गया है, और पूर्ण वाक्य कहता है, “सूर्य से वर्षा होती है, वर्षा से भोजन या अन्न प्राप्त होता है और भोजन या अन्न से जीव उत्पन्न होते हैं।” यह एक शृंखला है — सूर्य का प्रकाश → वाष्पन → वर्षा → फसल → जीवन। प्राचीन प्रेक्षकों ने बिना किसी उपकरण के जल चक्र पहचान लिया था।
क्या आप जानते हैं? भारत मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना 1875 में हुई थी और यह संसार की सबसे पुरानी मौसम सेवाओं में से एक है।
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