प्र1.
आपके विचार से राजाओं ने अपनी उपलब्धियों को अभिलेखों के माध्यम से क्यों प्रस्तुत किया होगा?
उत्तर
क्योंकि अभिलेख एक साथ चार काम करता है, जो उस समय का कोई अन्य माध्यम नहीं कर सकता था।
| अभिलेख राजा को क्या देता है | अध्याय में इसका प्रमाण |
|---|---|
| स्थायित्व | पत्थर और धातु ताड़पत्र, वस्त्र और स्मृति से अधिक टिकते हैं। लौह-स्तंभ का अभिलेख 1600 वर्ष से भी अधिक पुराना है और आज भी है; हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति (चित्र 7.5) बची है, जबकि गुप्त दरबार कब का समाप्त हो चुका |
| सार्वजनिक घोषणा | स्तंभ ऐसे स्थान पर खड़ा होता है जहाँ से सब गुजरते हैं — यात्री, व्यापारी, तीर्थयात्री, प्रतिद्वंद्वी राजाओं के दूत। संदेश उन तक पहुँचता है जिनसे राजा कभी नहीं मिलेगा |
| वैधता और चेतावनी | पराजित राजाओं की सूची पड़ोसियों को बताती है कि विरोध का परिणाम क्या होता है। अध्याय कहता है कि अनेक राजाओं ने ‘उनकी शक्ति से भयभीत होकर बिना युद्ध के ही समर्पण कर दिया’ — अर्थात अभिलेख ने आधा युद्ध स्वयं लड़ लिया |
| भविष्य के लिए अभिलेखन | हरिषेण केवल युद्धों का नहीं, राजा द्वारा कला, ज्ञान और व्यापार को दिए गए प्रोत्साहन का भी वर्णन करते हैं। राजा केवल विजेता नहीं, संपूर्ण शासक के रूप में स्मरण किया जाना चाहता था |
ऐसा क्यों हुआ: मुद्रण, समाचार-पत्र और छायाचित्र के बिना राजा की कीर्ति को किसी ऐसी वस्तु से जोड़ना पड़ता था, जिसे बदला, खोया या भुलाया न जा सके। पत्थर पर उत्कीर्ण करना उस समय का सबसे सशक्त ‘प्रकाशन’ था — इसीलिए बड़ी उपाधियाँ (महाराजाधिराज, सम्राट, चक्रवर्ती) भी अभिलेखों और सिक्कों पर मिलती हैं।
इतिहासकार की दृष्टि: प्रशस्ति राजा के अपने राजकवि द्वारा लिखी जाती है। हरिषेण प्रशंसा के लिए ही नियुक्त थे। अतः यह अभिलेख इस बात का उत्तम प्रमाण है कि राजा लोगों से क्या मनवाना चाहता था, और इस बात का केवल सामान्य प्रमाण कि वास्तव में क्या हुआ। इसीलिए इतिहासकार इसे सिक्कों, अन्य अभिलेखों और यात्रा-वृत्तांतों से मिलाकर देखते हैं।