प्र1.
सूर्य के प्रकाश में रखे गए पौधे से ली गई पत्ती के अहरित धब्बे नीले-काले रंग के नहीं हुए। क्या यह इंगित करता है कि उन धब्बों में पर्णहरित उपस्थित नहीं है?
उत्तर
आवश्यक नहीं। सही निष्कर्ष अधिक सावधानी से निकालना चाहिए — संभवत: इन अहरित धब्बों में उचित मात्रा में पर्णहरित नहीं है जिससे आयोडीन परीक्षण द्वारा पता लगाए जाने योग्य पर्याप्त मंड बन सके।
भास्कर ने यह अभिलेखित किया —
| तालिका 10.2 — पौधों की पत्तियों के हरित और अहरित भागों में मंड की उपस्थिति | |||
|---|---|---|---|
| क्र.सं. | गमले के पौधे के लिए प्रकाश की स्थितियाँ | आयोडीन परीक्षण से पहले का रंग | आयोडीन परीक्षण के बाद का रंग |
| 1. | सूर्य के प्रकाश में रखा पौधा | पत्ती पर हरित और अहरित रंग के धब्बे हैं | पत्ती के हरित धब्बे नीले-काले रंग के (अहरित धब्बों में कोई परिवर्तन नहीं) |
| 2. | अँधेरे में रखा पौधा | पत्ती पर हरित और अहरित रंग के धब्बे हैं | रंग में कोई परिवर्तन नहीं |
सावधानी क्यों आवश्यक है: आयोडीन परीक्षण मंड की जाँच करता है, पर्णहरित की नहीं। "नीला-काला नहीं हुआ" केवल यह बताता है कि वहाँ इतना कम मंड बना कि पकड़ में नहीं आया। उन धब्बों में थोड़ा पर्णहरित उपस्थित हो सकता है — कुछ रंगीन पत्तियों में तो अन्य वर्णक हरे रंग को दबा भी देते हैं।
रोचक तथ्य: कुछ पौधों की पत्तियाँ लाल, बैंगनी अथवा भूरी दिखाई देती हैं क्योंकि उनमें हरे पर्णहरित की अपेक्षा इन रंगों के वर्णक अधिक होते हैं जो हरे रंग को दबा देते हैं। इनमें से कुछ वर्णक प्रकाश संश्लेषण में भी सहायक होते हैं — ऐसी पत्तियों में आयोडीन परीक्षण से नीला-काला रंग आ सकता है।