कुतूहल अध्याय 11 क्रियाकलाप 11.4: आइए, अन्वेषण करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या सभी स्थितियों में छाया बनीं? क्या छाया की आकृति और आमाप संगत वस्तु के समान थी? तालिका 11.2 के द्वितीय स्तंभ में अपने प्रेक्षण अंकित कीजिए।
उत्तर

नहीं, सभी स्थितियों में छाया नहीं बनी — सात में से तीन क्रियाओं में छाया बनती ही नहीं। और छाया का आमाप प्राय: वस्तु के समान नहीं होता; वह सामान्यत: बड़ी बनती है तथा वस्तु की आकृति तभी दिखाती है जब वस्तु प्रकाश के सामने सीधी रखी हो।

क्रियाछाया के विषय में अवलोकन
पर्दा हटा दिया जाता है।कोई छाया दिखाई नहीं देती। प्रकाश आगे कमरे में चला जाता है; उसे रोकने वाली कोई सतह न होने पर काली आकृति बने भी कहाँ।
वस्तु को हटा दिया जाता है।छाया नहीं बनती। पर्दे पर केवल टॉर्च के प्रकाश का चमकीला वृत्त दिखाई देता है।
टॉर्च को स्विच ऑफ कर दिया जाता है।छाया नहीं बनती — रोकने के लिए प्रकाश ही नहीं है।
टॉर्च और पर्दे की स्थिति को नियत रखते हुए वस्तु को पर्दे की ओर खिसकाया जाता है।छाया छोटी होती जाती है तथा उसके किनारे अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। उसका आमाप वस्तु के आमाप के निकट पहुँच जाता है।
टॉर्च और पर्दे की स्थिति को नियत रखते हुए वस्तु को टॉर्च की ओर खिसकाया जाता है।छाया बड़ी हो जाती है और उसके किनारे धुंधले पड़ जाते हैं।
टॉर्च और पर्दे की स्थिति नियत रखते हुए वस्तु को झुकाया जाता है।छाया की आकृति बदल जाती है। जैसे — गोल चकती सामने रखने पर वृत्त, झुकाने पर दीर्घवृत्त और किनारे की ओर करने पर लगभग एक रेखा जैसी छाया बनाती है।
वस्तु का रंग परिवर्तित किया जाता है।कोई परिवर्तन नहीं। छाया उतनी ही काली, उसी आकृति और आमाप की रहती है। समान आमाप की लाल और हरी गेंद बिल्कुल एक जैसी छाया बनाती हैं।
वस्तु टॉर्च के समीप — बड़ी छाया बड़ी वस्तु पर्दे के समीप — छोटी छाया छोटी
टॉर्च से किरणें फैलती हुई चलती हैं। टॉर्च के समीप रखी वस्तु प्रकाश के चौड़े शंकु को रोकती है, अत: दीवार पर उसकी छाया बड़ी बनती है; वही वस्तु दीवार के समीप रखने पर केवल संकीर्ण भाग रोकती है और छाया छोटी बनती है।
प्र2.
इस क्रियाकलाप से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? किसी वस्तु की छाया के अवलोकन के लिए हमें क्या-क्या चाहिए? वस्तु का रंग परिवर्तन करने से क्या छाया का रंग परिवर्तित होता है?
उत्तर

छाया के अवलोकन के लिए तीन चीजें आवश्यक हैं —

एक प्रकाश स्रोत  +  एक अपारदर्शी वस्तु  +  एक पर्दाछाया

इनमें से कोई एक भी हटा दें तो छाया लुप्त हो जाती है। दैनिक जीवन में दीवारें, फर्श, धरातल अथवा कोई अन्य सतह पर्दे की भाँति कार्य करती है।

नहीं — वस्तु का रंग बदलने से छाया का रंग नहीं बदलता। लाल गेंद और नीली गेंद, दोनों की छाया एक जैसी काली आकृति होती है।

ऐसा क्यों होता है: छाया वस्तु से बनी नहीं होती; वह तो केवल वह क्षेत्र है जहाँ वस्तु ने प्रकाश को पर्दे तक पहुँचने से रोक दिया है। ‘प्रकाश का न होना’ रंगहीन होता है, अत: वस्तु चाहे किसी भी रंग की हो, छाया काली ही रहती है। छाया की आकृति, आमाप एवं स्पष्टता प्रकाश स्रोत और पर्दे के सापेक्ष वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है, उसके रंग पर नहीं।
यह कीजिए: टॉर्च के मुख पर लाल पारदर्शी कागज लगाइए। अब दीवार का प्रकाशित भाग लाल हो जाता है, परंतु छाया फिर भी काली ही रहती है — रंग प्रकाश से आया था, वस्तु से नहीं।
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