आप बायाँ हाथ उठाते हैं तो प्रतिबिंब अपना दायाँ हाथ उठाता हुआ दिखाई देता है। आप दायाँ कान स्पर्श करते हैं तो प्रतिबिंब अपना बायाँ कान स्पर्श करता दिखता है।
प्रतिबिंब में हुए इस वाम-दक्षिण उत्क्रमण को पार्श्व उत्क्रमण कहते हैं। समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंबों में पार्श्व उत्क्रमण होता है।
ऐसा क्यों होता है: दर्पण आपको वास्तव में घुमाता नहीं; वह तो आपके प्रत्येक बिंदु को सीधे उसके सामने वाली दिशा में लौटा देता है। आपके बाएँ पक्ष का निकटतम बिंदु प्रतिबिंब में उस ओर आता है जिसे हम प्रतिबिंब का दायाँ पक्ष कहते हैं। इस प्रकार पक्ष आपस में बदल जाते हैं, जबकि ऊपर-नीचे नहीं बदलते — इसीलिए प्रतिबिंब सीधा बना रहता है।
क्या आप जानते हैं? इसी कारण रोगी वाहन के अगले भाग पर AMBULANCE उल्टा लिखा जाता है। आगे चलते वाहन का चालक इसे पश्चदर्शी दर्पण में देखता है, जहाँ पार्श्व उत्क्रमण से यह पुन: ‘AMBULANCE’ पढ़ा जाता है और तुरंत समझ में आ जाता है।