कुतूहल अध्याय 11 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
निम्नलिखित पिंडों में से कौन-से पिंड दीप्त पिंड हैं? मंगल ग्रह, चंद्रमा, ध्रुव तारा, सूर्य, शुक्र ग्रह तथा दर्पण
उत्तर

दीप्त पिंड हैं — ध्रुव तारा तथा सूर्य

पिंडदीप्त / अदीप्तकारण
मंगल ग्रहअदीप्तग्रह है; सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके चमकता है
चंद्रमाअदीप्तअपने ऊपर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है
ध्रुव तारादीप्ततारा है — स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित करता है
सूर्यदीप्तहमारा निकटतम तारा; पृथ्वी पर प्राकृतिक प्रकाश का मुख्य स्रोत
शुक्र ग्रहअदीप्तग्रह है; परावर्तित सूर्य-प्रकाश से चमकता है
दर्पणअदीप्तकेवल अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को परावर्तित करता है
संकेत: कसौटी चमक नहीं है। शुक्र चंद्रमा के बाद रात्रि के आकाश का सबसे चमकीला पिंड है, फिर भी वह स्वयं प्रकाश नहीं बनाता।
प्र2.
स्तंभ ‘I’ में दिए गए पदों का मिलान स्तंभ ‘II’ में दिए गए सही वाक्यांशों से कीजिए। स्तंभ I — सूचीछिद्र कैमरा, अपारदर्शी वस्तु, पारदर्शी वस्तु, छाया। स्तंभ II — प्रकाश पूर्णत: अवरुद्ध करती है।, वस्तु के पीछे बना गहरा काला क्षेत्र।, व्युत्क्रमित प्रतिबिंब बनता है।, प्रकाश लगभग पूर्णत: संचारित होता है।
उत्तर
स्तंभ Iस्तंभ II
सूचीछिद्र कैमराव्युत्क्रमित प्रतिबिंब बनता है।
अपारदर्शी वस्तुप्रकाश पूर्णत: अवरुद्ध करती है।
पारदर्शी वस्तुप्रकाश लगभग पूर्णत: संचारित होता है।
छायावस्तु के पीछे बना गहरा काला क्षेत्र।
ये युग्म क्यों: वस्तु के ऊपरी और निचले सिरों से आने वाली किरणें सूचीछिद्र पर एक-दूसरे को काटती हैं, अत: सूचीछिद्र कैमरा उल्टा प्रतिबिंब बनाता है। अपारदर्शी वस्तु से प्रकाश बिल्कुल पार नहीं होता, जबकि पारदर्शी वस्तु से लगभग पूरा प्रकाश संचारित हो जाता है। वस्तु के पीछे जहाँ प्रकाश नहीं पहुँच पाता, वह गहरा काला क्षेत्र ही छाया कहलाता है।
प्र3.
साहिल, रेखा, पैट्रिक और कासिमा चित्र 11.16 में दर्शाए गए पाइप से मोमबत्ती की लौ को देखने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से कौन लौ देख पाएगा?
उत्तर

केवल रेखा ही लौ देख पाएगी।

चित्र 11.16 में मोमबत्ती पाइप के दाहिने सिरे पर रखी है। रेखा की आँख उस सीधी क्षैतिज शाखा के दूसरे सिरे पर है जो सीधे मोमबत्ती तक जाती है, अत: लौ से उसकी आँख तक एक अखंडित सीधा मार्ग उपलब्ध है।

विद्यार्थीक्या लौ दिखाई देगी?कारण
साहिलनहींउसकी शाखा सीधी शाखा से कोण बनाती है — प्रकाश को मुड़ना पड़ता, जो संभव नहीं
रेखाहाँउसकी शाखा सीधी है और मोमबत्ती की लौ के साथ एक सीध में है
पैट्रिकनहींउसकी शाखा भी मुख्य पाइप से कोण बनाती हुई मिलती है
कासिमानहींउसकी शाखा लंबवत नीचे की ओर है; प्रकाश मुड़कर उसमें नहीं जाएगा
ऐसा क्यों होता है: प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है। वह शाखित पाइप के मोड़ों पर मुड़ नहीं सकता। केवल वही व्यक्ति प्रकाश प्राप्त करता है जिसकी आँख, पाइप और लौ एक ही सरल रेखा में हों — और वह है रेखा।
प्र4.
चित्र 11.17 में दर्शाए गए प्रतिबिंबों को देखिए और बालक की छाया को दर्शाने वाले सही चित्र का चयन कीजिए।
उत्तर

सही चित्र (घ) है।

छाया सदैव वस्तु की उस ओर बनती है जो प्रकाश स्रोत के विपरीत हो, और वह स्रोत से वस्तु होकर खींची गई सीधी रेखा के अनुदिश होती है। चित्र (घ) में सूर्य ऊपर दाईं ओर है और बालक की छाया उसके पैरों से जुड़ी हुई नीचे बाईं ओर फैली है — वास्तव में ऐसा ही होता है।

विकल्पसूर्य कहाँ हैसही/गलत होने का कारण
(क)लगभग ठीक सिर के ऊपरगलत — सूर्य सिर के ऊपर हो तो छाया छोटी और पैरों के पास होनी चाहिए, इतनी लंबी नहीं
(ख)ऊपर बाईं ओरगलत — छाया दाईं ओर बननी चाहिए थी, यहाँ ठीक पैरों के नीचे दिखाई गई है
(ग)ऊपर दाईं ओरगलत — छाया सूर्य की ही ओर दिखाई गई है
(घ)ऊपर दाईं ओरसही — छाया विपरीत (बाईं) ओर, पैरों से आरंभ होती हुई
स्वयं जाँचिए: धूप में खड़े होकर सूर्य से अपने सिर होकर एक काल्पनिक सीधी रेखा खींचिए। वह रेखा धरती को ठीक वहीं छूती है जहाँ आपकी छाया का शीर्ष होता है।
प्र5.
चित्र 11.18 में दर्शाया गया है कि एक स्थिर टॉर्च के सामने रखी गेंद की छाया दीवार पर बनी है। परिदृश्य (i) में गेंद टॉर्च के समीप है जबकि परिदृश्य (ii) में गेंद दीवार के समीप है। दिए गए विकल्पों (क) और (ख) में से दोनों परिदृश्यों का सबसे उपयुक्त प्रदर्शन करने वाले चित्र का चयन कीजिए।
उत्तर

परिदृश्य (i) → विकल्प (ख) (बड़ी छाया) तथा परिदृश्य (ii) → विकल्प (क) (छोटी छाया)।

गेंद टॉर्च के समीप → बड़ी छाया, किनारे धुंधले
गेंद दीवार के समीप → छोटी छाया, किनारे स्पष्ट
ऐसा क्यों होता है: टॉर्च का प्रकाश शंकु के रूप में फैलता जाता है। टॉर्च के समीप रखी गेंद वहाँ होती है जहाँ यह शंकु अभी संकीर्ण है, अत: वह पुंज का बड़ा भाग रोक लेती है और दूर दीवार पर फैलकर उसकी छाया बड़ी बनती है। वही गेंद दीवार के समीप रखने पर चौड़े हो चुके पुंज का बहुत थोड़ा भाग ही रोकती है, इसलिए छाया छोटी और लगभग गेंद के आमाप की बनती है।
यह कीजिए: टॉर्च और दीवार के बीच अपनी मुट्ठी रखकर उसे धीरे-धीरे टॉर्च से दीवार की ओर ले जाइए। छाया लगातार छोटी होती जाएगी और उसके किनारे अधिक स्पष्ट होते जाएँगे।
प्र6.
चित्र 11.18 के आधार पर स्तंभ ‘I’ में टॉर्च की स्थिति का स्तंभ ‘II’ में गेंद की छाया के अभिलक्षणों के आधार पर मिलान कीजिए। स्तंभ I — यदि टॉर्च गेंद के समीप है; यदि टॉर्च गेंद से बहुत दूर है; यदि गेंद को इस व्यवस्था से हटा दिया जाए; यदि इस व्यवस्था में गेंद के बाईं ओर दो टॉर्च लिए जाएँ। स्तंभ II — छाया बहुत छोटी बनेगी; छाया बहुत बड़ी बनेगी; पर्दे पर दो छाया दिखाई देगी; पर्दे पर एक चमकदार चकता दिखाई देगा।
उत्तर
स्तंभ Iस्तंभ II
यदि टॉर्च गेंद के समीप हैछाया बहुत बड़ी बनेगी
यदि टॉर्च गेंद से बहुत दूर हैछाया बहुत छोटी बनेगी
यदि गेंद को इस व्यवस्था से हटा दिया जाएपर्दे पर एक चमकदार चकता दिखाई देगा
यदि इस व्यवस्था में गेंद के बाईं ओर दो टॉर्च लिए जाएँपर्दे पर दो छाया दिखाई देगी
ये युग्म क्यों: गेंद के समीप रखी टॉर्च से किरणें तीव्रता से फैलती हुई पड़ती हैं, अत: दीवार पर गेंद की छाया खिंचकर बहुत बड़ी बन जाती है। बहुत दूर से आने वाली किरणें लगभग समांतर होती हैं, इसलिए छाया गेंद के आमाप के बराबर अर्थात छोटी बनती है। गेंद हटा देने पर प्रकाश रोकने वाला कुछ बचता ही नहीं और दीवार पर केवल टॉर्च का चमकदार चकता दिखाई देता है। दो टॉर्च दो भिन्न दिशाओं से प्रकाश भेजती हैं, अत: गेंद प्रत्येक के लिए एक अलग छाया बनाती है — कुल दो छाया।
क्या आप जानते हैं? इसी कारण फ्लडलाइट में खेलते क्रिकेट खिलाड़ी की अनेक छायाएँ दिखाई देती हैं — प्रत्येक प्रकाश-स्तंभ के लिए एक।
प्र7.
माना कि आप चित्र 11.19 में दर्शाए गए वृक्ष को सूचीछिद्र कैमरे की सहायता से देखते हैं। वृक्ष के प्रतिबिंब की पर्दे पर प्राप्त आकृति की रूपरेखा बनाइए।
उत्तर

प्रतिबिंब उसी वृक्ष की उल्टी (व्युत्क्रमित) रूपरेखा होगी — पत्तियों वाला नुकीला शीर्ष नीचे की ओर तथा तना ऊपर की ओर।

वृक्ष (वस्तु) पर्दे पर प्रतिबिंब
सूचीछिद्र कैमरा चित्र को उल्टा कर देता है — वृक्ष का शीर्ष प्रतिबिंब में नीचे और तना ऊपर आ जाता है।
ऐसा क्यों होता है: वृक्ष के शीर्ष से चला प्रकाश सरल रेखा में सूचीछिद्र से होकर नीचे की ओर जाकर पर्दे के निचले भाग पर पड़ता है, और तने के आधार से चला प्रकाश ऊपर की ओर जाकर पर्दे के ऊपरी भाग पर। किरणें सूचीछिद्र पर एक-दूसरे को काट देती हैं, इसलिए पूरा चित्र उल्टा हो जाता है। उसकी आकृति और रंग वही रहते हैं।
संकेत: वृक्ष को अपनी कॉपी में हल्के हाथ से बनाइए, फिर पन्ने को उल्टा करके उसकी नकल उतारिए — वही आकृति सूचीछिद्र कैमरे का प्रतिबिंब है।
प्र8.
कागज के किसी टुकड़े पर अपना नाम लिखिए और इसे समतल दर्पण के सामने इस प्रकार पकड़िए कि कागज दर्पण के समांतर रहे। इसके प्रतिबिंब का आरेख बनाइए। कागज पर लिखे नाम और दर्पण में बने इसके प्रतिबिंब के मध्य आप क्या अंतर देखते हैं? इस अंतर के कारण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर

दर्पण में नाम बाएँ से दाएँ उलटा दिखाई देता है। वर्ण सीधे ही रहते हैं, परंतु पूरा शब्द पीछे की ओर चलता है और प्रत्येक वर्ण पलटा हुआ लगता है — उसे दूसरे सिरे से पढ़ना पड़ता है।

दर्पण ANITA कागज पर लिखा नाम ANITA दर्पण में प्रतिबिंब
लिखे हुए नाम का दर्पण-प्रतिबिंब पार्श्वत: व्युत्क्रमित होता है — बायाँ और दायाँ आपस में बदल जाते हैं, ऊपर-नीचे नहीं।
ऐसा क्यों होता है: यह अंतर पार्श्व उत्क्रमण के कारण होता है। समतल दर्पण कागज के प्रत्येक बिंदु को सीधे उसके सामने की ओर लौटा देता है, अत: कागज का जो भाग आपकी बाईं ओर था वह प्रतिबिंब में दाईं ओर दिखाई देता है। इसी से वर्णों का क्रम और उनकी आकृति बाएँ-दाएँ पलट जाती है। वे उल्टे नहीं होते, क्योंकि दर्पण ऊपर और नीचे को आपस में नहीं बदलता।
यह कीजिए: केवल A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y वर्णों से बना कोई नाम लिखिए — जैसे TOM अथवा MAMA। उसका दर्पण-प्रतिबिंब बिल्कुल वैसा ही पढ़ा जाएगा, क्योंकि इन वर्णों के दोनों पार्श्व सममित होते हैं।
प्र9.
अपने मित्र की सहायता से एक समान स्थान पर अपनी छाया की लंबाई सुबह 9 बजे, दोपहर 12 बजे और दोपहर पश्चात 4 बजे मापिए। अपने प्रेक्षणों को लिखिए — (i) आपकी छाया किस समय सबसे छोटी होती है? (ii) आपके विचार से ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

प्रत्येक बार उसी स्थान पर खड़े होइए, मित्र से छाया के शीर्ष पर निशान लगवाइए और पैरों से निशान तक की दूरी मापिए। प्रेक्षण प्राय: इस प्रकार मिलते हैं —

समयआकाश में सूर्य की स्थितिछाया की लंबाई (नमूना)
सुबह 9 बजेपूर्व दिशा में नीचालगभग 2 m — लंबी, पश्चिम की ओर
दोपहर 12 बजेआकाश में सर्वाधिक ऊँचालगभग 0.5 m — सबसे छोटी
दोपहर पश्चात 4 बजेपश्चिम दिशा में नीचालगभग 2.5 m — लंबी, पूर्व की ओर

(i) छाया दोपहर 12 बजे (मध्याह्न के आस-पास) सबसे छोटी होती है।

(ii) क्योंकि दोपहर में सूर्य आकाश में अपनी सर्वाधिक ऊँची स्थिति में होता है। तब उसका प्रकाश लगभग ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर आता है, अत: शरीर धरती के बहुत छोटे भाग का प्रकाश रोकता है और छाया छोटी बनती है। सुबह और शाम को सूर्य नीचा रहता है, किरणें तिरछी आती हैं और वही शरीर धरती की एक लंबी पट्टी का प्रकाश रोक लेता है — इसलिए छाया लंबी बनती है।

स्वयं जाँचिए: यही माप दिसंबर में और फिर जून में लीजिए। जाड़ों में दोपहर की छाया भी अपेक्षाकृत लंबी मिलेगी, क्योंकि तब सूर्य दोपहर में भी उतना ऊँचा नहीं चढ़ पाता।
प्र10.
निम्नलिखित कथनों के आधार पर सही विकल्प चुनिए — कथन (क) — किसी समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब पार्श्वत: व्युत्क्रमित होता है। कथन (ख) — अंग्रेजी वर्णमाला के वर्ण T और O के समतल दर्पण में बने प्रतिबिंब वैसे ही दिखते हैं जैसे ये वर्ण हैं। (i) दोनों कथन सत्य हैं। (ii) दोनों कथन असत्य हैं। (iii) कथन (क) सत्य है किंतु कथन (ख) असत्य है। (iv) कथन (क) असत्य है किंतु कथन (ख) सत्य है।
उत्तर

सही विकल्प है — (i) दोनों कथन सत्य हैं।

  • कथन (क) सत्य है — समतल दर्पण द्वारा बना प्रत्येक प्रतिबिंब पार्श्वत: व्युत्क्रमित होता है; आपका बायाँ पक्ष प्रतिबिंब में दायाँ दिखता है।
  • कथन (ख) भी सत्य है — वर्ण T और O अपने बीच से खींची गई ऊर्ध्वाधर रेखा के सापेक्ष सममित हैं। उनके बाएँ-दाएँ भाग आपस में बदल देने पर भी वही वर्ण बनता है, अत: दर्पण में उनके प्रतिबिंब वैसे ही दिखाई देते हैं।
ऐसा क्यों होता है: पार्श्व उत्क्रमण सदैव होता है, परंतु वह दिखाई तभी देता है जब आकृति के दोनों पार्श्व भिन्न हों। T और O के दोनों पार्श्व एक जैसे हैं, इसलिए परिवर्तन का कोई चिह्न नहीं बचता। B, F, P, R, S जैसे वर्णों और अंक 3 के पार्श्व असमान हैं, अत: उनके दर्पण-प्रतिबिंब स्पष्ट रूप से उलटे दिखते हैं।
संकेत: अंग्रेजी के जो बड़े वर्ण समतल दर्पण में अपने जैसे ही दिखते हैं, वे हैं — A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y।
प्र11.
मान लीजिए कि आपको चित्र 11.20 में दर्शाई गई आकृति की एक नलिका और दो ऐसे समतल दर्पण दिए गए हैं जिनका व्यास नलिका के व्यास से कम है। क्या इस नलिका का उपयोग परिदर्शी बनाने के लिए किया जा सकता है? यदि आपका उत्तर हाँ है तो नलिका पर वह स्थान अंकित कीजिए जहाँ आप समतल दर्पण लगाएँगे।
उत्तर

हाँ, इस नलिका से परिदर्शी बनाया जा सकता है। नलिका के दोनों मोड़ों (कोनों) पर एक-एक समतल दर्पण लगाइए, प्रत्येक को नलिका के अक्ष से 45° पर झुका हुआ, तथा उनकी चमकीली सतहें नलिका के भीतर की ओर — इस प्रकार कि एक दर्पण दूसरे के सामने पड़े।

दर्पण 1 (45°) दर्पण 2 (45°) वस्तु से आता प्रकाश आँख की ओर
प्रत्येक मोड़ पर 45° पर लगा समतल दर्पण प्रकाश को 90° मोड़ देता है; इस प्रकार प्रकाश पूरी नलिका से होकर आँख तक पहुँच जाता है।
ऐसा क्यों होता है: प्रकाश स्वयं मुड़ नहीं सकता, परंतु दर्पण उसे मोड़ सकता है। वस्तु से आया प्रकाश ऊपरी खुले सिरे से भीतर आकर ऊपरी भुजा में सीधा चलता है। पहला 45° दर्पण उसे ऊर्ध्वाधर भाग में नीचे की ओर भेज देता है और दूसरा 45° दर्पण उसे निचली भुजा से होकर आपकी आँख तक पहुँचा देता है। यह वही द्विगुण परावर्तन है जो चित्र 11.14 के Z आकृति वाले परिदर्शी में होता है, अत: यह नलिका भी परिदर्शी का कार्य करती है — इससे वह वस्तु दिखाई देती है जो सीधे दृश्यमान नहीं है।
संकेत: दोनों दर्पणों का व्यास नलिका के व्यास से कम होना ही चाहिए (जैसा प्रश्न में दिया है) ताकि वे भीतर बैठ सकें, और प्रत्येक ठीक कोने पर तिरछा लगाया जाए — नलिका के सीधे भाग में लगाया गया दर्पण तो प्रकाश को रोक ही देगा।
प्र12.
बहुत अधिक ऊँचाई पर उड़ते हुए पक्षियों की छाया हमें धरती पर दिखाई नहीं देती है। परंतु जब कोई पक्षी धरती के निकट उड़ता है तो उसकी छाया धरती पर दिखाई देती है। विचार कीजिए और बताइए कि ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि पक्षी जितनी अधिक ऊँचाई पर उड़ता है, उसकी छाया उतनी ही बड़ी और धुंधली होती जाती है — इतनी धुंधली कि वह दिखाई ही नहीं देती; जबकि धरती के निकट वही छाया छोटी, गहरी और स्पष्ट बनती है।

पक्षी बहुत ऊँचाई पर → छाया अत्यंत बड़ी और धुंधली → दिखाई नहीं देती
पक्षी धरती के निकट → छाया छोटी, गहरी और स्पष्ट → स्पष्ट दिखाई देती है
ऐसा क्यों होता है: सूर्य बिंदु-स्रोत नहीं, एक बड़ा (विस्तृत) प्रकाश स्रोत है। जब पक्षी धरती से बहुत ऊपर होता है तो सूर्य के विभिन्न भागों से आने वाला प्रकाश पक्षी के छोटे-से शरीर के चारों ओर से फैलकर नीचे की लगभग हर जगह पहुँच जाता है। कोई भी स्थान पूर्ण अंधकार में नहीं रहता, अत: छाया बहुत बड़े क्षेत्र में फैलकर इतनी हल्की पड़ जाती है कि धूप में चमकती धरती पर दिखाई नहीं देती। पक्षी के नीचे आते ही प्रकाश को उसके पीछे फैलने का अवसर नहीं मिलता, इसलिए धरती के एक छोटे भाग तक प्रकाश नहीं पहुँच पाता और हमें गहरी, स्पष्ट छाया दिखाई देती है।
स्वयं जाँचिए: धूप में रखी पुस्तक से कुछ सेंटीमीटर ऊपर अपनी अँगुली रखिए — छाया स्पष्ट बनती है। अब अँगुली को हाथ भर ऊपर ले जाइए — छाया बड़ी और धुंधली होकर लगभग मिट जाती है।
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