प्र1.
लेसर पुंज को दृश्यमान बनाने के लिए एक बीकर अथवा काँच के गिलास में जल भरकर उसमें कुछ बूँद दूध मिलाइए। अब एक लेसर किरण पुंज को इसमें से होकर पार जाने दीजिए। आप क्या अवलोकन करते हैं? क्या आप देखते हैं कि जल के भीतर लेसर प्रकाश पुंज एक सरल पथ का अनुगमन करता है?
उत्तर
दूध मिले जल के भीतर लेसर पुंज एक पतली, बिल्कुल सीधी लाल रेखा के रूप में दिखाई देता है, जो बीकर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाती है। हाँ — जल के भीतर भी प्रकाश पुंज सरल पथ का ही अनुगमन करता है।
ऐसा क्यों होता है: स्वच्छ जल पारदर्शी है, अत: उसमें से गुजरता पुंज बगल से दिखाई नहीं देता। दूध के अति सूक्ष्म वसा-कण प्रकाश का कुछ भाग चारों ओर प्रकीर्णित कर देते हैं और यही प्रकीर्णित प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचकर पुंज का पथ दिखा देता है। यह पथ एक सरल रेखा ही होता है — अर्थात जल में भी प्रकाश वायु की भाँति सीधा ही गमन करता है।
सावधानी: केवल निम्न-क्षमता लेसर संकेतक का, शिक्षक के निर्देशन में ही प्रयोग कीजिए और लेसर-पुंज कभी किसी की आँखों पर न डालें।
क्या आप जानते हैं? प्रकाश को मोड़ा भी जा सकता है — प्रकाशिक तंतुओं (ऑप्टिकल फाइबर) के भीतर, जिनसे दूरभाष और इंटरनेट के संकेत भेजे जाते हैं। इस प्रक्रम के विषय में आप उच्च कक्षाओं में सीखेंगे।