प्र1.
अब पाइप को मोड़ दीजिए और मोमबत्ती की लौ को देखने का प्रयास कीजिए (चित्र 11.5 ख)। क्या आप अब भी मोमबत्ती की लौ को देख पाते हैं?
उत्तर
नहीं, मुड़े हुए पाइप से मोमबत्ती की लौ दिखाई नहीं देती — यद्यपि मोमबत्ती उसी स्थान पर जल रही है और पाइप का सिरा भी उसी की ओर है।
सीधा पाइप → लौ दिखाई देती है
मुड़ा हुआ पाइप → लौ दिखाई नहीं देती
मुड़ा हुआ पाइप → लौ दिखाई नहीं देती
ऐसा क्यों होता है: लौ से आने वाला प्रकाश केवल सरल रेखा में चलता है। सीधे पाइप में लौ से आपकी आँख तक एक खुला सीधा मार्ग रहता है। पाइप मोड़ने पर यह सीधा मार्ग पाइप की दीवार से जा टकराता है; प्रकाश भीतरी दीवार पर पड़कर वहीं रुक जाता है और आँख तक कुछ भी नहीं पहुँचता।
संकेत: इसी कारण परिदर्शी (अनुभाग 11.8.1) के मोड़ों पर दर्पण लगाने पड़ते हैं। प्रकाश स्वयं मुड़ता नहीं — उसे दर्पण से मोड़ना पड़ता है।