माचिस की किसी एक डिब्बी को थोड़ा-सा एक ओर अथवा ऊपर या नीचे की ओर विस्थापित कीजिए। क्या आप अब भी प्रकाश के चमकदार बिंदु को पर्दे पर प्राप्त कर पाते हैं?
उत्तर
नहीं। जैसे ही तीनों छिद्रों में से कोई एक छिद्र सीधी रेखा से हट जाता है, पर्दे पर बना चमकदार बिंदु लुप्त हो जाता है।
टॉर्च का प्रकाश पर्दे तक तभी पहुँचता है जब तीनों छिद्र एक ही सरल रेखा में हों।
ऐसा क्यों होता है: टॉर्च से निकला प्रकाश केवल सीधा ही जा सकता है। जब तीनों छिद्र एक सीध में होते हैं तब यह सीधा मार्ग खुला रहता है और प्रकाश पर्दे तक पहुँच जाता है। किसी एक डिब्बी को खिसकाते ही उसका छिद्र इस मार्ग से बाहर हो जाता है, उस डिब्बी का गत्ता प्रकाश को रोक लेता है और पर्दा अंधकारमय हो जाता है। प्रकाश डिब्बी के चारों ओर मुड़कर अगले छिद्र तक नहीं जा सकता।
स्वयं जाँचिए: डिब्बी को बहुत धीरे-धीरे वापस सीध में लाइए। ठीक उसी क्षण चमकदार बिंदु पुन: प्रकट हो जाता है जब टॉर्च का दीप और तीनों छिद्र एक रेखा में आ जाते हैं।
प्र2.
क्या हम इस तथ्य की जाँच किसी अन्य विधि से भी कर सकते हैं?
उत्तर
हाँ। प्रकाश के सरल रेखा में गमन करने की जाँच अनेक सरल विधियों से की जा सकती है —
सीधा एवं मुड़ा हुआ पाइप (क्रियाकलाप 11.2) — सीधे पाइप से मोमबत्ती की लौ दिखाई देती है, पाइप मोड़ते ही लुप्त हो जाती है।
दूध मिले जल में लेसर पुंज (गहन चिंतन, पृष्ठ 156) — बीकर के भीतर पुंज एक बिल्कुल सीधी चमकीली रेखा के रूप में दिखाई देता है।
छाया — प्रत्येक वस्तु की छाया ठीक उसके पीछे, उसी की आकृति की बनती है — वहीं जहाँ सीधी किरणें रुक जाती हैं।
सूर्य की किरणें — किसी अँधेरे कमरे में छोटे छिद्र से अथवा कुहरे में वृक्षों की पत्तियों के बीच से आता प्रकाश सीधी किरण-पुंजों के रूप में दिखता है।
यह कीजिए: कागज को लपेटकर बनी नली से किसी बल्ब को देखिए। नली को थोड़ा-सा भी मोड़ते ही बल्ब दिखाई देना बंद हो जाता है — केवल एक कागज से मिला एक और प्रमाण।
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