कुतूहल अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या चंद्रमा वास्तव में स्वयं अपना प्रकाश उत्पन्न करता है? क्या चंद्रमा का प्रकाश सूर्य का परावर्तित प्रकाश ही है?
उत्तर

नहीं, चंद्रमा स्वयं अपना कोई प्रकाश उत्पन्न नहीं करता। चाँदनी वास्तव में सूर्य का वही प्रकाश है जिसे चंद्रमा परावर्तित करके हम तक भेजता है।

चंद्रमा एक अदीप्त पिंड है। सूर्य का प्रकाश चंद्रमा की चट्टानी सतह पर पड़ता है और उसका कुछ भाग परावर्तित होकर पृथ्वी तक पहुँचता है। इसी कारण रात्रि में चंद्रमा चमकता हुआ दिखाई देता है।

ऐसा क्यों होता है: प्रकाश केवल वही पिंड उत्सर्जित कर सकता है जो अत्यधिक तप्त हो अथवा जिसे किसी विधि से दीप्त किया गया हो — जैसे सूर्य, तारे या जलती हुई लौ। चंद्रमा ठंडी चट्टान है, अत: वह प्रकाश बना नहीं सकता; वह केवल प्राप्त प्रकाश को आगे भेज सकता है।
क्या आप जानते हैं? यही बात ग्रहों पर भी लागू होती है। मंगल और शुक्र रात्रि के आकाश में चमकीले तारों जैसे दिखते हैं, परंतु वे भी सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके ही चमकते हैं। यह आपने कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय ‘पृथ्वी से परे’ में पढ़ा था।
प्र2.
कौन-से पिंड स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित करते हैं?
उत्तर

जो पिंड स्वयं अपना प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, वे दीप्त पिंड कहलाते हैं।

प्राकृतिक स्रोतकृत्रिम (मानव-निर्मित) स्रोत
सूर्य, तारे, तड़ितजलती हुई मोमबत्ती, दीपक, लालटेन
अग्नि, तप्त लावाविद्युत बल्ब, ट्यूब लाइट, एल.ई.डी. दीप
जुगनू तथा कुछ समुद्री जंतुटॉर्च, मोबाइल की स्क्रीन, गैस लैंप

इनके अतिरिक्त शेष सभी वस्तुएँ — चंद्रमा, दर्पण, मेज, पुस्तक, मंगल, शुक्र — अदीप्त पिंड हैं। ये हमें इसलिए दिखाई देती हैं क्योंकि किसी दीप्त पिंड का प्रकाश इन पर पड़कर हमारी आँखों तक पहुँचता है।

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