कुतूहल अध्याय 6 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
11 वर्षीय लड़के रमेश के चेहरे पर कुछ लाल दाने (मुँहासे) निकले। उसकी माँ ने उसे बताया कि इसका कारण उसके शरीर में होने वाले जैविक परिवर्तन हैं। (i) उसके चेहरे पर इन मुँहासों के होने के संभावित कारण क्या हो सकते हैं? (ii) इन मुँहासों से कुछ राहत पाने के लिए वह क्या कर सकता है?
उत्तर

(i) संभावित कारण। रमेश 11 वर्ष का है, अर्थात् वह किशोरावस्था में प्रवेश कर चुका है। इस अवस्था में त्वचा से तैलीय स्रावों की मात्रा बढ़ जाती है। यह अतिरिक्त तेल, मृत त्वचा और धूल के साथ मिलकर त्वचा के छिद्रों को अवरुद्ध कर देता है। अवरुद्ध छिद्रों में संक्रमण हो जाता है और छोटे लाल मुँहासे निकल आते हैं — प्रायः चेहरे पर, जहाँ तैल ग्रंथियाँ अधिक होती हैं। इस त्वचा-संबंधी स्थिति को ऐक्नी कहते हैं; मुँहासे उसी की अभिव्यक्ति हैं।

त्वचा से अधिक तैलीय स्राव

त्वचा के छिद्र अवरुद्ध

अवरुद्ध छिद्र में संक्रमण

छोटा लाल मुँहासा — इस स्थिति को ऐक्नी कहते हैं

(ii) रमेश क्या कर सकता है।

  • दिन में दो-तीन बार स्वच्छ जल और हल्के साबुन या फेस-वॉश से चेहरा धीरे-धीरे धोए, जिससे अतिरिक्त तेल हट जाए।
  • मुँहासों को दबाए, नोचे या फोड़े नहीं। दबाने से संक्रमण गहरा हो जाता है और काले दाग या निशान रह जाते हैं।
  • गंदे हाथों से चेहरा न छुए; बालों को स्वच्छ रखे और चेहरे से दूर रखे; अपना ही स्वच्छ तौलिया और तकिये का गिलाफ प्रयोग करे।
  • चेहरे पर भारी तेल, गाढ़ी क्रीम और प्रसाधन-सामग्री से बचे — इनसे छिद्र और अधिक अवरुद्ध होते हैं।
  • फल-सब्जियों से युक्त संतुलित आहार ले, पर्याप्त जल पिए, अच्छी नींद ले और व्यायाम करे।
  • यदि मुँहासे अधिक हों, दर्द करें या फैल रहे हों तो विज्ञापित उपायों के स्थान पर चिकित्सक (त्वचा रोग विशेषज्ञ) से परामर्श करे।
उसकी माँ सही क्यों हैं: इस आयु में मुँहासे 'गंदी आदतों' या किसी एक खाद्य पदार्थ के कारण नहीं होते। ये किशोरावस्था के जैविक परिवर्तनों का सामान्य और अस्थायी भाग हैं, जो वयस्क होने पर स्वयं कम हो जाते हैं। रमेश को संकोच करने की आवश्यकता नहीं है।
प्र2.
निम्नलिखित में से कौन-सा खाद्य समूह किशोरों के लिए अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त विकल्प होगा और क्यों? (क) [बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पिज्जा, डोनट, बन और चिप्स] (ख) [रोटी, दाल, सब्जी, चावल, सलाद, दही और पापड़ वाली थाली]
उत्तर

खाद्य समूह (ख) — संतुलित थाली — अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त विकल्प है।

समूहइसमें क्या हैशरीर को क्या मिलता है
(क) बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पिज्जा, डोनट, बन, चिप्स, सॉसमैदा, अत्यधिक वसा एवं तेल, अतिरिक्त नमक और शर्कराऊर्जा तो पर्याप्त, परंतु प्रोटीन, लौह तत्त्व, कैल्सियम, विटामिन एवं रेशे बहुत कम — 'खाली कैलोरी'
(ख) रोटी, चावल, दाल, सब्जी, सलाद, दही, पापड़अनाज, दालें, सब्जियाँ, दुग्ध पदार्थऊर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेट, वृद्धि और बल के लिए प्रोटीन, अस्थियों के लिए कैल्सियम, रक्त के लिए लौह तत्त्व, तथा विटामिन, खनिज एवं रेशे — सब एक ही भोजन में

(ख) किशोरों के लिए बेहतर क्यों: किशोरावस्था द्रुत वृद्धि और विकास की अवधि है। इस समय शरीर अस्थि, पेशी और रक्त का निर्माण कर रहा होता है, अतः उसे कार्बोहाइड्रेट और वसा के साथ-साथ प्रोटीन, कैल्सियम, लौह तत्त्व, विटामिन और खनिज भी चाहिए। थाली ये सब उचित अनुपात में एक साथ देती है। समूह (क) मुख्यतः वसा, मैदा और नमक देता है; ऐसा भोजन बार-बार खाने से अनावश्यक भार बढ़ता है, अस्थियों एवं रक्त का स्वास्थ्य बिगड़ता है, कब्ज होता है और आगे चलकर अन्य रोग भी हो सकते हैं।

सुझाव: फास्ट फूड को सदा के लिए वर्जित करने की आवश्यकता नहीं — स्वास्थ्य प्रतिदिन की थाली से तय होता है। इसे कभी-कभार तक सीमित रखिए और दैनिक भोजन को (ख) जैसी थाली बनाइए।
प्र3.
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों को सही रूप में लिखिए— (i) किशोरवय लड़कियों में 28–30 दिनों के अन्तराल पर होने वाला रक्त-स्राव सिकर्ममाध है। (ii) किशोरवय लड़कों की आवाज में रूक्षता बढ़े हुए त्रकवायं के कारण होती है। (iii) द्वितीयक लैंगिक लक्षण वे प्राकृतिक संकेत हैं जो यह इंगित करते हैं कि शरीर वयस्कता की तैयारी कर रहा है और ये रंभवयौना को चिह्नित करते हैं। (iv) हमें लल्कोएहॉ और ग्सड्रु को 'ना' कहना चाहिए क्योंकि ये व्यसनकारी हैं।
उत्तर
अव्यवस्थित शब्दसही शब्दअर्थ
(i)सिकर्ममाधमासिक धर्मआर्तव चक्र का वह चरण जिसमें शरीर से रक्त-स्राव होता है; यह तीन से सात दिन तक रहता है।
(ii)त्रकवायंवाक्-यंत्रगले में स्थित वह संरचना जो बोलने में सहायता करती है। लड़कों में इसकी वृद्धि से आवाज भारी होती है और कंठमणि दिखती है।
(iii)रंभवयौनायौवनारंभवह अवस्था जिसमें किशोर के शरीर में बाह्य और आंतरिक परिवर्तन होकर वह जनन करने में सक्षम वयस्क बनता है।
(iv)लल्कोएहॉ, ग्सड्रुएल्कोहॉल, ड्रग्सव्यसनकारी पदार्थ — एक बार सेवन आरंभ करने पर बार-बार लेने की तीव्र इच्छा उत्पन्न हो जाती है।

पूर्ण वाक्य इस प्रकार होंगे —

  1. किशोरवय लड़कियों में 28–30 दिनों के अन्तराल पर होने वाला रक्त-स्राव मासिक धर्म है।
  2. किशोरवय लड़कों की आवाज में रूक्षता बढ़े हुए वाक्-यंत्र के कारण होती है।
  3. द्वितीयक लैंगिक लक्षण वे प्राकृतिक संकेत हैं जो यह इंगित करते हैं कि शरीर वयस्कता की तैयारी कर रहा है और ये यौवनारंभ को चिह्नित करते हैं।
  4. हमें एल्कोहॉल और ड्रग्स को 'ना' कहना चाहिए क्योंकि ये व्यसनकारी हैं।
प्र4.
शालू ने अपनी सहपाठी से कहा “किशोरावस्था में मात्र शारीरिक परिवर्तन होते हैं जैसे लंबा होना या शरीर पर बालों का निकलना।” क्या वह सही है? आप किशोरावस्था के इस वर्णन में क्या परिवर्तन करेंगें?
उत्तर

नहीं, शालू सही नहीं है। उसके कथन को गलत बनाने वाला शब्द है 'मात्र'। लंबा होना और शरीर पर बालों का आना किशोरावस्था के परिवर्तन तो हैं, परंतु वे इसका केवल एक भाग हैं।

संशोधित वर्णन: 'किशोरावस्था में शारीरिक परिवर्तन होते हैं, जैसे— लंबाई का बढ़ना, भार और बल में वृद्धि, आवाज में परिवर्तन, चेहरे पर मुँहासे और शरीर पर बालों का आना। इनके साथ आंतरिक परिवर्तन भी होते हैं — जनन में सम्मिलित संरचनाओं की परिपक्वता तथा लड़कियों में आर्तव चक्र का आरंभ — और संवेगात्मक तथा व्यवहारगत परिवर्तन भी, जैसे प्रबल संवेग, मनोदशा में बारंबार परिवर्तन और संवेदनशीलता में वृद्धि। ये सभी परिवर्तन मुख्यतः हार्मोन के कारण होते हैं और इनका समय तथा मात्रा हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है।'

परिवर्तन का प्रकारअध्याय से उदाहरण
शारीरिक (सरलता से दिखने वाले)लंबाई का बढ़ना; लड़कों में भार में वृद्धि, कंधों व सीने का चौड़ा होना; आवाज में परिवर्तन और कंठमणि; ऐक्नी एवं मुँहासे; बगल, जघन क्षेत्र और चेहरे पर बाल; लड़कियों में स्तनों का विकास
आंतरिक (दिखाई न देने वाले)जनन में सम्मिलित विभिन्न संरचनाओं की परिपक्वता; लड़कियों में प्राय: 28–30 दिन पर होने वाले आर्तव चक्र का आरंभ
संवेगात्मक और व्यवहारगतबाल्यावस्था की तुलना में प्रबल संवेग, मनोदशा में बारंबार परिवर्तन, संवेदनशीलता में वृद्धि, सामाजिक पहल में भागीदारी, नए क्षेत्रों में गहरी रुचि
यह महत्वपूर्ण क्यों है: यदि हम किशोरावस्था को 'मात्र शारीरिक' कहें तो जो किशोर उलझन या उदासी अनुभव कर रहा है, वह सोचेगा कि उसमें कोई कमी है। यह जानना कि संवेगात्मक परिवर्तन भी उतने ही सामान्य हैं, सहायता माँगना बहुत सरल बना देता है।
प्र5.
कक्षा में चर्चा के समय कुछ विद्यार्थियों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की। आप किन प्रश्नों को पूछकर इन बिंदुओं के औचित्य को सिद्ध करेंगे। (i) “किशोरवयों को व्यवहारगत परिवर्तनों के संबंध में चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती।” (ii) “यदि कोई हानिकारक पदार्थ का एक बार सेवन कर लेता है तो वह इच्छानुसार इसका सेवन करना कभी भी बंद कर सकता है।”
उत्तर

किसी कथन की वैज्ञानिक जाँच के लिए ऐसे प्रश्न पूछिए जो उसके पीछे के प्रमाण को परखें।

(i) “किशोरवयों को व्यवहारगत परिवर्तनों के संबंध में चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती।” पूछे जाने वाले प्रश्न —

  • क्या किशोरावस्था में संवेग बाल्यावस्था की तुलना में अधिक प्रबल होते हैं? इसका कारण क्या है?
  • क्या हमारे संवेग हमारे व्यवहार और हमारे चयनों को प्रभावित करते हैं?
  • यदि कोई मनोदशा के उतार-चढ़ाव, चिड़चिड़ेपन या लगातार बनी उदासी की उपेक्षा करे तो उसकी पढ़ाई, मित्रता और स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
  • क्या 'चिंता न करना' और 'समझना ही नहीं' एक ही बात है? क्या इन परिवर्तनों को समझकर माता-पिता एवं शिक्षकों से मार्गदर्शन लेना बेहतर नहीं होगा?
  • अध्याय यह क्यों कहता है कि संवेग किस प्रकार व्यवहार को प्रभावित करते हैं, यह समझना बेहतर विकल्प चुनने में सहायक होता है?

इन प्रश्नों के उत्तर क्या दर्शाते हैं: किशोरों को इन परिवर्तनों से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं — ये सामान्य हैं — परंतु इन्हें समझना और सँभालना आवश्यक है। अतः यह बिंदु केवल आंशिक रूप से सही है।

(ii) “यदि कोई हानिकारक पदार्थ का एक बार सेवन कर लेता है तो वह इच्छानुसार इसका सेवन करना कभी भी बंद कर सकता है।” पूछे जाने वाले प्रश्न —

  • व्यसनकारी शब्द का अर्थ क्या है?
  • तंबाकू, एल्कोहॉल या ड्रग्स का सेवन करने वालों में बार-बार इसे लेने की तीव्र इच्छा क्यों उत्पन्न हो जाती है?
  • यदि छोड़ना इतना ही सरल है तो लोगों को छोड़ने के लिए परामर्श, चिकित्सकीय सलाह तथा परिवार और मित्रों के सहयोग की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
  • सरकार ने नशा मुक्त भारत अभियान और राष्ट्रीय नशा मुक्ति सहायता सेवा 14446 क्यों आरंभ की है?
  • आज जो व्यक्ति नशे का आदी है, उसने इसकी शुरुआत संभवतः कैसे की होगी?

इन प्रश्नों के उत्तर क्या दर्शाते हैं: यह बिंदु गलत है। ये पदार्थ व्यसनकारी हैं; 'केवल एक बार' से ही अधिकांश लत आरंभ होती है। इसीलिए हमें पहली बार और हर बार 'ना' कहना चाहिए।

प्र6.
किशोर कभी-कभी मनोदशा में निरंतर परिवर्तनों का अनुभव करते हैं। किसी दिन वे स्वयं को अत्यधिक ऊर्जावान और प्रसन्न अनुभव करते हैं जबकि किसी अन्य दिन वे अत्यंत उदासीनता का अनुभव करते हैं। अन्य कौन-से व्यवहारगत परिवर्तन इस आयु से संबंधित हैं?
उत्तर

मनोदशा में बारंबार परिवर्तन के अतिरिक्त किशोरों में सामान्यतः निम्नलिखित व्यवहारगत परिवर्तन भी दिखाई देते हैं। ये सभी सामान्य हैं और इस आयु के प्रबल संवेगों से जुड़े हैं।

  • बाल्यावस्था की तुलना में प्रबल संवेग — प्रसन्नता, क्रोध, उत्तेजना और निराशा, सभी अधिक तीव्रता से अनुभव होते हैं।
  • संवेदनशीलता में वृद्धि — बात जल्दी बुरी लगना; लंबाई, आवाज या स्वरूप पर की गई टिप्पणी दिल पर ले लेना।
  • अपने स्वरूप के प्रति सजगता — सहपाठियों से तुलना; मुँहासों, लंबाई या बदलती आवाज को लेकर संकोच।
  • साथियों के प्रति आकर्षण और उनके व्यवहार का अनुसरण — मित्रों की राय बहुत महत्वपूर्ण लगने लगती है, जिससे साथियों का दबाव भी बनता है।
  • स्वतंत्रता और एकांत की इच्छा — स्वयं निर्णय लेने की चाह, बड़ों से बहस, अकेले या मित्रों के साथ अधिक समय बिताना।
  • बढ़ी हुई जिज्ञासा और उत्तेजना — हर वस्तु के प्रति नया दृष्टिकोण, नई चीजें आजमाने की इच्छा (जिसका उपयोग समझदारी से करना चाहिए)।
  • नए क्षेत्रों में गहरी रुचि — संगीत, नृत्य, खेल, कला, विज्ञान; प्रबल पसंद-नापसंद।
  • दया-भाव और सामाजिक सजगता — वंचितों और अभावग्रस्त व्यक्तियों की सहायता हेतु सामाजिक पहल में सम्मिलित होना।
  • अधिक ऑनलाइन सहभागिता — सोशल मीडिया और संदेशों पर मित्रों के साथ अधिक समय बिताना।
ऐसा क्यों होता है: कुछ हार्मोन मनोदशा और व्यवहार को प्रभावित करते हैं, और साथ ही किशोर को नए अनुभव तथा नई अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं दोनों के कारण संवेग प्रबल और व्यवहार बाल्यावस्था की तुलना में अधिक परिवर्तनशील हो जाता है।
सुझाव: इन प्रबल भावनाओं को सही दिशा दीजिए — संगीत, नृत्य, खेल, कला, सामाजिक कार्य और शारीरिक गतिविधि सहायक होते हैं। यदि उदासी कई दिनों तक बनी रहे तो किसी विश्वसनीय बड़े से बात कीजिए; यह दुर्बलता नहीं, समझदारी है।
प्र7.
शौचालय का प्रयोग करते समय मोहिनी ने ध्यान दिया कि प्रयोग किए गए सेनीटरी पैड कूड़ेदान के आस-पास बिखरे पड़ें हैं। वह असहज हो गयी और उसने इस विषय में अपनी सहेलियों को बताया। उन्होंने मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता और स्वच्छता संबंधी अन्य अच्छी आदतों पर चर्चा की। आप अपने साथियों को मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता और स्वच्छता संबंधी आदतों के विषय में क्या सुझाव देंगे?
उत्तर

क. मासिक धर्म के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता

  • स्वच्छ सेनीटरी पैड अथवा इसी उद्देश्य से बने पुनः प्रयोज्य वस्त्र के पैड का उपयोग कीजिए। इसे प्रत्येक चार से छह घंटे में, और आवश्यकता होने पर उससे भी पहले, बदलिए।
  • पैड बदलने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोइए
  • जननांग क्षेत्र को दिन में कम से कम दो बार स्वच्छ जल से धोइए और प्रतिदिन स्नान कीजिए। भली-भाँति सुखाकर स्वच्छ सूती अंतःवस्त्र पहनिए।
  • वस्त्र के पैड का उपयोग करती हैं तो उन्हें साबुन-पानी से अच्छी तरह धोकर धूप में पूरी तरह सुखाइए, और स्वच्छ, सूखे स्थान पर रखिए।
  • लौह तत्त्व से भरपूर आहार लीजिए, पर्याप्त जल पीजिए तथा विद्यालय, खेल और सामान्य कार्य यथावत् जारी रखिए। अत्यधिक दर्द या असामान्य रूप से अधिक रक्त-स्राव होने पर चिकित्सक से मिलिए।

ख. स्वच्छता संबंधी आदतें — जो कमी मोहिनी ने देखी

  • प्रयोग किए गए पैड को अखबार या कागज में लपेटकर ढके हुए कूड़ेदान के भीतर डालिए — कूड़ेदान के पास, फर्श पर या खुले में कभी नहीं।
  • पैड को शौचालय में कभी न बहाइए; इससे नालियाँ अवरुद्ध हो जाती हैं।
  • उपयोग के बाद शौचालय को स्वच्छ रखिए और ठीक से फ्लश कीजिए, ताकि अगला व्यक्ति उसे स्वच्छ पाए।
  • विद्यालय से आग्रह कीजिए कि छात्राओं के शौचालय में ढका हुआ कूड़ेदान, जल, साबुन और यदि संभव हो तो पैड वितरण मशीन रखी जाए और कूड़ेदान नियमित रूप से खाली किए जाएँ।
  • जहाँ उपलब्ध हों वहाँ जैवनिम्नीकरणीय सेनीटरी पैड को प्राथमिकता दीजिए; ये पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

ग. साथ में आवश्यक दृष्टिकोण

  • मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और अच्छे जनन स्वास्थ्य के संकेतों में से एक है। इस पर सहजता से बात कीजिए — सहेलियों, माँ, बड़ी बहन या शिक्षिका से।
  • ऋतुस्रावक लड़कियों को परिवार से अलग रखने जैसे मिथकों और वर्जनाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इनका पालन न कीजिए और इन्हें फैलाइए भी नहीं।
  • मासिक धर्म या सेनीटरी पैड को लेकर किसी का उपहास न कीजिए।
उचित निपटान क्यों आवश्यक है: खुले में पड़ा प्रयुक्त पैड उस शौचालय का उपयोग करने वाले सभी लोगों के लिए, विशेषकर सफाईकर्मियों के लिए, स्वास्थ्य का खतरा है और अन्य लड़कियों को विद्यालय में असहज एवं लज्जित अनुभव कराता है। सही निपटान सामुदायिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वच्छता दोनों की रक्षा करता है।
क्या आप जानते हैं? सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) ग्रामीण क्षेत्रों की किशोरियों को नि:शुल्क या रियायती दामों पर पैड देती है, सुविधा पहल जन औषधि केंद्रों से सस्ते जैवनिम्नीकरणीय पैड उपलब्ध कराती है, तथा कर्नाटक ('शुचि योजना'), तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों की अपनी नि:शुल्क पैड योजनाएँ हैं।
प्र8.
मैरी और मनोज सहपाठी और अच्छे मित्र थे। 11 वर्ष की होने पर मैरी की गर्दन में सामने की ओर एक छोटा सा उभार विकसित हुआ। वह चिकित्सक के पास गई। उन्होंने उसे औषधि दी और आयोडीनयुक्त नमक खाने को कहा। 12 वर्ष का होने पर उसी प्रकार का उभार मनोज की गर्दन के पास विकसित हुआ। तथापि चिकित्सक ने उसे बताया कि यह उसके बड़े होने का एक लक्षण है। आपके अनुसार मैरी और मनोज को अलग-अलग परामर्श देने का संभावित कारण क्या है?
उत्तर

क्योंकि स्थान एक ही होने पर भी दोनों उभारों के कारण पूर्णतः भिन्न थे — एक रोग था और दूसरा किशोरावस्था का सामान्य परिवर्तन।

मैरी (11 वर्ष)मनोज (12 वर्ष)
उभार क्या हैगर्दन में थायरॉइड ग्रंथि का बढ़ जाना — जिसे घेंघा (गॉयटर) कहते हैंबढ़ता हुआ वाक्-यंत्र, जो कंठमणि (एडम्स एप्पल) के रूप में दिखता है
कारणआहार में आयोडीन की कमी, जिससे ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती और फूल जाती हैयौवनारंभ के हार्मोन, जिनसे वाक्-यंत्र बढ़ता है — यह एक सामान्य द्वितीयक लैंगिक विशेषता है
क्या यह विकार है?हाँ — इसका उपचार आवश्यक हैनहीं — यह बड़े होने का स्वाभाविक भाग है
चिकित्सक का परामर्शऔषधि तथा आयोडीनयुक्त नमक और आयोडीन-युक्त आहार (मछली, दूध, दही)कोई उपचार नहीं — केवल यह आश्वासन कि यह बड़े होने का लक्षण है। उसकी आवाज भी भारी होगी।
चिकित्सक दोनों में अंतर कैसे कर पाए: कंठमणि किशोरवय लड़कों में आवाज के परिवर्तन के साथ आती है, निगलते समय ऊपर-नीचे होती है और उससे कोई अन्य लक्षण नहीं होता। घेंघा थायरॉइड ग्रंथि की कोमल सूजन है और उसके साथ प्रायः थकान, भार में परिवर्तन तथा अन्य लक्षण भी होते हैं; अतः चिकित्सक जाँच करके और आवश्यक होने पर रक्त परीक्षण कराकर निर्णय लेते हैं।
सुझाव: घर में आयोडीनयुक्त नमक का उपयोग घेंघा से बचने का सबसे सरल उपाय है। नमक पकाने के अंत में डालिए और उसे बंद डिब्बे में रखिए, जिससे आयोडीन नष्ट न हो।
प्र9.
किशोरावस्था के दौरान लड़कों और लड़कियों में कुछ शारीरिक परिवर्तन होते हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं — (i) आवाज में परिवर्तन (ii) स्तनों का विकास (iii) मूँछों में वृद्धि (iv) चेहरे पर बालों की वृद्धि (v) चेहरे पर मुँहासे (vi) जघन क्षेत्र में बालों की वृद्धि (vii) बगल में बालों की वृद्धि — इन परिवर्तनों को नीचे दी गई तालिका में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर
किशोरावस्था के दौरान शारीरिक परिवर्तन
केवल लड़कों में देखे गएकेवल लड़कियों में देखे गएलड़कों और लड़कियों दोनों में देखे गए
(i) आवाज में परिवर्तन(ii) स्तनों का विकास(v) चेहरे पर मुँहासे
(iii) मूँछों में वृद्धि(vi) जघन क्षेत्र में बालों की वृद्धि
(iv) चेहरे पर बालों की वृद्धि(vii) बगल में बालों की वृद्धि
यह वर्गीकरण ऐसा क्यों है: मूँछें, चेहरे के अन्य बाल और आवाज का स्पष्ट परिवर्तन लड़कों में होते हैं तथा स्तनों का विकास लड़कियों में — ये द्वितीयक लैंगिक विशेषताएँ हैं, जो स्त्री और पुरुष में अंतर करने में सहायक होती हैं। ऐक्नी तथा बगल और जघन क्षेत्र में बालों की वृद्धि दोनों में हार्मोन के कारण होती है, अतः ये दोनों में सामान्य हैं।
ध्यान देने योग्य बात: किशोरवय लड़कियों में भी वाक्-यंत्र विकसित होता है, परंतु वह लड़कों जितना बड़ा नहीं होता, जिससे उनकी आवाज में बहुत कम परिवर्तन होता है। आवाज की स्पष्ट रूक्षता तथा कंठमणि लड़कों में दिखती है — इसीलिए 'आवाज में परिवर्तन' को लड़कों के स्तंभ में रखा गया है।
प्र10.
किशोरों के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली जीने के सुझावों का उल्लेख करते हुए एक पोस्टर बनाइए।
उत्तर

पोस्टर कैसे बनाएँ। एक चार्ट पेपर लीजिए, ऊपर मोटे अक्षरों में एक शीर्षक लिखिए, शीट को पाँच-छह खानों में बाँटिए और प्रत्येक खाने में एक चित्र तथा एक छोटा सुझाव दीजिए। अक्षर इतने बड़े हों कि दूर से पढ़े जा सकें, और अंत में सहायता का स्रोत अवश्य लिखिए।

नमूना पोस्टर:

स्वस्थ किशोरावस्था हर किशोर के लिए छह आदतें 1. संतुलित आहार लीजिए रोटी, दाल, दूध, दही, हरी सब्जी, फल, मिलेट। जंक फूड कम कीजिए। 2. स्वच्छ रहिए प्रतिदिन स्नान, हाथ धोना, बगल व जघन क्षेत्र की तथा मासिक धर्म की स्वच्छता। 3. प्रतिदिन सक्रिय रहिए खेल, साइकिल, रस्सी कूद, योग — लगभग एक घंटा। 8–9 घंटे की नींद लीजिए। 4. नशे को 'ना' कहिए तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, एल्कोहॉल, ड्रग्स — पहली बार और हर बार। 5. ऑनलाइन सुरक्षित रहिए पोस्ट से पहले सोचिए। निजता बचाइए। उत्पीड़न की सूचना दीजिए। 6. बात कीजिए, छिपाइए नहीं चिंताएँ माता-पिता व शिक्षकों से साझा कीजिए। सेवा 14446।
किशोरों के लिए स्वस्थ जीवनशैली के छह सुझावों वाला पोस्टर। इसे चार्ट पेपर पर उतारिए और अपने चित्र जोड़िए।
सुझाव: पोस्टर के नीचे अपनी भाषा में एक पंक्ति अवश्य लिखिए — जैसे, 'हर शरीर अपनी गति से बदलता है। यह पूर्णतः सामान्य है।' यही वह वाक्य है जिसे आपके सहपाठियों को सबसे अधिक पढ़ने की आवश्यकता है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ