कुतूहल अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मुझे आश्चर्य होता है कि आग से गरमी हम तक कैसे पहुँचती है?
उत्तर

आग की ऊष्मा हम तक विकिरण द्वारा पहुँचती है — वह गरम वस्तु (आग) से सीधे हम तक आती है और इस स्थानांतरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।

प्रक्रियाऊष्मा कैसे जाती हैमाध्यम चाहिए?यहाँ उदाहरण
चालनकण अपने पड़ोसी कण को ऊष्मा देता है; कण अपने स्थान पर स्थिर रहते हैंहाँलौ → धातु का पात्र
संवहनगरम कण स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैंहाँआग से ऊपर उठता धुआँ और गरम वायु
विकिरणऊष्मा गरम वस्तु से सीधे हम तक आती हैनहींआग के सामने बैठे पेमा और पालदेन को लगती गरमी
यह विकिरण ही क्यों है: आग की गरम वायु सीधी ऊपर उठ जाती है, अतः संवहन गरमी को बगल में बैठे बच्चों के चेहरे तक नहीं ला सकता। वे आग को छू भी नहीं रहे, अतः चालन भी नहीं। गरमी बीच के अंतराल को पार करके सीधे उन तक पहुँचती है — यही विकिरण है। सूर्य की ऊष्मा भी इसी प्रकार पृथ्वी तक आती है, वह भी वहाँ से जहाँ कोई कण ही नहीं है।
प्र2.
आपने अवश्य देखा होगा कि जब कोई गरम पात्र आग से दूर हटा कर रखा जाता है तो कुछ समय पश्चात वह ठंडा हो जाता है। इसका क्या कारण है?
उत्तर

गरम पात्र अपने आस-पास ऊष्मा को विकिरित करके ठंडा हो जाता है।

ऐसा क्यों होता है: सभी वस्तुओं में ऊष्मा का विकिरण होता है। जो वस्तु अपने परिवेश से अधिक गरम है वह जितनी ऊष्मा लेती है उससे अधिक देती है, अतः उसका तापमान तब तक घटता है जब तक वह कमरे जितनी गरम न रह जाए। गरम पात्र निरंतर अपने चारों ओर की ठंडी वायु, दीवारों और मेज को ऊष्मा भेजता रहता है और ठंडा हो जाता है। (कुछ ऊष्मा उस सतह में चालन द्वारा और ऊपर की वायु में संवहन द्वारा भी जाती है, परंतु केवल विकिरण से भी पात्र ठंडा हो जाएगा।)
क्या आप जानते हैं? यह आदान-प्रदान दोनों ओर होता है। गरम कमरे में रखा ठंडे जल का गिलास अपने परिवेश से विकिरण द्वारा ऊष्मा ग्रहण करता है और धीरे-धीरे गरम हो जाता है।
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