प्र1.
मुझे आश्चर्य होता है कि आग से गरमी हम तक कैसे पहुँचती है?
उत्तर
आग की ऊष्मा हम तक विकिरण द्वारा पहुँचती है — वह गरम वस्तु (आग) से सीधे हम तक आती है और इस स्थानांतरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
| प्रक्रिया | ऊष्मा कैसे जाती है | माध्यम चाहिए? | यहाँ उदाहरण |
|---|---|---|---|
| चालन | कण अपने पड़ोसी कण को ऊष्मा देता है; कण अपने स्थान पर स्थिर रहते हैं | हाँ | लौ → धातु का पात्र |
| संवहन | गरम कण स्वयं एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं | हाँ | आग से ऊपर उठता धुआँ और गरम वायु |
| विकिरण | ऊष्मा गरम वस्तु से सीधे हम तक आती है | नहीं | आग के सामने बैठे पेमा और पालदेन को लगती गरमी |
यह विकिरण ही क्यों है: आग की गरम वायु सीधी ऊपर उठ जाती है, अतः संवहन गरमी को बगल में बैठे बच्चों के चेहरे तक नहीं ला सकता। वे आग को छू भी नहीं रहे, अतः चालन भी नहीं। गरमी बीच के अंतराल को पार करके सीधे उन तक पहुँचती है — यही विकिरण है। सूर्य की ऊष्मा भी इसी प्रकार पृथ्वी तक आती है, वह भी वहाँ से जहाँ कोई कण ही नहीं है।