कक्षा ७ विज्ञान अध्याय 7 प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
ऊष्मा गरम स्थान से ठंडे स्थान की ओर तीन विधियों से स्थानांतरित होती है — चालन , संवहन और विकिरण । पेमा और पालदेन एक ही शाम में तीनों देखते हैं — आग पर रखा धातु का पात्र, जलती लकड़ियों से उठता धुआँ और आग के पास बैठने पर मिलने वाली गरमी। चालन में ऊष्मा किसी वस्तु के गरम भाग से उसके ठंडे भाग की ओर जाती है। गरम हुआ कण अपनी ऊष्मा अगले कण को दे देता है, परंतु कण स्वयं अपने स्थान से नहीं हटते । ठोस पदार्थों में ऊष्मा मुख्यतः इसी विधि से स्थानांतरित होती है। जो पदार्थ ऊष्मा को सरलता से अपने में से संचरित होने देते हैं — ऐलुमिनियम, लोहा, स्टील जैसी धातुएँ — वे ऊष्मा के सुचालक हैं। लकड़ी, काँच, मृदा, चीनी मिट्टी, प्लास्टिक और वायु ऊष्मा के कुचालक हैं। ऊनी वस्त्र, दो पतले कंबल और खोखली ईंटें — तीनों वायु को फँसाकर ही कार्य करते हैं। संवहन में ऊष्मा द्रव या गैस के कणों की वास्तविक गति द्वारा एक स्थान
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| पद | अर्थ | अध्याय से उदाहरण | याद रखने योग्य बात |
|---|---|---|---|
| चालन | किसी वस्तु के गरम भाग से ठंडे भाग में ऊष्मा का स्थानांतरण | गरम की गई धातु-पट्टी से पिन 1, 2, 3, 4 का क्रम से गिरना (क्रियाकलाप 7.1) | कण ऊष्मा आगे बढ़ाते हैं, पर अपना स्थान नहीं छोड़ते |
| ऊष्मा का सुचालक | वह पदार्थ जो ऊष्मा को सरलता से अपने में से संचरित होने देता है | ऐलुमिनियम, लोहा, स्टील — भोजन पकाने के पात्र | सभी धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं |
| ऊष्मा का कुचालक (ऊष्मारोधी) | वह पदार्थ जो ऊष्मा को सरलता से संचरित नहीं होने देता | लकड़ी, काँच, मृदा व चीनी मिट्टी के कप, प्लास्टिक, वायु | वायु सबसे अच्छे कुचालकों में से है — ऊन और खोखली ईंटें इसी का उपयोग करती हैं |
| संवहन | द्रव या गैस के कणों की वास्तविक गति द्वारा ऊष्मा का स्थानांतरण | बीकर में रंगीन धारी का मध्य से ऊपर उठना और किनारों से नीचे आना (क्रियाकलाप 7.3) | यह केवल द्रवों और गैसों में होता है, ठोसों में नहीं |
| समुद्र समीर | समुद्र से स्थल की ओर ठंडी वायु का गमन | दिन के समय, जब स्थल समुद्र से अधिक गरम होता है [चित्र 7.7 (क)] | तटीय घरों की खिड़कियाँ समुद्र की ओर रखी जाती हैं |
| स्थल समीर | स्थल से समुद्र की ओर ठंडी वायु का गमन | रात के समय, जब समुद्र स्थल से अधिक गरम होता है [चित्र 7.7 (ख)] | दिन और रात में पवन की दिशा विपरीत हो जाती है |
| विकिरण | ऊष्मा का वह स्थानांतरण जिसके लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती | सूर्य की ऊष्मा का पृथ्वी तक पहुँचना; आग के पास बैठने पर गरमी लगना | सभी वस्तुएँ अपने परिवेश में ऊष्मा का विकिरण करती हैं |
| जल-चक्र | जलवाष्प के रूप में जल का निरंतर ऊपर उठना और वर्षण द्वारा नीचे लौटना | वाष्पन, वाष्पोत्सर्जन, संघनन और वर्षण (चित्र 7.9) | यह जल का पुनर्वितरण करता है और कुल जल-मात्रा को संरक्षित रखता है |
| वाष्पन | जल का जलवाष्प में परिवर्तन | धूप वाले दिन गीले कपड़ों का शीघ्र सूखना | सूर्य की ऊष्मा वाष्पन को तीव्र कर देती है |
| वाष्पोत्सर्जन | पेड़-पौधों से जल का वाष्प के रूप में निकलना | चित्र 7.9 में पेड़ से ऊपर जाता तीर | यह वाष्पन के साथ वायु में जलवाष्प बढ़ाता है |
| वर्षण | बादलों से जल का वर्षा, हिम अथवा ओलों के रूप में गिरना | बादलों से वर्षा, हिम और ओले | यह जल-चक्र का नीचे की ओर वाला भाग है |
| अंतःस्यंदन | मृदा और चट्टानों से सतही जल के रिसने की प्रक्रिया | जल का बजरी से सबसे तीव्र और मृदा से सबसे धीमा रिसना (क्रियाकलाप 7.5) | चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े स्थान रिसाव को तीव्र करते हैं |
| भौम जल | भू-सतह के नीचे अवसादों के छिद्रों और चट्टानों की दरारों में संग्रहीत जल | कुँओं और हैंडपंपों से निकाला जाने वाला जल | यह असीमित नहीं है — इसका अवक्षय हो रहा है |
| जलभृत | अवसादों और चट्टानों की वह भूमिगत परत जो छिद्रों में जल संग्रहीत करती है | चित्र 7.12 — जलभृत से जल लेता कुआँ | यह कुछ मीटर से सैकड़ों मीटर गहराई तक हो सकता है |
अभ्यास
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 7.1
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 7.2
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 7.3
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 7.4
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- गहन चिंतन
- वैज्ञानिक से परिचय
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 7.5
- पाठ्य प्रश्न
- विज्ञान एवं समाज
- आइए, और अधिक सीखें
- अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ