कुतूहल अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पृथ्वी की सतह से जल का अंतःस्यंदन किस प्रकार होता है?
उत्तर

पृथ्वी पर गिरने वाला वर्षा-जल पूरा बहकर नहीं चला जाता। उसका एक भाग मृदा के कणों के बीच के सूक्ष्म रिक्त स्थानों और चट्टानों की दरारों में समा जाता है और धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता है। मृदा और चट्टानों से सतही जल के रिसने की इस प्रक्रिया को अंतःस्यंदन कहते हैं।

वर्षा का जल भूमि पर गिरता है
↓ मृदा और चट्टान के कणों के बीच के स्थानों में प्रवेश करता है (अंतःस्यंदन)
↓ छिद्रों से होता हुआ और गहरा उतरता है
↓ अवसादों के छिद्रों और चट्टानों की दरारों में एकत्र हो जाता है
= भौम जल, जो जलभृत नामक परतों में संग्रहीत रहता है
गति किससे तय होती है: यदि मृदा और चट्टानों के बीच के स्थान अधिक चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े हुए हों तो जल अधिक आसानी से अंतःस्यंदित होता है (चित्र 7.11)। क्रियाकलाप 7.5 में इसी बात की जाँच मृदा, बालू और बजरी से की जाती है।
संकेत: कुँओं और हैंडपंपों से लोग जो जल निकालते हैं, वह यही रिसा हुआ जल है जिसे पुनः सतह पर लाया जाता है।
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