कुतूहल अध्याय 7 वैज्ञानिक से परिचय

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
वराहमिहिर कौन थे और उन्होंने अपनी कृति बृहत् संहिता में वर्षा के विषय में क्या बताया?
उत्तर

वराहमिहिर छठी शताब्दी के महान खगोलज्ञ और गणितज्ञ थे, जो उज्जयिनी — वर्तमान उज्जैन, मध्यप्रदेश — में रहते थे।

उन्होंने अपनी कृति बृहत् संहिता में मौसमी वर्षण का अनुमान लगाने की एक पद्धति का सूत्रपात किया। उनके अनुमान प्राकृतिक परिघटनाओं के सूक्ष्म अवलोकन पर आधारित थे, जैसे —

  • बादलों का बनना — उनका आकार, रंग और व्यवहार;
  • हवा का प्रवाह — पवन की दिशा और स्वरूप;
  • तारों तथा चंद्रमा की स्थिति;
  • तथा अन्य प्राकृतिक परिघटनाएँ।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: वराहमिहिर जिन पवनों और बादलों का अवलोकन करते थे, वे स्वयं ऊष्मा-स्थानांतरण से ही बनते हैं — सूर्य स्थल और जल को असमान रूप से गरम करता है, वायु संवहन द्वारा ऊपर उठती है, जल वाष्पित होकर संघनित होता है और बादल बनते हैं। आधुनिक उपकरणों के आने से बहुत पहले वे उसी जल-चक्र को पढ़ रहे थे जिसे आप इस अध्याय में पढ़ रहे हैं, और उससे किसानों को बुवाई की योजना बनाने में सहायता कर रहे थे।
क्या आप जानते हैं? आज भारत मौसम विज्ञान विभाग यही कार्य उपग्रहों, रडारों और कंप्यूटर मॉडलों से करता है — परंतु मूल विचार वही है: बादल, पवन और आर्द्रता देखिए और वर्षा का अनुमान लगाइए।
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