कुतूहल अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पिन 1, पिन 2 से पहले क्यों गिरती है? सभी पिन एक साथ क्यों नहीं गिरती हैं?
उत्तर

पिन 1 इसलिए पहले गिरती है क्योंकि वह मोमबत्ती की लौ के सबसे निकट है, और सभी पिनें एक साथ इसलिए नहीं गिरतीं क्योंकि ऊष्मा को पट्टी में आगे बढ़ने में समय लगता है

ऐसा क्यों होता है: चालन एक क्रमिक प्रक्रिया है। गरम सिरे का कण गरम होता है, वह अगले कण को ऊष्मा देता है, वह उससे अगले को — और यह क्रम चलता रहता है। अतः पट्टी धीरे-धीरे गरम होती है — पहले लौ के पास और बाद में दूर वाले भाग में। इसलिए पिन 1 के नीचे की मोम, पिन 2 के नीचे की मोम से पहले पिघलती है और इसी क्रम में आगे भी। यदि ऊष्मा एक सिरे से दूसरे सिरे तक तुरंत पहुँच जाती तो चारों पिनें एक ही क्षण गिरतीं — ऐसा नहीं होता, और यही चालन का प्रमाण है।
प्र2.
आप अपने अवलोकनों से क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? क्या आपको लगता है कि धातु की पट्टी में ऊष्मा का स्थानांतरण उस सिरे से हो रहा है जहाँ से धातु की पट्टी को गरम किया जा रहा है?
उत्तर

हाँ। अवलोकन स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि ऊष्मा का स्थानांतरण धातु-पट्टी में गरम किए जा रहे सिरे से ठंडे सिरे की ओर हो रहा है।

निष्कर्ष इस प्रकार हैं —

  • ऊष्मा किसी वस्तु के गरम भाग से उसके ठंडे भाग की ओर जाती है। इस प्रक्रिया को चालन कहते हैं।
  • यह स्थानांतरण तत्काल नहीं होता — यह पट्टी में क्रमशः आगे बढ़ता है, इसीलिए पिनें क्रम से गिरती हैं।
  • न तो धातु स्वयं गति करती है और न ही उसके कण। गरम कण केवल अपनी ऊष्मा अगले कण को दे देता है।
  • धातुएँ ऐसा सरलता से होने देती हैं, अतः वे ऊष्मा की सुचालक हैं।
संकेत: पिनों का गिरना केवल एक संकेतक है। वास्तव में आप मोम का पिघलना देख रहे हैं, और मोम तभी पिघलती है जब उसके नीचे की पट्टी गरम हो जाए।
प्र3.
यदि हम धातु की पट्टी के स्थान पर लकड़ी अथवा काँच जैसे पदार्थों से बनी पट्टी का उपयोग करते हैं तो क्रियाकलाप 7.1 में पिनें नीचे नहीं गिरेंगी। क्या आप ‘धातुओं और अधातुओं का संसार’ नामक अध्याय के आधार पर प्राप्त जानकारी का उपयोग करके इसका कारण सोच सकते हैं?
उत्तर

क्योंकि लकड़ी और काँच अधातुएँ हैं और ऐसे पदार्थ ऊष्मा को अपने में से सरलता से संचरित नहीं होने देते। ये ऊष्मा के कुचालक (ऊष्मारोधी) हैं।

ऐसा क्यों होता है: धातु में ऊष्मा एक कण से दूसरे कण तक बहुत तेजी से पहुँचती है, अतः पूरी पट्टी शीघ्र गरम हो जाती है। लकड़ी या काँच में यह स्थानांतरण अत्यंत धीमा होता है। ऊष्मा लौ के पास ही सिमटी रह जाती है और पिनों के नीचे वाला भाग मोम पिघलाने योग्य गरम कभी नहीं हो पाता। इसलिए पिनें चिपकी ही रहती हैं।
क्या आप जानते हैं? मृदा और चीनी मिट्टी (पॉर्सिलेन) भी ऊष्मा के कुचालक हैं। इसीलिए कुल्हड़ या चीनी मिट्टी के कप में रखी चाय-कॉफी स्टील के गिलास की तुलना में कहीं अधिक समय तक गरम रहती है — और स्टील का गिलास उँगलियाँ जला देता है, कुल्हड़ नहीं।
प्र4.
अपने आस-पास की कुछ वस्तुओं की सूची बनाइए और उन्हें तालिका 7.2 में ऊष्मा के सुचालक अथवा कुचालक के रूप में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर

घर या कक्षा में मिलने वाली वस्तुओं से भरी हुई तालिका 7.2 इस प्रकार है।

तालिका 7.2 — ऊष्मा के सुचालकों/कुचालकों की सूची
क्र.सं.वस्तुएँऊष्मा के सुचालक/कुचालक
1.स्टीलसुचालक
2.लकड़ीकुचालक
3.ऐलुमिनियम (कुकर, तवा)सुचालक
4.ताँबा (तार, पात्र की तली)सुचालक
5.लोहा (कील, कलछी)सुचालक
6.काँच (गिलास, खिड़की का शीशा)कुचालक
7.मृदा / चीनी मिट्टी (कुल्हड़, कप)कुचालक
8.प्लास्टिक (मग, बाल्टी)कुचालक
9.ऊन (स्वेटर, कंबल)कुचालक
10.कागज और गत्ताकुचालक
11.रबर (चप्पल का तल्ला, हत्थे की पकड़)कुचालक
12.वायुकुचालक
संकेत: एक सरल परीक्षण — एक ही कमरे में रखी धातु की और लकड़ी की वस्तु को छूकर देखिए। दोनों का तापमान समान होने पर भी धातु अधिक ठंडी लगती है। वह केवल इसलिए ठंडी लगती है क्योंकि सुचालक होने के कारण वह आपके हाथ से ऊष्मा शीघ्रता से खींच लेती है।
प्र5.
क्या आपकी सूची में वायु सम्मिलित है? अगर यह सूची में है तो आपने इसे कहाँ रखा है?
उत्तर

हाँ — और वायु को ऊष्मा के कुचालकों (ऊष्मारोधी) वाले स्तंभ में ही रखना चाहिए।

ऐसा क्यों होता है: गैस के कण एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं, अतः ऊष्मा एक कण से दूसरे कण तक सरलता से नहीं पहुँच पाती। इसीलिए फँसी हुई वायु हमारे लिए उपलब्ध सर्वोत्तम ऊष्मारोधकों में से एक है और हम इसका उपयोग सर्वत्र करते हैं —
  • ऊनी वस्त्र अपने छिद्रों में वायु को फँसा लेते हैं; यह फँसी हुई वायु हमारे शरीर से परिवेश की ओर ऊष्मा के प्रवाह को कम कर देती है, अतः हमें गरमी का अनुभव होता है।
  • दो पतले कंबल एक मोटे कंबल से अधिक गरम रखते हैं, क्योंकि उनके बीच वायु की एक परत फँस जाती है (चित्र 7.2)।
  • खोखली ईंटें अपने भीतर वायु रोक लेती हैं, जिससे घर सर्दियों में गरम और गर्मियों में ठंडे रहते हैं।
क्या आप जानते हैं? वायु कुचालक अवश्य है, परंतु जब वह स्वतंत्र रूप से बह सकती है तो संवहन द्वारा ऊष्मा बहुत अच्छी तरह ले जाती है। वह ऊष्मारोधी का कार्य केवल तभी करती है जब फँसी हुई हो।
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