प्र1.
क्या ऐसे घरों का निर्माण करना संभव है जो बाहरी गरमी और सरदी से अधिक प्रभावित न हों?
उत्तर
हाँ, संभव है। बहुत गरम अथवा बहुत ठंडे जलवायु वाले स्थानों में बनाए गए घर ऊष्मा-स्थानांतरण की अवधारणा का उपयोग करके स्वयं को ठंडा या गरम रखते हैं — मुख्यतः भीतर और बाहर के बीच ऊष्मा का कोई कुचालक रखकर।
- बाहरी दीवारों में खोखली ईंटें: खोखले भाग में फँसी वायु कुचालक होती है, अतः घर सर्दियों में गरम और गर्मियों में ठंडे रहते हैं।
- लकड़ी की दो परतों के बीच गोबर और मृदा: जैसा उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित मोरी विकासखंड में किया जाता है। लकड़ी और मृदा कुचालक हैं, अतः वे ऊष्मा की हानि रोककर भारी हिमपात में भी घर को गरम रखते हैं।
- मोटी मिट्टी की दीवारें और छप्पर की छतें भारत के गरम-शुष्क भागों में, तथा सूर्य की ऊष्मा को परावर्तित करने वाली हल्के रंग की बाहरी दीवारें।
यह कैसे काम करता है: ऊष्मा सदैव अधिक गरम ओर से ठंडी ओर बहती है। यदि उनके बीच की दीवार कुचालक हो तो यह प्रवाह लगभग रुक जाता है — गर्मियों में ऊष्मा भीतर नहीं आ पाती और सर्दियों में बाहर नहीं जा पाती।