कुतूहल अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपके परिणामों का आपके अनुमानों के साथ मिलान हो रहा है?
उत्तर

हाँ — अधिकांश विद्यार्थियों के परिणाम अनुमान से पूरी तरह मिलते हैं: जल बजरी से सबसे तीव्र गति से, बालू से धीमे और मृदा से सबसे धीमे रिसता है।

यदि मिलान न हो तो: यह असफलता नहीं, उपयोगी जानकारी है। जाँचिए कि कहीं मृदा ढीली तो नहीं भरी थी, किसी एक ढक्कन का छिद्र बड़ा तो नहीं था, या बजरी में महीन धूल तो नहीं भरी थी। विज्ञान में गलत सिद्ध हुआ अनुमान आपको कारण खोजने के लिए वापस भेजता है — और यही क्रियाकलाप आपको सिखाता है कि शेष सभी परिस्थितियाँ समान रखना कितना आवश्यक है।
संकेत: जल डालने से पहले अपना अनुमान लिख लीजिए। ईमानदारी से लगाए गए अनुमान की अवलोकन से तुलना करना ही तालिका 7.5 के ‘अनुमान’ और ‘अवलोकन’ स्तंभों का उद्देश्य है।
प्र2.
आपने यह अवलोकन किया होगा कि जल बजरी से सबसे तीव्रगति से, बालू से धीमे से और मृदा में से अत्यंत धीरे रिसता है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

इसका कारण कणों के बीच के रिक्त स्थानों का आकार है।

बजरी — बड़े कण, चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े स्थान → जल सबसे तीव्र रिसता है
बालू — छोटे कण, सँकरे स्थान → जल धीमे रिसता है
मृदा — अत्यंत महीन, सटे हुए कण, बहुत सूक्ष्म स्थान → जल सबसे धीमे रिसता है
ऐसा क्यों होता है: जल केवल कणों के बीच के रिक्त स्थानों से होकर जा सकता है, कणों में से होकर नहीं। बजरी के कणों के बीच के स्थान बालू और मृदा की तुलना में अधिक चौड़े होते हैं, अतः जल बजरी से सरलता से रिस जाता है। यदि मृदा और चट्टानों के बीच के स्थान अधिक चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े हुए हों तो जल अधिक आसानी से अंतःस्यंदित होता है (चित्र 7.11)। मृदा में ये अंतराल इतने महीन और असंबद्ध होते हैं कि जल लगभग रुक ही जाता है।
क्या आप जानते हैं? भूमि के नीचे भी यही नियम चलता है। बालू और बजरी की भूमिगत परतें अच्छे जलभृत बनाती हैं, क्योंकि वे जल को भीतर भी लेती हैं और अपने छिद्रों में बहुत सारा जल रोके भी रखती हैं।
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