प्र1.
हिम-स्तूप क्या है? इसे किस प्रकार बनाया जाता है और यह लद्दाख के लोगों की किस प्रकार सहायता करता है?
उत्तर
हिम-स्तूप हिम की एक लंबी, शंकु के आकार की संरचना है जिसे लद्दाख में सर्दियों में बनाया जाता है ताकि वसंत के सूखे महीनों के लिए जल संचित रहे (चित्र 7.13)।
इसे कैसे बनाया जाता है —
- शीतकाल में पहाड़ी जलधाराओं का जल भूमिगत नलिकाओं (पाइप) द्वारा नीचे की ओर प्रवाहित किया जाता है।
- इस जल को फुहारों की तरह ठंडी वायु में गिराया जाता है।
- गिरते समय अत्यंत कम ताप के कारण यह जल जम जाता है।
- हिम परत दर परत बढ़ती जाती है और एक लंबी शंकु के आकार की संरचना — हिम-स्तूप — बन जाती है।
यह कैसे सहायता करता है: लद्दाख में वसंत के मौसम में जलधाराएँ प्रायः सूख जाती हैं, क्योंकि सूर्य की किरणों की गरमी पहाड़ों पर बर्फ पिघलाने के लिए तब पर्याप्त नहीं होती। हिम-स्तूप वसंत में धीरे-धीरे पिघलता है और खेती तथा गर्मियों की अन्य आवश्यकताओं के लिए जल प्रदान करता रहता है।
इसके भीतर का विज्ञान: शंकु का आकार ही इसकी चतुराई है। शंकु में हिम के आयतन की तुलना में सतह-क्षेत्रफल कम होता है और उसकी अपनी छाया भी उसके बड़े भाग को ढकती है, अतः सूर्य का विकिरण उसे एक साथ नहीं, धीरे-धीरे पिघलाता है — ठीक तभी जब किसानों को जल चाहिए।
क्या आप जानते हैं? भारत के अन्य भागों में उपयोग किए जाने वाले वर्षा जल संग्रहण ढाँचों और पुन:भरण गड्ढों के पीछे भी यही सोच है — जब जल अधिक हो तब उसे रोकिए, संचित कीजिए और अभाव के समय काम में लाइए।