मोमबत्ती जलाते ही बीकर की तली के मध्य से बैंगनी रंग की एक धारी सीधी ऊपर उठती है, ऊपर जाकर फैलती है और फिर किनारों से नीचे आती है [चित्र 7.5 (ख)]। यह धारी तब तक चक्कर लगाती रहती है जब तक बीकर का संपूर्ण जल रंगीन नहीं हो जाता।
क्रियाकलाप 7.3 की संवहन धारा — रंगीन धारी लौ के ऊपर मध्य से ऊपर उठती है और ठंडे किनारों से नीचे आती है।
ऐसा क्यों होता है: पोटैशियम परमैंगनेट केवल जल को रंग देता है ताकि उसकी गति दिखाई दे सके। लौ के ठीक ऊपर तली का जल गरम होकर फैलता है, हल्का होकर ऊपर उठता है। किनारों का तुलनात्मक रूप से ठंडा और भारी जल नीचे आकर उसका स्थान ले लेता है, गरम होता है और पुनः ऊपर उठ जाता है। इस निरंतर परिसंचरण को संवहन कहते हैं, और रंगीन धारी गतिशील जल-कणों का मार्ग मात्र है।
सावधानी: पोटैशियम परमैंगनेट और जलती हुई मोमबत्ती का उपयोग शिक्षक अथवा किसी वयस्क के निरीक्षण में ही कीजिए तथा बीकर को तिपाई स्टैंड पर तार की जाली सहित रखिए।
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