यह क्षेत्र-परियोजना है, अतः विवरण उसी पर आधारित होना चाहिए जो आप स्वयं देखें और सुनें। इसे करने की विधि और अच्छे विवरण की आवश्यक बातें नीचे दी गई हैं।
कैसे करें
- पास का कोई स्थल चुनिए — विद्यालय या भवन की छत का वर्षा जल संग्रहण तंत्र, कॉलोनी का पुन:भरण गड्ढा या सोख्ता गड्ढा, गाँव का तालाब या जोहड़, चेक डैम अथवा बावड़ी।
- शिक्षक या किसी बड़े के साथ जाइए। कॉपी, मापन-फीता और कैमरा या रेखाचित्र बनाने के लिए पेंसिल साथ रखिए।
- बनाने और देखभाल करने वाले लोगों से पूछिए — यह किसने और कब बनवाया? लागत कितनी आई? कितना जल एकत्र होता है? जल कहाँ जाता है? इसकी सफाई कौन और कितनी बार करता है? क्या बनने के बाद पास के कुएँ का जल-स्तर बढ़ा है?
- भागों का रेखाचित्र बनाइए या चित्र लीजिए — जल-ग्रहण क्षेत्र, नाली, उतरती नली, प्रथम-प्रवाह निकास, छन्ना, गड्ढा या टंकी।
अच्छे विवरण में क्या-क्या होना चाहिए
- स्थल का नाम व स्थान तथा भ्रमण की तिथि।
- ढाँचे का नामांकित चित्र।
- निर्माण कैसे हुआ — सामग्री, गहराई, छन्ने की परतें।
- यह कैसे कार्य करता है — छत या भूमि से गड्ढे तक जल का पूरा मार्ग।
- लोगों द्वारा बताए गए लाभ और आने वाली कठिनाइयाँ।
- अध्याय से जोड़ते हुए आपका अपना निष्कर्ष — अंतःस्यंदन, जलभृत, भौम जल का पुन:भरण।
नमूना उत्तर: “हम अपने विद्यालय के मैदान के कोने में बने पुन:भरण गड्ढे को देखने गए। यह लगभग 1.5 मीटर चौड़ा और 3 मीटर गहरा वर्गाकार गड्ढा है। विद्यालय की छत का वर्षा-जल एक नली से आकर पहले एक छोटी कोठरी में गिरता है जहाँ पत्तियाँ और धूल रुक जाती हैं, और फिर गड्ढे में जाता है। गड्ढे में परतें भरी हैं — सबसे नीचे बड़े पत्थर, उनके ऊपर बजरी और सबसे ऊपर मोटी बालू। देखभाल करने वाले ने बताया कि बालू की परत हर वर्षा-ऋतु से पहले साफ की जाती है। इन परतों से होकर जल अंतःस्यंदन द्वारा भूमि में रिसता है और नीचे के जलभृत तक पहुँचता है। चार वर्ष पहले यह गड्ढा बनने के बाद से विद्यालय का नलकूप मई में नहीं सूखा, जबकि पहले सूख जाता था। हमने समझा कि बजरी और मोटी बालू इसीलिए भरी जाती है क्योंकि चौड़े, खुले और परस्पर जुड़े स्थानों से जल सबसे तीव्र गति से रिसता है — ठीक वही जो हमने क्रियाकलाप 7.5 में देखा था।”