कक्षा ७ विज्ञान अध्याय 8 समय एवं गति का मापन के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

मनुष्य ने सबसे पहले प्रकृति की उन घटनाओं से समय जाना जो एक निश्चित समयावधि के पश्चात पुनरावृत्त होती हैं — सूर्य का उदय एवं अस्त होना, चंद्रमा की कलाएँ और बदलती ऋतुएँ। इन्हीं से पंचांग बने और फिर दिन के भीतर के लघु समयांतराल मापने के यंत्र — धूप-घड़ी , जल-घड़ी , रेत-घड़ी और मोमबत्ती-घड़ी । भारत में समय-मापन की समृद्ध परंपरा रही है। छाया-आधारित मापन का उल्लेख कौटिल्य के अर्थशास्त्र में है और वराह मिहिर ने लगभग सामान्य संवत् 530 में इसका सटीक व्यंजक दिया। प्लवमान पात्र प्रकार की जल-घड़ी अर्थात घटिका यंत्र , जिसका पहला उल्लेख आर्यभट्ट ने किया, भरने और डूबने में 24 मिनट लेती थी — इसीलिए एक दिन 60 घटियों में बाँटा गया। जयपुर के जंतर-मंतर का सम्राट यंत्र 27 मीटर ऊँचा है और 2 सेकंड तक की अल्पावधि माप सकता है। सरल लोलक में एक छोटी धातु की गेंद ( गोलक ) एक लंबे धागे द्वारा किसी दृढ़ आधार से लटकी हो

त्वरित पुनरावृत्ति
पदअर्थअध्याय से उदाहरण / विवरणध्यान रखने योग्य बात
धूप-घड़ीवह युक्ति जिसमें सूर्य के प्रकाश द्वारा किसी वस्तु की परछाई की परिवर्तनीय स्थिति से समय पढ़ा जाता हैजयपुर के जंतर-मंतर का सम्राट यंत्र — 27 मीटर ऊँचा, छाया प्रति सेकंड लगभग 1 मिलीमीटर खिसकती हैयह स्थानीय अथवा सौर समय बताती है, अतः भारतीय मानक समय के लिए संशोधन आवश्यक है
जल-घड़ीवह घड़ी जिसमें किसी पात्र से बाहर अथवा भीतर होने वाले जल-प्रवाह से समय मापा जाता हैजल-निष्क्रमण प्रकार [चित्र 8.2 (क)] तथा प्लवमान पात्र प्रकार या घटिका यंत्र [चित्र 8.2 (ख)]जल का स्तर घटने पर प्रवाह की दर घट जाती है — इसीलिए प्लवमान पात्र प्रकार का विकास हुआ
घटिका (घटी)घटिका यंत्र के पात्र के एक बार डूबने से मापा गया समय-मात्रकछिद्र ऐसा बनाया जाता था कि पात्र को भरने और डूबने में 24 मिनट लगें24 घंटे ÷ 24 मिनट = 60, अतः एक दिन 60 समान घटियों में विभाजित था
सरल लोलकएक लंबे धागे द्वारा दृढ़ आधार से लटकी छोटी धातु की गेंद (गोलक)चित्र 8.7 (क) — दृढ़ आधार, लंबा धागा, गोलकविरामावस्था में गोलक माध्य स्थिति 'अ' पर होता है
दोलनगोलक की एक पूरी आवाजाही: अ → ब → स → अ (अथवा ब → स → ब)चित्र 8.7 (ख), जिसमें 'ब' और 'स' दो चरम स्थितियाँ हैंकेवल 'अ' से 'ब' और वापस 'अ' तक जाना आधा दोलन है
दोलनकाललोलक द्वारा एक दोलन पूरा करने में लिया गया समयक्रियाकलाप 8.2 में (10 दोलनों का समय) ÷ 10 से ज्ञात किया गयानिश्चित लंबाई के लिए एक स्थान पर अचर; गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं
आवर्ती गतिवह गति जो अपने पथ को एक निश्चित समयावधि के पश्चात दोहराती हैलोलक की दोलन-गतिपुरानी हो या नई — प्रत्येक घड़ी किसी आवर्ती प्रक्रम पर ही आधारित है
सेकंड (s)समय का SI मात्रक60 s = 1 min; 60 min = 1 h'5 s' लिखिए, '5 सेकं.' नहीं; संकेत छोटे अक्षरों में और एकवचन में
चालकिसी वस्तु द्वारा इकाई समय में चली गई दूरीचाल = चली गई कुल दूरी ÷ लिया गया कुल समयSI मात्रक m/s; km/h भी। 1 m/s = 3.6 km/h
औसत चालपूरी यात्रा की कुल दूरी को कुल समय से विभाजित करने पर प्राप्त चाललगातार तीन घंटों में 60 km, 70 km और 50 km चलने वाली कार की औसत चाल 60 km/h हैयह अलग-अलग चालों का औसत नहीं होती
एकसमान रेखीय गतिसरल रेखा में नियत (अपरिवर्तित) चाल से गतितालिका 8.3 में रेलगाड़ी X प्रत्येक 10 मिनट में 20 km चलती हैसमान समय-अंतरालों में समान दूरियाँ — दूरी-समय ग्राफ सरल रेखा
असमान रेखीय गतिसरल रेखा में ऐसी गति जिसमें चाल बदलती रहती हैतालिका 8.3 में रेलगाड़ी Y क्रमशः 20, 15, 15, 25, 20 और 25 km चलती हैसमान समय-अंतरालों में असमान दूरियाँ — ग्राफ मुड़ी हुई रेखा
चालमापी / पथमापीवाहनों में लगे यंत्र: चालमापी चाल को km/h में दर्शाता है, पथमापी चली गई दूरी को किलोमीटर में मापता हैस्कूटर, मोटर साइकिल, कार एवं बस में लगे होते हैंचालमापी → चाल; पथमापी → दूरी
  1. पाठ्य प्रश्न
  2. क्रियाकलाप 8.1: आइए, निर्माण करें
  3. पाठ्य प्रश्न
  4. क्रियाकलाप 8.2: आइए, प्रयोग करें
  5. एक वैज्ञानिक की तरह सोचिए!
  6. क्रियाकलाप 8.3: आइए, पहचानें
  7. पाठ्य प्रश्न
  8. क्रियाकलाप 8.4: आइए, परिकलन करें
  9. पाठ्य प्रश्न
  10. पाठ्य प्रश्न
  11. आइए, और अधिक सीखें
  12. अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ
  13. समग्र दृष्टि
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