कक्षा ७ विज्ञान अध्याय 9 जंतुओं में जैव प्रक्रम के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पोषण, श्वसन, परिसंचरण, उत्सर्जन और जनन — ये जैव प्रक्रम सजीवों की उत्तरजीविता के लिए अनिवार्य हैं। इस अध्याय में पोषण और श्वसन का विस्तार से अध्ययन किया गया है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा जैसे जटिल भोजन-घटक आहार नाल नामक एक लंबी नलिका में सरल रूपों में विघटित होते हैं। यह नलिका मुख से आरंभ होकर गुदा में समाप्त होती है। पाचन मुख से आरंभ होता है — दाँत यांत्रिक पाचन करते हैं और लार मंड को शर्करा में बदलने लगती है। आमाशय पाचक रस, अम्ल और श्लेष्मा देता है; यकृत पित्तरस और अग्न्याशय अग्न्याशयी रस देता है। क्षुद्रांत्र (लगभग 6 मीटर) आहार नाल का सबसे लंबा भाग है। इसके पतले आंतरिक आस्तर पर अँगुली जैसे हजारों प्रवर्ध होते हैं जो पचे हुए पोषकों को रक्त में अवशोषित करते हैं। बृहदांत्र (लगभग 1.5 मीटर) छोटी तो है परंतु अधिक चौड़ी है। यह जल और कुछ लवण अवशोषित करती है, अर्ध ठोस मल मलाशय में एकत्रित ह
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| पद | अर्थ | अध्याय से उदाहरण / विवरण | स्मरणीय बिंदु |
|---|---|---|---|
| आहार नाल | वह लंबी नलिका जिसमें भोजन का पाचन होता है | मुख → ग्रासनली → आमाशय → क्षुद्रांत्र → बृहदांत्र → गुदा | यकृत और अग्न्याशय संबद्ध भाग हैं, नलिका के भाग नहीं |
| यांत्रिक पाचन | भोजन को रासायनिक परिवर्तन के बिना छोटे टुकड़ों में तोड़ना | दाँतों द्वारा संदलन एवं चर्वण | मुख्यतः मुख में होता है |
| लार | मुख का वह द्रव जिसमें पाचक रस होता है | रोटी या चावल के मंड को शर्करा में बदलती है, इसीलिए देर तक चबाने पर मिठास आती है | आयोडीन परीक्षण — मंड पर नीला-काला रंग |
| ग्रासनली (भोजन नली) | मुख से आमाशय तक की लचीली नलिका | भित्तियाँ लहरदार गति से संकुचित और शिथिल होती हैं | यह गति संपूर्ण आहार नाल में होती है |
| आमाशय | पेशीय थैली जो भोजन का मंथन करती है | पाचक रस, अम्ल और श्लेष्मा का स्राव | अम्ल जीवाणुओं को नष्ट करता है; श्लेष्मा आस्तर की रक्षा करती है |
| पित्तरस | यकृत का हल्का क्षारीय स्राव | आमाशय से आए अम्ल को उदासीन करता है और वसा को छोटी गोलिकाओं में तोड़ता है | यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है |
| अग्न्याशयी रस | अग्न्याशय से स्रावित क्षारीय रस | कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा — तीनों पर क्रिया करता है | अम्ल को उदासीन करने में भी सहायक |
| अवशोषण | पचे हुए पोषकों का रक्त में पहुँचना | क्षुद्रांत्र के अँगुली जैसे प्रवर्धों द्वारा | प्रवर्ध सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं |
| बहि:क्षेपण | बिना पचे अपशिष्ट का गुदा द्वारा बाहर निकलना | मलाशय में एकत्रित अर्ध ठोस मल | रेशेयुक्त भोजन से मल-त्याग सरल होता है |
| रोमंथन | आंशिक रूप से पचे भोजन को पुनः मुँह में लाकर अच्छी तरह चबाना | गाय, भैंस, बकरी — रोमंथी जंतु | गाय दिन में लगभग 8 घंटे चबाती है |
| पेषणी (गिजार्ड) | पक्षियों का माँसपेशीय प्रकोष्ठ जो भोजन को पीसता है | निगले गए छोटे कंकड़ों की सहायता से कार्य करता है | पक्षियों के दाँत नहीं होते |
| श्वास लेना | वायु को अंदर लेना (अंत:श्वसन) और बाहर निकालना (उच्छवसन) | अंत:श्वसन में पसलियाँ ऊपर-बाहर, डायाफ्राम नीचे | एक शारीरिक (भौतिक) प्रक्रिया |
| कूपिकाएँ | फेफड़ों की महीन शाखाओं के सिरों पर गुब्बारे जैसे कोश | पतली भित्तियाँ, चारों ओर रक्त से भरी महीन नलिकाएँ | यहीं वास्तव में गैसों का विनिमय होता है |
| श्वसन | ऑक्सीजन की सहायता से ग्लूकोस के विघटन द्वारा ऊर्जा निर्मुक्त होना | ग्लूकोस + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा | एक रासायनिक प्रक्रिया, शरीर के अंदर होती है |
| क्लोम (गलफड़े) | अधिकांश जलीय जंतुओं की विशेषीकृत श्वसन संरचना | मछली तथा मेंढक के टैडपोल | इनमें रक्त-वाहिकाओं की प्रचुर आपूर्ति होती है |
अभ्यास
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- विज्ञान एवं समाज
- क्रियाकलाप 9.1: आइए, जाँच करें
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 9.2: आइए, प्रतिरूप बनाएँ
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 9.3: आइए, खोज करें
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- आइए, और अधिक सीखें
- अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ