कुतूहल अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कभी सोचा है कि आप जो भोजन ग्रहण करते हैं उससे आपको किस प्रकार ऊर्जा मिलती है?
उत्तर

ऊर्जा केवल भोजन से नहीं, अपितु श्वास के साथ ली जाने वाली ऑक्सीजन से भी मिलती है। अकेला भोजन ऊर्जा नहीं दे सकता और अकेली ऑक्सीजन के पास क्रिया करने को कुछ नहीं होता — दोनों का शरीर के भीतर मिलना आवश्यक है।

  1. भोजन पचकर शर्करा (ग्लूकोस) जैसे सरल पदार्थों में विघटित हो जाता है।
  2. ग्लूकोस रक्त में अवशोषित होकर शरीर के हर भाग तक पहुँचता है।
  3. अंत:श्वसित वायु की ऑक्सीजन कूपिकाओं से रक्त में जाती है और वह भी सर्वत्र पहुँचाई जाती है।
  4. ऑक्सीजन ग्लूकोस को विघटित करने में सहायता करती है और ऊर्जा निर्मुक्त होती है। यही श्वसन है।
  5. अपशिष्ट के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनते हैं; रक्त कार्बन डाइऑक्साइड को कूपिकाओं तक लौटा लाता है और हम उसे बाहर निकाल देते हैं।
ग्लूकोस + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
ऐसा क्यों होता है: ऊर्जा ग्लूकोस के अणु के भीतर बंद रहती है और ऑक्सीजन ही उसका ताला खोलती है। इसीलिए दौड़ने के बाद साँस फूलने लगती है — पेशियों को अधिक ऊर्जा चाहिए, अतः अधिक ग्लूकोस विघटित करना है, अतः अधिक ऑक्सीजन चाहिए, अतः श्वास तेज चलने लगती है।
क्या आप जानते हैं? यही वह ऊर्जा है जिससे हम चलते, दौड़ते, खेलते और सोचते भी हैं। चुपचाप बैठे रहने पर भी मस्तिष्क शरीर की ऊर्जा का बड़ा भाग खर्च करता रहता है।
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