प्र1.
विभिन्न जंतुओं में जटिल भोजन-घटक किस प्रकार सरल रूपों में विघटित होकर शरीर द्वारा उपयोग किए जाते हैं? क्या सभी जंतुओं में यह प्रक्रम एक समान होता है अथवा अलग-अलग होता है?
उत्तर
भोजन के जटिल घटक — कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा — आहार नाल नामक एक लंबी नलिका में विघटित होते हैं। यह नलिका मुख से आरंभ होकर गुदा में समाप्त होती है। जैसे-जैसे भोजन इसमें आगे बढ़ता है, विभिन्न भागों से स्रावित पाचक रस उसे सरल रूपों में विघटित करते जाते हैं। ये सरल रूप रक्त में अवशोषित होकर शरीर के प्रत्येक भाग तक पहुँचाए जाते हैं।
| आहार नाल का भाग | प्राप्त होने वाला स्राव | भोजन पर क्रिया |
|---|---|---|
| मुख | लार | दाँत संदलन एवं चर्वण करते हैं (यांत्रिक पाचन); लार मंड को शर्करा में बदलने लगती है |
| आमाशय | पाचक रस, अम्ल और श्लेष्मा | प्रोटीन सरल घटकों में विघटित होते हैं; अम्ल हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है; श्लेष्मा आमाशय के आस्तर की रक्षा करती है |
| क्षुद्रांत्र | यकृत से पित्तरस, अग्न्याशय से अग्न्याशयी रस तथा स्वयं इसकी भित्ति से पाचक रस | वसा, प्रोटीन और शेष कार्बोहाइड्रेट सरलतम रूपों में विघटित होते हैं तथा पोषक रक्त में अवशोषित हो जाते हैं |
| बृहदांत्र | — | जल और कुछ लवण अवशोषित करती है, शेष अर्ध ठोस मल बनता है |
नहीं, यह प्रक्रम सभी जंतुओं में बिलकुल एक समान नहीं होता। मूल योजना समान है, परंतु आहार नाल की संरचना जंतु के भोजन के अनुसार भिन्न होती है।
- गाय और भैंस (रोमंथी) घास को आंशिक रूप से चबाकर निगल लेते हैं और बाद में उसे वापस मुँह में लाकर अच्छी तरह चबाते हैं — इसे रोमंथन कहते हैं।
- पक्षियों के दाँत ही नहीं होते। वे भोजन को पेषणी नामक माँसपेशीय प्रकोष्ठ में, प्रायः निगले हुए कंकड़ों की सहायता से, पीसते हैं।
ऐसा क्यों होता है: मंड या प्रोटीन के बड़े अणु का शरीर सीधे उपयोग नहीं कर सकता। उन्हें इतने छोटे और घुलनशील टुकड़ों में तोड़ना आवश्यक है कि वे आँत की भित्ति से होकर रक्त में जा सकें। पाचक रस यही काम करते हैं।