परियोजना कैसे करें: तीन प्रकार के स्रोतों से जानकारी एकत्रित कीजिए — कोई विज्ञान या स्वास्थ्य की पुस्तक, कोई समाचार पत्र/पत्रिका का लेख, और घर के बुजुर्गों से बातचीत। हर बिंदु के साथ उसका स्रोत लिखिए। फिर रिपोर्ट को शीर्षकों में बाँटिए — मुख की स्वच्छता क्यों आवश्यक है → प्रतिदिन क्या करें → किससे बचें → हमारे बुजुर्ग क्या करते थे → निष्कर्ष। दो पृष्ठ और दाँत साफ करने की विधि का एक छोटा नामांकित चित्र पर्याप्त है।
अच्छी रिपोर्ट में होना चाहिए: कम से कम छह विशिष्ट विधियाँ, हर एक का एक कारण, कम से कम एक बात किसी बुजुर्ग से ली हुई, तथा हर तथ्य का स्रोत स्पष्ट रूप से लिखा हुआ।
नमूना उत्तर:
| उत्तम विधि | यह क्यों लाभप्रद है |
|---|---|
| दिन में दो बार दाँत साफ करना — प्रातः तथा सोने से पहले | भोजन की उस चिपचिपी परत को हटा देता है जिसमें कीटाणु पनपकर दंतक्षय करते हैं |
| दिन में दो बार जीभ साफ करना | जीभ पर जमी परत ही मुख की दुर्गंध का मुख्य कारण है |
| हर भोजन के बाद जल से कुल्ला करना | दाँतों के बीच फँसे भोजन-कण सड़ने से पहले ही धुल जाते हैं |
| टॉफी, चॉकलेट और मीठे पेय कम करना, विशेषकर रात में | दाँतों पर बची शर्करा ही दंतक्षय करने वाले कीटाणुओं का भोजन है |
| कुरकुरे फल-सब्जियाँ खाना — अमरूद, गाजर, खीरा, सेब | इन्हें चबाने से दाँत स्वयं साफ होते हैं और लार का स्राव बढ़ता है |
| दाँतों से बोतल का ढक्कन या कड़ी सुपारी न तोड़ना | दाँतों में दरार पड़ने और टूटने से बचाव |
| हर तीन महीने में टूथब्रश बदलना | मुड़े और घिसे हुए ब्रश कोनों की सफाई नहीं कर पाते |
| वर्ष में एक बार दाँतों की जाँच करवाना | छोटा गड्ढा सरलता से भरा जा सकता है; उपेक्षा करने पर वही कष्टदायक और महँगा हो जाता है |
मेरी दादी से: "विवाह होने तक मैं प्रतिदिन प्रातः नीम की दातुन करती थी, ताँबे की जिभ्भी से जीभ साफ करती थी और हर भोजन के बाद कुल्ला करती थी। मीठा हम बहुत कम खाते थे और हमारे घर में किसी का दाँत खराब नहीं हुआ।"