यदि परखनली 'ख' में अब भी नीला-काला रंग दिखे तो इसका अर्थ है कि कुछ मंड बिना पचा रह गया है। एक बार में केवल एक बात बदलिए और क्रियाकलाप दोहराइए —
- अधिक देर तक चबाइए — 30–60 सेकंड के स्थान पर 90 सेकंड या 2 मिनट, ताकि लार को अधिक समय मिले।
- अधिक अच्छी तरह चबाइए, जिससे चावल महीन टुकड़ों में टूटे और उसका अधिक भाग लार के संपर्क में आए।
- चावल की मात्रा कम लीजिए, ताकि उपलब्ध लार उसके लिए पर्याप्त हो।
- मिश्रण को कुछ मिनट रखा रहने दीजिए और तब आयोडीन डालिए, जिससे पहले से मिली लार को और समय मिल जाए।
- आयोडीन की गिनी हुई कम बूँदें — दोनों परखनलियों में समान संख्या में — डालिए, जिससे तुलना निष्पक्ष रहे।
हाँ, चबाने का समय बढ़ाने से रंग में निश्चित परिवर्तन होता है। जितनी देर चबाएँगे, उतना अधिक मंड शर्करा में बदलेगा, अतः नीला-काला रंग उत्तरोत्तर हल्का पड़ता जाएगा और अंत में बिलकुल नहीं आएगा।
स्वयं जाँचिए: चार परखनलियाँ लीजिए जिनमें क्रमशः 15, 30, 60 और 120 सेकंड चबाए चावल हों। आयोडीन डालकर उन्हें पंक्ति में रखिए — गहरे से लगभग रंगहीन तक की स्पष्ट श्रेणी दिखाई देगी।