कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.2: आइए, प्रयोग करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
गोलक को हल्के से पकड़िए और एक ओर थोड़ा-सा विस्थापित करके छोड़ दीजिए। ध्यान रखिए कि छोड़ते समय गोलक को झटका न लगे और डोरी सम्यक रूप से तनी रहे। क्या आपका लोलक अब दोलन कर रहा है?
उत्तर

हाँ। गोलक एक ओर से दूसरी ओर और फिर वापस — बार-बार उसी पथ पर आता-जाता है। यही दोलन-गति है, और यह आवर्ती है क्योंकि यह अपने पथ को एक निश्चित समयावधि के पश्चात दोहराती है।

इस चरण की दो सावधानियाँ ही तय करती हैं कि प्रयोग सफल होगा या नहीं:

  • गोलक को झटका न दीजिए। झटके से उसे अतिरिक्त चाल मिल जाती है, दोलन चौड़ा और अनियमित हो जाता है और पाठ्यांक बिखर जाते हैं।
  • डोरी तनी रहनी चाहिए। ढीली डोरी पर गोलक झूलने के बजाय झटके खाता है और लोलक की लंबाई बदलती रहती है।
दोलन सदा के लिए क्यों नहीं चलते: वायु का प्रतिरोध और आधार पर होने वाला घर्षण प्रत्येक दोलन में थोड़ी ऊर्जा ले लेते हैं, इसलिए गोलक हर बार कुछ कम ऊँचाई तक उठता है और अंततः रुक जाता है। ध्यान दीजिए कि दोलन छोटा होते जाने पर भी दोलनकाल लगभग नहीं बदलता — यही गुण लोलक को अच्छा समय-मापी बनाता है।
प्र2.
क्या आपके लोलक के दोलनकाल का मान प्रत्येक प्रेक्षण के लिए लगभग समान प्राप्त होता है? इस अवलोकन से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर

हाँ, यह प्रत्येक बार लगभग समान ही प्राप्त होता है। 100 cm लंबाई के लोलक के प्रतिदर्श पाठ्यांकों के साथ तालिका 8.1 इस प्रकार भरी जाएगी। दोलनकाल = (10 दोलनों में लिया गया समय) ÷ 10।

तालिका 8.1 — सरल लोलक का दोलनकाल (डोरी की लंबाई = 100 cm)
क्र.सं.10 दोलनों में लिया गया समय (सेकंड)दोलनकाल (सेकंड)
1.20.120.1 ÷ 10 = 2.01
2.19.919.9 ÷ 10 = 1.99
3.20.220.2 ÷ 10 = 2.02
प्रत्येक बार दोलनकाल ≈ 2 s
पाठ्यांकों में सबसे अधिक अंतर = 2.02 s − 1.99 s = केवल 0.03 s

निष्कर्ष: किसी निश्चित लंबाई के सरल लोलक का एक ही स्थान पर दोलनकाल अचर रहता है। पाठ्यांकों का मामूली अंतर घड़ी चलाने और रोकने में लगी हमारी प्रतिक्रिया-अवधि के कारण है, लोलक के कारण नहीं।

एक दोलन के बजाय 10 दोलनों का समय क्यों मापते हैं: हाथ की प्रतिक्रिया में लगभग 0.2 s लगते हैं। यदि 2 s के एक ही दोलन को मापें तो यह त्रुटि पूरे 10% हो जाती है। 10 दोलनों (20 s) का समय मापने पर वही त्रुटि दस दोलनों में बँट जाती है — प्रति दोलन 0.02 s, अर्थात केवल 1%। अनेक आवृत्तियों का मापन करके भाग देना त्रुटि घटाने की मानक विधि है।
सुझाव: दोलनों की गिनती 0, 1, 2, 3 … से कीजिए — घड़ी 'शून्य' पर चलाइए, 'एक' पर नहीं। एक से गिनने पर दस के भ्रम में वास्तव में नौ ही दोलन मापे जाते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ